मेलघाट टाइगर रिजर्व के दिहाड़ी मजदूर भूख हड़ताल पर

चार महीने से वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट गहराया

जून से बकाया मजदूरी तत्काल देने की मांग
परतवाडा/दि.5 – मेलघाट टाइगर रिजर्व के वन्यजीव विभाग में कार्यरत सैकड़ों दिहाड़ी मजदूरों को पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. जून से मजदूरी का भुगतान नहीं होने से नाराज कर्मचारियों ने अब बकाया वेतन की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है. कर्मचारियों ने प्रशासन से जून से सितंबर तक का बकाया वेतन तत्काल जारी करने की मांग की है.
मेलघाट टाइगर रिजर्व के चार वन्यजीव विभागों-गुगामल, सिपना, मेलघाट और अकोट-में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गुगामल डिवीजन में करीब 200, सिपना में 140, अकोट में 60 तथा मेलघाट वन्यजीव विभाग में लगभग 40 दिहाड़ी मजदूर कार्यरत हैं.

* जंगल की सुरक्षा में निभाते हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
ये दिहाड़ी मजदूर जंगल में गश्त, वन्यजीव एवं वन क्षेत्र की सुरक्षा, वनरक्षक और वन कर्मचारियों के साथ कैंप में ड्यूटी, वाहनों पर हेल्पर का काम, चेकपोस्ट की निगरानी, वायरलेस संचालन तथा विभिन्न मशीनरी के रखरखाव जैसे कार्य करते हैं. जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमपूर्ण कार्यों में इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. इसके बावजूद कई महीनों से वेतन नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

* चार महीने की मजदूरी बकाया
दिहाड़ी मजदूरों को पहले करीब 14,812 रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाता था. जुलाई से यह राशि बढ़कर 15,300 रुपये से अधिक हो गई है. हालांकि, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर-इन चार महीनों का वेतन अभी तक नहीं मिलने की बात कर्मचारियों ने कही है. इसके अलावा गुगामल डिवीजन में स्थायी आदेश वाले कर्मचारियों को भी पिछले छह महीनों से वेतन नहीं मिलने की जानकारी सामने आई है. कर्मचारियों के अनुसार, संबंधित कार्यालय को अब तक आवश्यक निधि या अनुदान प्राप्त नहीं होने के कारण भुगतान अटका हुआ है.

* किराना दुकानदारों ने भी उधार देना किया बंद
लगातार चार महीने से मजदूरी नहीं मिलने के कारण दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. कर्मचारियों का कहना है कि पहले किराना दुकानों से उधार लेकर घर का खर्च चलाया जा रहा था, लेकिन अब दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है. बच्चों की पढ़ाई, परिवार के सदस्यों की बीमारी और इलाज के खर्च के लिए भी पैसे उपलब्ध नहीं हैं. इससे मजदूरों के परिवारों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है. कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिहाड़ी मजदूरों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए जून से बकाया पूरा वेतन तत्काल जारी किया जाए. भुगतान में और देरी होने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी भी कर्मचारियों की ओर से दी गई है.

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