पीएम विश्वकर्मा से कारीगरों को रोजगार, कौशल और पूंजी की उम्मीद

पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक औजार, प्रशिक्षण और बिना गारंटी कर्ज का प्रावधान

सत्यापन और बैंकिंग प्रक्रिया में देरी से अटक रहा लाभ
अमरावती /दि.3– पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना’ लागू की जा रही है. योजना के माध्यम से पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को आधुनिक औजार, कौशल प्रशिक्षण और व्यवसाय शुरू करने के लिए कर्ज उपलब्ध कराने का प्रावधान है. हालांकि, योजना का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया में प्रशासनिक सत्यापन और बैंकिंग स्तर की औपचारिकताओं के कारण कई आवेदकों को कर्ज मिलने में देरी का सामना करना पड़ रहा है. यह योजना केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) की केंद्रीय योजना है. इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, उनके कौशल को विकसित करना और उन्हें अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है.
* प्रशिक्षण के साथ स्टाइपेंड
योजना के तहत पात्र कारीगरों को बेसिक और एडवांस कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है. बेसिक प्रशिक्षण सामान्यतः 5 से 7 दिन का तथा एडवांस प्रशिक्षण 15 दिन तक का हो सकता है. प्रशिक्षण अवधि के दौरान पात्र प्रशिक्षणार्थियों को प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड दिए जाने का प्रावधान है. इसके अलावा कारीगरों को आधुनिक औजारों के लिए टूलकिट सहायता तथा अपना व्यवसाय शुरू अथवा बढ़ाने के लिए कर्ज सुविधा उपलब्ध कराई जाती है.
* 18 पारंपरिक व्यवसायों को योजना में शामिल किया
पीएम विश्वकर्मा योजना में 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है. इनमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, नाई, मोची, राजमिस्त्री, धोबी, माली, मूर्तिकार, टोकरी एवं चटाई बुनने वाले, गुड़िया और खिलौना बनाने वाले, जाल बनाने वाले, ताला बनाने वाले तथा नाव बनाने वाले कारीगर शामिल हैं. इन पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े पात्र लोगों को योजना के तहत पहचान पत्र और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण, टूलकिट तथा कर्ज जैसी सुविधाएं देने का उद्देश्य है.
* तीन स्तर पर होता है आवेदनों का सत्यापन
योजना का लाभ सीधे सभी आवेदकों को नहीं दिया जाता. ऑनलाइन आवेदन के बाद संबंधित आवेदन की ग्राम पंचायत, स्थानीय स्तर की समिति तथा जिला स्तर की समिति के माध्यम से जांच की जाती है. आवेदक का निर्धारित 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक से जुड़ा होना और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करना आवश्यक है. आवेदन की जांच, पात्रता का निर्धारण, प्रशिक्षण पूरा करना, आवश्यक दस्तावेज जमा करना तथा बैंक द्वारा कर्ज मंजूरी की प्रक्रिया जैसे कई चरण पूरे होने के बाद लाभार्थी को आर्थिक सहायता मिलती है.
* बैंक स्तर पर भी लंबी प्रक्रिया
योजना के तहत कर्ज उपलब्ध कराने में बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण है. आवेदन सत्यापन के बाद बैंक स्तर पर दस्तावेजों की जांच और कर्ज मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जाती है. इसी वजह से आवेदन से लेकर कर्ज वितरण तक समय लग सकता है. कारीगरों के अनुसार, यदि प्रशासनिक सत्यापन और बैंकिंग प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तो योजना का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक अधिक तेजी से पहुंच सकता है.
* कम कर्ज वितरण पर उठ रहे सवाल
योजना के तहत आवेदन करने वाले कई कारीगरों को अभी भी कर्ज मिलने का इंतजार है. इसके पीछे आवेदन की जांच, पात्रता सत्यापन, प्रशिक्षण और बैंकिंग प्रक्रिया जैसे विभिन्न चरणों को प्रमुख कारण माना जा रहा है. साथ ही, पात्र पारंपरिक कारीगरों के साथ अन्य आवेदनों की संख्या बढ़ने और ग्राम पंचायत तथा स्थानीय निकाय स्तर पर सत्यापन में लगने वाला समय भी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में योजना का मूल उद्देश्य पूरा करने के लिए प्रशासन और बैंकों के स्तर पर आवेदन निपटाने की प्रक्रिया को तेज करना जरूरी माना जा रहा है.
* आधुनिक तकनीक से पारंपरिक व्यवसाय को बढ़ावा
पीएम विश्वकर्मा योजना का मूल उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को उनकी मौजूदा कुशलता के साथ आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों से जोड़ना है. प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट के माध्यम से उनके काम की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने तथा कर्ज के माध्यम से व्यवसाय का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है. यदि पात्र कारीगरों के सत्यापन, प्रशिक्षण और कर्ज वितरण की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को अपने काम को आधुनिक स्वरूप देने और स्वरोजगार को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है.

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