भक्ति और विवेक का अनोखा संगम हैं गुलाबराव महाराज – प्रा. डॉ. अरविंद देशमुख

अमृत मंथन’ के ज्ञानयज्ञ का जोरदार प्रारंभ

* प्रज्ञाचक्षु गुलाबराव महाराज के विचारों से रंगा अमृत मंथन का पहला पुष्पज्ञान
अमरावती/दि.3– तुषार भारतीय मित्र परिवार की ओर से पिछले 14 सालों से लगातार आयोजित की जाने वाली ‘अमृत मंथन’ तीन दिवसीय व्याख्यानमाला का शुक्रवार को साईनगर स्थित साईरत्न लॉन्स में उत्साहपूर्ण व वैचारिक माहौल में शुभारंभ हुआ. व्याख्यानमाला के प्रथम सत्र में ‘प्रज्ञाचक्षु संतश्री गुलाबराव महाराज’ इस विषय पर प्राचार्य डॉ. अरविंद देशमुख ने अपने अभ्यासपूर्ण व प्रभावी व्याख्यान से संत गुलाबराव महाराज के जीवनकार्य और विचारविश्व पर प्रकाश डाला. सभी जानते हैं कि, डॉ. देशमुख संत श्री गुलाबराव महाराज के ग्रंथमाला में रचे-बसें हैं. आपने समस्त भारतवर्ष में प्रज्ञाचक्षु की ग्रंथ संपदा और विचारों पर आधारित कई व्याख्यान दिए हैं. उनके पौने दो घंटे के उद्बोधन के बावजूद श्रोता टस से मस न हुए. अनेक अवसरों पर जहां तालियां बजाई गई, वहीं धीर-गंभीर वक्ता के रुप में विख्यात प्राचार्य देशमुख ने उपस्थित सुधिजनों को अनेक अवसरों पर खिलखिलाने पर विवश किया. प्राचार्य देशमुख द्वारा समाज की विसंगति और दुर्विचार रखनेवाले लोगों पर किए गए व्यंग्य भी दाद बटोर ले गए.
कार्यक्रम की अध्यक्षता दीपक पिंजरकर ने की. प्रमुख अतिथि के रूप में भाजपा नेता तुषार भारतीय, मनपा नेता सदन चेतन गावंडे, भावी महापौर आशीष अतकरे तथा नगरसेविका लता देशमुख उपस्थित थीं. कार्यक्रम की प्रस्तावना आयोजक तुषार भारती ने रखी. संचालन व आभार प्रदर्शन मंदार नानोटी ने किया.
* प्रज्ञाचक्षु संत की प्रज्ञा का जागर
प्राचार्य डॉ. अरविंद देशमुख ने अपने व्याख्यान में संत श्री गुलाबराव महाराज की असामान्य ज्ञान-साधना पर प्रकाश डाला. दृष्टि न होते हुए भी प्रखर प्रज्ञा के बल पर अध्यात्म, तत्त्वज्ञान, भक्ति और साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने जो विलक्षण कार्य किया है, वह आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है, ऐसा उन्होंने कहा.
संत गुलाबराव महाराज का जीवन प्रतिकूलता पर मात करके ज्ञान के शिखर की ओर बढ़ने का उदाहरण है. उनके विचारों में ज्ञान, भक्ति, विवेक और अध्यात्म का सुंदर समन्वय दिखाई देता है. इसलिए उनके जीवनकार्य को केवल संत-चरित्र के रूप में न देखकर, भारतीय ज्ञान-परंपरा के समृद्ध वैचारिक धरोहर के रूप में देखने की जरूरत है, यह बात डॉ. देशमुख ने रेखांकित की.संत परंपरा ने महाराष्ट्र के आध्यात्मिक, सामाजिक और वैचारिक गठन में निभाई भूमिका स्पष्ट करते हुए डॉ. देशमुख ने संत गुलाबराव महाराज के विचार-विश्व के विभिन्न पहलू श्रोताओं के सामने रखे. भारतीय दर्शन का गहरा अभ्यास, भक्ति की अनुभूति और व्यापक मानवीय दृष्टिकोण के कारण गुलाबराव महाराज के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया. प्राचार्य देशमुख के धाराप्रवाह संबोधन में उपस्थित सैकडों सुधिजनों को बांधे रखा था. उसी प्रकार व्याख्यान पूर्ण होते ही अनेक क्षेत्र के मान्यवर प्राचार्य अरविंद देशमुख को बेमिसाल उद्बोधन के लिए बधाई देते देखे गए.
* महाराष्ट्र गीत से शुरुआत; पसायदान से समापन
‘अमृत मंथन’ व्याख्यानमाला के उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत महाराष्ट्र गीत से हुई. कार्यक्रम के समापन पर पसायदान प्रस्तुत किया गया. महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उपस्थित मान्यवरों की ओर से उनकी प्रतिमा को अभिवादन किया गया. 14 सालों से वैचारिक प्रबोधन की अखंड परंपरा तुषार भारतीय मित्र परिवार की ओर से पिछले 14 सालों से ‘अमृत मंथन’ व्याख्यानमाला का लगातार आयोजन किया जा रहा है. समाज में वैचारिक जागरूकता पैदा करना, भारतीय संस्कृति व ज्ञान परंपरा से नई पीढ़ी को परिचित कराना और विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों के विचारों से समाज को समृद्ध करना, इस उपक्रम का मुख्य उद्देश्य है.

* आज राहुल सोलापुरकर का व्याख्यान
राहुल सोलापुरकर आज रखेंगे ‘छत्रपति शिवराय का व्यापार और प्रबंधन शास्त्र’व्याख्यानमाला का दूसरा पुष्प गूथा जाएगा. शनिवार, 3 अक्टूबर को शाम 6.30 बजे साईरत्न लॉन्स, साईनगर में होगा. प्रसिद्ध अभिनेता व वक्ता राहुल सोलापुरकर ‘छत्रपति शिवराय का व्यापार और प्रबंधन शास्त्र’ इस विषय पर मार्गदर्शन करेंगे.

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