दिन में तीन बार रूप बदलती हैं पिंगलादेवी
कल नवरात्र के पहले दिन उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर में दस दिवसीय पूजा की तैयारियां पूरी
अमरावती/दि 10 –मोर्शी मार्ग पर गोराला बस स्थानक से पूर्व दिशा में करीब एक किलोमीटर दूर प्राकृतिक वातावरण से घिरी पहाड़ी पर स्थित पिंगलादेवी का ऐतिहासिक मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि देवी दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं. सुबह उनका बालरूप, दोपहर में युवती का और शाम को वृद्ध माता का स्वरूप दिखाई देता है.
पूर्वाभिमुखी देवी की मनमोहक प्रतिमा, तेजस्वी नेत्र, ऊंचा ललाट और मस्तक पर चंद्रकोर व कुमकुम श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं. मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि देवी का सिर जमीन के ऊपर दिखाई देता है, जबकि प्रतिमा का धड़ जमीन के भीतर होने की मान्यता है. मंदिर का गर्भगृह हेमाडपंथी शैली में निर्मित है. मंदिर के सामने दीपस्तंभ भी है.
* अर्धशक्तिपीठ में दस दिवसीय पूजा
पिंगलागढ़ स्थित इस मंदिर को साढ़े तीन शक्तिपीठों में अर्धशक्तिपीठ माना जाता है. शारदीय नवरात्र के अवसर पर रविवार से मंदिर में दस दिवसीय पूजा-अर्चना शुरू होगी. नवरात्र के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. इसे देखते हुए मंदिर परिसर में तैयारियां की गई हैं.
* पुलिस का चाक-चौबंद बंदोबस्त
नवरात्र उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बंदोबस्त लगाया गया है. मोर्शी उपविभागीय पुलिस अधिकारी उमेश पाटिल, शिरखेड़ के थानेदार ईश्वर वर्गे और विश्वस्त मंडल ने व्यवस्था की तैयारी की है. विश्वस्त मंडल के अध्यक्ष विनीत पाखोडे ने श्रद्धालुओं से देवी के दर्शन का लाभ लेने की अपील की है.
* कौंडण्यपुर में प्रज्वलित होगी अखंड दीपज्योति
– 11 से 20 अक्तू. तक अंबिकादेवी मंदिर में धार्मिक महोत्सव
– दुर्गासप्तशती पाठ, नवचंडी हवन और भजन-कीर्तन होंगे
कौंडण्यपुर स्थित ऐतिहासिक श्री रुक्मिणी हरण मंदिर परिसर स्थित श्री अंबिकादेवी देवस्थान में शारदीय नवरात्र महोत्सव का आयोजन किया गया है. 11 से 20 अक्तूबर तक चलने वाले इस महोत्सव में मनोकामना सिद्धि के लिए अखंड दीपज्योति, दुर्गासप्तशती पाठ, देवी की महापूजा, नवचंडी हवन, भजन-कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे.
महोत्सव का शुभारंभ 11 अक्तूबर को सुबह 8 से 9 बजे तक पूजा-अभिषेक के साथ होगा. इस पूजा में विश्वस्त मंडल के सदस्य तथा आर्वी के गिरधर अग्रवाल सपत्नीक सहभागी होंगे. सुबह 9.30 से 10 बजे तक विश्वस्त मंडल के हाथों घटस्थापना की जाएगी. इसके बाद सुबह 10.30 बजे अखंड दीपज्योति प्रज्वलित की जाएगी. यह अखंड ज्योति 20 अक्तूबर को सुबह 11 बजे विसर्जित की जाएगी. महोत्सव के दौरान मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे.





