सूखे की पृष्ठभूमि में जलसंधारण और पानी की किल्लत दूर करने के काम करें
जिलाधिकारी आशिष येरेकर के निर्देश

उपाययोजनाओं पर नौ घंटे तक हुआ मंथन
अमरावती/दि.3 – इस वर्ष मानसून का दौर समाप्त हो चुका है और अब बारिश की संभावना नहीं है. ऐसे में आगामी दिनों में पानी की किल्लत की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है. इस संभावित संकट से निपटने के लिए जलसंधारण तथा पानी की कमी दूर करने वाले कार्यों पर सभी विभागों को मिलकर प्राथमिकता के साथ काम करना चाहिए, यह निर्देश जिलाधिकारी आशिष येरेकर ने दिए.
जिलाधिकारी कार्यालय में तहसीलनिहाय सूखा निवारण एवं प्रबंधन आराखड़ा तैयार करने को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई. इस दौरान दुष्काळ की स्थिति में किए जाने वाले उपायों पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ करीब नौ घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई. बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी, उपविभागीय अधिकारी सिद्धार्थ शुक्ला तथा उपवनसंरक्षक के. अर्जुना उपस्थित थे.
* तहसीलनिहाय स्थिति की समीक्षा
जिलाधिकारी येरेकर ने जिले के सभी तहसीलोें में सूखे की स्थिति की जानकारी ली. इसके साथ ही वर्तमान में उपलब्ध चारे और भविष्य में चारा उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई. उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध है. भविष्य में चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए गाळपेर जमीन अथवा सरकारी जमीन उपलब्ध कराकर वहां चारा उत्पादन करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे किसानों को राहत मिल सके.
* कम पानी वाली फसलों पर जोर
जिले में उपलब्ध जलसंग्रह का उचित नियोजन करते हुए कम पानी में रबी फसलों की खेती करना संभव है. इसलिए किसानों को गेहूं की बजाय चना, सरसों जैसी कम पानी में होने वाली फसलों की ओर रुख करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ऐसा जिलाधिकारी ने कहा.
* जलसंधारण के काम तत्काल शुरू करने के निर्देश
मानसून समाप्त होने के कारण अब जलसंधारण के कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल समय है. यदि इन कार्यों को अभी से शुरू किया जाता है तो अगले मानसून में कम बारिश होने की स्थिति में भी जल पुनर्भरण के लिए आवश्यक संरचनाएं तैयार रह सकेंगी. इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ जलसंधारण के कार्य तत्काल शुरू करें, यह निर्देश दिए गए. विशेष रूप से खेत तालाब, गादमुक्त बांध तथा अन्य जलसंधारण कार्यों को गति देने पर जोर दिया गया.
* वैश्विक संकट को अवसर में बदलने की जरूरत
जिलाधिकारी येरेकर ने कहा कि अल नीनो एक वैश्विक संकट है, लेकिन इससे निपटने के लिए सभी विभागों को इसे अवसर के रूप में देखते हुए दीर्घकालीन नियोजन करना चाहिए. किसानों को फसल पद्धति में बदलाव के साथ जैविक खेती के प्रति भी जागरूक करना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि शासन के सभी विभागों के संयुक्त प्रयासों से जलसंधारण, पानी की किल्लत, चारा प्रबंधन और कृषि क्षेत्र से जुड़े उपाय प्रभावी ढंग से लागू किए गए तो सूखे की मार को कम करने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी.





