दुर्गादेवी के मूर्तियों की कीमत में वृध्दि
रंगरोगन और सजावट अंतिम को अंतिम रूप दे रहे है

अमरावती/दि.8 – नवरात्रि महोत्सव को केवल तीन दिन शेष रहने के चलते शहर के मूर्तिकार अष्टभूजा आदिशक्ति दुर्गा, महाकाली देवी की सुंदर मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे है. देवी की मूर्तियों की कीमत में इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत की वृध्दि हुई है. क्योंकि सभी साहित्य यातायात खर्च भी बढ गया है.
मंडलों की मांग के अनुसार 5 से 15 फीट तक की विविध रूपों की मूर्तियों को फिलहाल साज चढाकर सुंदर रूप दिया जा रहा है. फिलहाल मूर्तिकार रंगकाम ओर अंतिम सजावट का काम विशेष कलाकार कर रहे हैं. ये कलाकार देवी को साडी परिधान करके देने सहित मूर्ति सजावट का काम करते है 4 से 5 फीट की मूर्ति 20 हजार 6 फीट की मूर्ति की कीमत 55 हजार तथा 15 फिट तक विविध मुद्राओं वाली मूर्तियों की कीमत आकार और सजावट के अनुसार डेढ लाख रूपयों तक है. देवी के नौ रूपों में से सिहासन पर विराजमान देवी और सिंह पर सवार हुई आदिशक्ति को मंडलों की ओर से विशेष रूप से पसंद किया जाता है. मंडलों की मांग, उंचाई, सजावट, मुद्रा निश्चित करके मूर्ति तैयार की जा रही है. मूर्ति तैयार करने का काम नवरात्रि उत्सव के 7 से 8 माह पहले से ही शुरू हो चुका है. कुछ मूर्तिकारों के पास वर्षभर निर्मिति का कार्य शुरू रहता है. उत्सव पास आते ही लिए गये ऑर्डर पूर्ण करने में मूर्तिकार व्यस्त है.
उत्सव में ‘9’ अंक को विशेष महत्व
नवरात्रोत्सव में 9 के अंक को धार्मिक, आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व है. नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा होती है. जिसमें प्रथम शैलपुत्री, द्बितीय ब्रम्हचारिणी, तृतीय चंद्रघंटा, चतुर्थ कुष्मांडा, पंचम स्कंदमाता, षष्टम कात्यायनी, सप्तम कालरात्रि, अष्टम महागौरी तथा नवम सिद्बिदात्री इन नौ रूपों का समावेश है. अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक देवी के नौ रूपों का समावेश है. अश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक देवी के नौ रूपों की भक्तिभाव से आराधना की जाती है.
मूर्ति के सजावट साहित्यों पर निर्धारित होती है कीमत
दुर्गादेवी की मूर्ति की कीमत उसके आकार पर से निश्चित नहीं होती. बल्कि मूर्ति की सजावट के उपयोग में लाए गए साहित्यों जैसे साज, मखमली कपडे से निर्मित साडियां, चुनसे, कृत्रिम आभूषण, खडे, मोती, सिंहासन, रंगकाम और अन्य कलाकारी के अनुसार मूर्ति की अंतिम कीमत निर्धारित की जाती है. मंडलों की ओर से उनकी संकल्पना के अनुसार सजावट की मांग की जाती है. पहली बार मां दुर्गोत्सव की मूर्तियों पर बढे दामों को लेकर सार्वजनिक नवदुर्गोत्सव मंडल के पदाधिकारी भी चिंता में दिखाई दे रही है.
* इस वर्ष बडी मूर्तियों की सर्वाधिक मांग
इस वर्ष दुर्गादेवी की बडी मूर्तियों की मांग अधिक है. मंडलों की मांग के अनुसार 6 इंच से 15 फीट तक की मूर्तियां तैयार की गई है. सिंहासन, शेरावाली रूपों की मांग अधिक है. इस वर्ष 56 से 70 मुर्तियां तैयार की गई है तथा उनमें 20 लडके, 12 कामगार सहभागी है. तेलंगाना, हैदराबाद, भोपाल, उज्जैन से मूर्तियों के ऑर्डर आते हैं.
– गजानन गुजरे, मुर्तिकार
श्री गणेश मूर्तिकार फाउंडेशन





