कोणार्क और मनपा के बीच हुआ करारनामा सार्वजनिक करें

शिवसेना नेता प्रदीप बाजड का मनपा आयुक्त को ज्ञापन

शहर की सफाई व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने की मांग
अमरावती /दि. 1- अमरावती शहर में बिगड़ती सफाई व्यवस्था पर चिंता जताते हुए शिवसेना के अमरावती जिला सहसंपर्क प्रमुख व पूर्व पार्षद प्रदीप बाजड ने अमरावती महानगरपालिका आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने महानगरपालिका और कोणार्क कंपनी के बीच हुए सफाई कार्य के करारनामे को जनता के सामने सार्वजनिक करने की मांग की है.
ज्ञापन में पूर्व पार्षद प्रदीप बाजड ने कहा है कि महानगरपालिका के प्रशासकीय कार्यकाल के पिछले चार वर्षों में शहर की सफाई व्यवस्था बेहद खराब हुई है. सफाई व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए मनपा प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को इंदौर भेजा था. इसके बाद इंदौर की तर्ज पर आधुनिक व्यवस्था के माध्यम से कचरा संकलन से लेकर उसे कंपोस्ट डिपो तक पहुंचाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी.
ज्ञापन के अनुसार, प्राप्त निविदाओं में से कोणार्क कंपनी को करीब 42 करोड़ रुपये वार्षिक खर्च पर शहर की सफाई का काम सौंपा गया. कंपनी को काम शुरू किए करीब दस महीने हो चुके हैं, लेकिन अपर्याप्त मनुष्यबल और मशीनरी के कारण शहर की सफाई व्यवस्था बार-बार प्रभावित हो रही है, ऐसा आरोप बाजड ने लगाया है.
निविदा प्रक्रिया और करारनामे को लेकर न्यायालयीन मामले तथा कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण भी सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप ज्ञापन में लगाया गया है. शहर में गंदगी को लेकर समाचार पत्रों में लगातार खबरें प्रकाशित होने और नागरिकों की शिकायतें सामने आने के बावजूद प्रशासन द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने का दावा भी बाजड ने किया है. उन्होंने मनपा और कोणार्क कंपनी के बीच हुए पूरे करारनामे, उसकी शर्तों, काम की विस्तृत व्याप्ति, निर्धारित मनुष्यबल एवं मशीनरी तथा संबंधित आर्थिक प्रावधानों को पारदर्शी तरीके से जनता के सामने सार्वजनिक करने की मांग की है.
आगामी दशहरा और दीपावली के त्योहारों को देखते हुए शहर की सफाई व्यवस्था तत्काल मजबूत करने तथा जिन प्रभागों में सफाई का काम ठप या प्रभावित है, वहां इसे तुरंत शुरू करने की मांग भी ज्ञापन में की गई है. नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने पर भी जोर दिया गया है. पूर्व पार्षद बाजड ने चेतावनी दी है कि यदि मनपा प्रशासन ने सफाई व्यवस्था को लेकर तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए तो नागरिकों के साथ मिलकर विरोध का रास्ता अपनाना पड़ेगा.

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