इस वर्ष पड़ सकती है भीषण गर्मी
सुपर अल नीनो के असर से जलसंकट गहराने की आशंका

तापमान में 3.9 डिग्री तक वृद्धि होने का पूरा अंदेशा
अमरावती जिले में वर्षा की 44 प्रतिशत कमी
रबी फसलों पर मंडरा रहा जबरदस्त खतरा
अमरावती/दि. 2 – मौसम वैज्ञानिकों द्वारा ‘अल नीनो’ के प्रभाव के और अधिक तीव्र होकर ‘सुपर अल नीनो’ में परिवर्तित होने की संभावना जताई जा रही है. इसके चलते आगामी महीनों में भीषण गर्मी और गंभीर जलसंकट की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार तापमान में 3.9 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है, जिससे वाष्पीकरण की दर बढ़ेगी और उपलब्ध जलस्रोतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा.
जानकारों का मानना है कि सुपर अल नीनो का प्रभाव अगले वर्ष जुलाई तक बना रह सकता है. ऐसे में पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर भी इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है. विशेष रूप से इस वर्ष के रबी सीजन और अगले खरीफ मौसम के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है.
* जिले में 44 प्रतिशत वर्षा की कमी
मौसम विभाग ने पहले ही अल नीनो के प्रभाव की संभावना जताई थी. इसी के चलते इस वर्ष मानसून के दौरान अमरावती जिले में सामान्य से 44 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई. वर्षा की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है. साथ ही भूजल स्तर में गिरावट और जलाशयों में अपेक्षित जलसंचय न होने से जल उपलब्धता प्रभावित हुई है.
वर्तमान में जिले के विभिन्न जलाशयों में लगभग 58 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध बताया जा रहा है. हालांकि भूजल स्तर में लगातार गिरावट और सिंचन परियोजनाओं पर बढ़ते दबाव के कारण आने वाले महीनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
* रबी सीजन पर संकट के बादल
अमरावती जिले में प्रतिवर्ष लगभग दो से ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुआई की जाती है. कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से सिंचन परियोजनाओं और अन्य उपलब्ध जलस्रोतों पर निर्भर रहता है. जलसंपदा विभाग के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा, जिसके कारण सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना कठिन हो सकता है.
जिलाधिकारी आशीष येरेकर की अध्यक्षता में 15 अक्टूबर के आसपास जलसंग्रह और वितरण को लेकर समीक्षा बैठक प्रस्तावित है. इसी बैठक के बाद सिंचाई के लिए जल आवर्तन की अंतिम योजना तय की जाएगी.
* सितंबर में ही बढ़ा तापमान
सितंबर महीने में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई. सामान्यतः 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने वाला अधिकतम तापमान इस वर्ष 36.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. इससे पहले सितंबर 2023 के अंतिम सप्ताह में तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. इस वर्ष भी मानसून की कमजोर स्थिति के कारण गर्मी का असर समय से पहले महसूस किया जा रहा है.
* गर्मी और जलसंकट दोनों बढ़ने के संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार आगामी दिनों में वर्षा की संभावना बेहद कम है. ऐसे में अगले वर्ष जुलाई तक उपलब्ध जलस्रोतों का अत्यंत सावधानी से नियोजन करना होगा. सुपर अल नीनो के प्रभाव से तापमान में संभावित वृद्धि के कारण इस वर्ष का ग्रीष्मकाल पिछले वर्षों की तुलना में अधिक गर्म रहने की आशंका है. साथ ही जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति की समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है.
मौसम विभाग ने फिलहाल व्यापक वर्षा की संभावना से इनकार करते हुए कुछ स्थानों पर तेज हवाओं और स्थानीय मौसमीय गतिविधियों के संकेत दिए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और पेयजल नियोजन पर अभी से ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले महीनों में स्थिति और कठिन हो सकती है.





