भारत की सामान्य दवाएं विदेश में बन सकती हैं अपराध का कारण
ट्रामाडॉल समेत कई दवाओं पर दूसरे देशों में कड़े प्रतिबंध

डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन होने के बावजूद हो सकती है कानूनी कार्रवाई
नई दिल्ली/दि. 1– भारत में डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाएं विदेश यात्रा के दौरान गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकती हैं. हाल ही में पीठ दर्द के उपचार के लिए ट्रामाडॉल दवा साथ लेकर विदेश पहुंचे एक भारतीय नागरिक को विमानतल पर हिरासत में लिए जाने की घटना सामने आई. संबंधित देश में ट्रामाडॉल को नियंत्रित या मादक पदार्थों की श्रेणी में रखे जाने के कारण उसके खिलाफ कार्रवाई की गई. इस घटना ने विदेश जाने वाले भारतीय यात्रियों को अपनी नियमित दवाओं के संबंध में पहले से जानकारी हासिल करने की जरूरत को रेखांकित किया है.
* विमानतल पर क्या होता है?
विदेशी विमानतलों पर यात्रियों के सामान की जांच के दौरान यदि कोई दवा मिलती है और वह संबंधित देश की नियंत्रित अथवा मादक पदार्थों की सूची में शामिल है, तो यात्री को पूछताछ के लिए अलग ले जाया जा सकता है. ऐसी स्थिति में यात्री द्वारा बीमारी या उपचार का कारण बताना और डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाना हमेशा पर्याप्त नहीं होता. संबंधित देश के कानून और वहां दवा का कानूनी वर्गीकरण महत्वपूर्ण होता है.
* प्रिस्क्रिप्शन होने पर भी अड़चन संभव
कई लोगों को लगता है कि डॉक्टर द्वारा लिखा गया प्रिस्क्रिप्शन होने पर वे किसी भी दवा को विदेश ले जा सकते हैं. लेकिन यह धारणा सही नहीं है. अलग-अलग देशों में दवाओं के संबंध में अलग-अलग नियम लागू होते हैं. कुछ देशों में किसी दवा को केवल उपचार के नजरिए से नहीं, बल्कि व्यसन, तस्करी, सार्वजनिक सुरक्षा और मादक पदार्थ नियंत्रण के नियमों के तहत देखा जाता है. इसलिए भारत में वैध और सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली दवा भी किसी दूसरे देश में नियंत्रित पदार्थ या मनोप्रभावी पदार्थ की श्रेणी में आ सकती है.
* विदेश जाने से पहले इन पांच बातों की जांच करें
1. प्रत्येक दवा की जानकारी लें, जिस देश में जा रहे हैं, वहां अपनी दवा कानूनी रूप से ले जाने की अनुमति है या नहीं, इसकी पुष्टि करें.
2. संबंधित दूतावास की वेबसाइट देखें, प्रतिबंधित और नियंत्रित दवाओं की सूची तथा आवश्यक अनुमति की जानकारी जांचें.
3. डॉक्टर से वैकल्पिक दवा के बारे में पूछें, यदि किसी दवा पर प्रतिबंध है, तो डॉक्टर की सलाह से सुरक्षित और कानूनी विकल्प लिया जा सकता है.
4. प्रिस्क्रिप्शन साथ रखें, डॉक्टर द्वारा जारी पर्ची में दवा का स्पष्ट नाम और आवश्यक जानकारी होना चाहिए.
5. दवा मूल पैकेजिंग में रखें, गोलियों को अलग-अलग या बिना लेबल वाली डिब्बी में रखने से संदेह पैदा हो सकता है. इसलिए दवा को उसकी मूल पैकिंग में ही रखना अधिक उचित है.
* दवा वही, लेकिन कानून अलग
भारत में डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर आसानी से मिलने वाली दवाओं के संबंध में दूसरे देशों के नियम स्वतः लागू नहीं होते. कई लोग नियमित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं को घर में रखते हैं और यात्रा के दौरान भी साथ ले जाते हैं. लेकिन विदेश यात्रा में दवा ले जाने से पहले गंतव्य देश के नियमों की जानकारी लेना जरूरी है. संयुक्त अरब अमीरात, जापान, सिंगापुर, सऊदी अरब, कतर और इंडोनेशिया जैसे देशों में कुछ दवाओं के संबंध में अलग और कड़े नियम हो सकते हैं. भारत में उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली कोई दवा दूसरे देश में नियंत्रित, मादक या मनोप्रभावी पदार्थ के रूप में वर्गीकृत हो सकती है.
* ये दवाएं बन सकती हैं परेशानी का कारण
ट्रामाडॉल – कई देशों में इस पर कड़े नियंत्रण लागू हैं.
कोडीनयुक्त खांसी की दवा – कुछ देशों में कोडीन को ओपिओइड पदार्थ के रूप में नियंत्रित किया जाता है.
अल्प्राजोलाम – चिंता और नींद संबंधी समस्याओं में इस्तेमाल होने वाली यह दवा कई स्थानों पर मनोप्रभावी पदार्थों से जुड़े नियमों के अधीन हो सकती है.
डायजेपाम – नींद और मांसपेशियों को शिथिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली इस दवा के लिए कुछ देशों में विशेष अनुमति की आवश्यकता हो सकती है.
जोल्पिडेम – कुछ देशों में इसके इस्तेमाल और साथ ले जाने पर कड़े प्रतिबंध हैं.
प्रेगाबालिन – तंत्रिका संबंधी दर्द के उपचार में इस्तेमाल होने वाली इस दवा पर कुछ देशों में मात्रा अथवा उपयोग से संबंधित प्रतिबंध हो सकते हैं.
एडीएचडी की कुछ दवाएं – भारत में कानूनी रूप से उपलब्ध कुछ दवाएं दूसरे देशों में प्रतिबंधित या कड़े नियंत्रण के अधीन हो सकती हैं.
यह सूची केवल उदाहरण के तौर पर है. किसी भी देश के नियमों के अनुसार दवाओं का वर्गीकरण और अनुमति अलग हो सकती है.
* डॉक्टरों की सलाह-यात्रा से पहले नियम जरूर जांचें
डॉक्टरों के अनुसार, विदेश जाने वाले कई मरीज नींद की गोलियां, दर्द निवारक दवाएं या तंत्रिका संबंधी दवाएं साथ ले जाने के लिए प्रिस्क्रिप्शन लेते हैं. लेकिन बहुत कम लोग यह जांच करते हैं कि वही दवा गंतव्य देश में कानूनी रूप से ले जाने की अनुमति है या नहीं. ऐसे में यात्रा की तैयारी के दौरान केवल पासपोर्ट, वीजा और टिकट की जांच करना पर्याप्त नहीं है. नियमित रूप से ली जाने वाली प्रत्येक दवा के संबंध में गंतव्य देश के आधिकारिक नियमों की पहले से पुष्टि करना जरूरी है.





