कुंदन मिश्रा की मधुरवाणी में ‘नानी बाईरो मायरो’
महाराजा अग्रसेन जयंति महोत्सव पर आयोजन

अमरावती/ दि. 8- भगवान विविध रूप में आकार अपने भक्तों की हमेशा ही परीक्षा लेते है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि,वे के उनसे प्रेम नहीं करते. वे अपने भक्तों से अत्याधिक प्रेम करते है.आपदा की घडी में भगवान हमेशा ही अपने भक्तों की सहायता के लिए दौंडे चले आते है. यही ‘नानी बाईरो मायरो’ की कथा कहलाती है.इसे भजन एवं सजीव झाकियों के माध्यम से प्रस्तुत कर मुंबई निवासी कुंदन मिश्रा ने अंबा नगरी के इतिहास में पहला ऐसा भक्ति का कार्यक्रम प्रस्तुत किया.जिसे सुनकर सभी एक ही बात दोहराते नजर आए कि, करके इशारे बुलाई गयो रे, बरसाने की छोरी, राधा गोरी-गोरी…
स्थानीय इर्विन चौक स्थित धर्मदाय कॉटन फंड में बुधवार 7 अक्तूबर से अग्रवाल समाज के आराध्य दैवत महाराजा अग्रसेनजी जयंति महोत्सव का शुभारंभ हुआ. महोत्सव के पहले ही दिन दोपहर में ‘नानी बाईरो मायरो’ का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य यजमान नागपुर निवासी संजय मेहाडीया व कविता मेहाडीया थे.प्रकल्प प्रमुख सुभाष अग्रवाल में कार्यक्रम में विशेष भूमिका निभाई. मुंबई के कुंदन मिश्रा ने अपने ‘नानी बाईरो मायरो’ की शुरूआत विविध भजनों से की. ‘नानी बाईरो मायरो’ महान संत नरसी मेहता और उनकी पुत्री नानीबाई की अटूट भक्ति पर आधारित एक प्रसिध्द कथा है.
भक्त नरसी मेहता भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे. वे अपनी धून में मग्न रहते है. और मोह-माया से दूर जीवन बिताते थे. नरसी मेहता की पुत्री नानीबाई का विवाह गुजरात के जुनागढ से बाहर एक अच्छे घराने में हुआ था. विवाह के बाद मायरे (भात) भरने का समय आया जिसमें मायके पक्ष की तरफ से बेटी और उसके ससुरालवालों को उपहार व वस्त्र तथा धन देना होता है. नरसी मेहता अत्याधिक सरल और संत स्वभाव के थे. तथा सब कुछ भगवान को समर्पित कर चुके थे. उनके पास मायरा भरने के लिए धन नहीं था.
नानीबाई के ससुरालवाले और आस पडोस के लोग ताना मारने लगे की एक संत पिता अपनी बेटी का मायरा कैसे भरेंगे. अपनी बेटी के मान-सम्मान और संकट को देख नरसी मेहता ने पूर्ण श्रध्दा के साथ भगवान श्रीकृष्ण का आवाहन किया.भक्त की पूकार सुनकर भगवान स्वयं एक सेठ का रूप धारण कर कुबेर का खजाना लेकर पहुंचे. और नानीबाई का मायरा भरा. इस चमत्कार के बाद सब लोग नरसी के भगवान को सावरियां सेठ कहने लगे. यह कथा भगवान की अपने भक्तों के प्रति अटूट आस्था और समर्पण की शक्ती को दर्शाती है. यह कहते हुए कुंदन मिश्रा ने विविध प्रसंगों के अनुरूप भजन प्रस्तुत कर उपस्थितों को थिरकने पर मजबुर कर दिया.
मेरा भोला है भंडारी…अधर में मुरली, हदय में राधे,बट गए दोनों आधे-आधे, हे नाथ नारायण,वासुदेव श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी…रास रचों है अमरावती में आज रास रचो है, यमुना के तट पर महारास रचो है… राधा नाचे, श्याम नाचे… मुझे लादो भजन वाली वही माला… म्हारे अंगना पधारा जो म्हारी बाईसा ने खम्मा खणी… वरमाला तैयार है…नानीबाई तैयार है… जैसे एक से बढकर एक भजन प्रस्तुत कर धर्मदाय कॉटन फंड का परिसर धर्ममय बना दिया.
इस अवसर पर उपस्थित कोलकत्ता के कलाकारों ने ‘नानी बाईरो मायरो’ में आए प्रसंगों को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि, उन्हें देख उपस्थित भक्त भी खुद को रोक नहीं पाए.राधा-कृष्ण, भगवान शिव के साथ नानीबाई का इस प्रकार स्वागत किया जो सभी के लिए इस कार्यक्रम की भव्य-भव्यता को दर्शाता नजर आया. कभी पुष्प वर्षा तो कभी आतिशबाजी के साथ उन कलाकारों का स्वागत होता रहा. कार्यक्रम दिपक चौधरी व उनकी टीम द्बारा संगीत में सहयोग दिया गया.इस धार्मिक अनुष्ठान में विजय अग्रवाल, संजय झुनझुनवाला,पंकज चौधरी ने ‘नानी बाईरो मायरो’ की सजावट के साथ झांकी निर्माण में विशेष सहयोग दिया.
* इन्हे मिला मायरा भरने का सौभाग्य
महाराजा अग्रसेनजी जयंति महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित ‘नानी बाईरो मायरो’ कार्यक्रम में अग्र्रवाल समाज के अध्यक्ष विजय केडीया,सचिव अजय चौधरी, विजय अग्रवाल, अनिल मित्तल, सुरेश गाडोदिया, प्रदीप पुरूषोत्तम अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल (बिछायतवाले), कमलेश खेतान, राजेश मित्तल व सुरेंद्र कसंल को मायरा भरने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. इस अवसर पर अग्रवाल समाज के अग्र बंधुओं के साथ बडी संख्या में भक्त उपस्थित थे.





