अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में महायुति की बगावत बरकरार

शिंदे सेना के किरण सरनाईक के सामने प्रा. श्रीकांत देशपांडे की चुनौती

* भाजपा के शेखर भोयर, संगीता शिंदे और सुमित पवार भी मैदान में
* कांग्रेस की अदिती पोहरे व उबाठा के दत्तात्रय लहाने भी आमने-सामने
* नाम वापसी के अंतिम दिन 30 में से चार उम्मीदवारों ने खींचे कदम
* नामांकन वापसी पश्चात अब मैदान में बचे 26 प्रत्याशियों के बीच होगा मुकाबला
* संभाग के पांचों जिलों में प्रचार अभियान पकड़ेगा रफ्तार, शिक्षक मतदाता के घर पहुंच रहे प्रत्याशी
अमरावती/दि.9 – विधान परिषद के अमरावती विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में महायुति के भीतर उभरी बगावत बरकरार है. नामांकन वापसी के अंतिम दिन भी प्रमुख बागी उम्मीदवारों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे. शिवसेना के अधिकृत प्रत्याशी किरणराव रामराव सरनाईक के सामने प्रा. श्रीकांत देशपांडे की दावेदारी कायम है. वहीं, भाजपा से जुड़े शेखर भोयर, डॉ. संगीता शिंदे-बोंडे और सुमित पवार भी चुनावी मैदान में डटे हुए हैं. दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रत्याशी प्रा. दत्तात्रय लहाने के सामने कांग्रेस की प्रा. अदिति पोहरे द्वारा पेश की गई चुनौती भी अपनी जगह पर कायम है. आज शुक्रवार 9 अक्तूबर को नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद अब चुनावी मैदान में 26 उम्मीदवार शेष हैं. इसके साथ ही अमरावती संभाग के पांचों जिलों में चुनाव प्रचार और तेज होने के आसार हैं.
बता दे कि, अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए कुल 31 इच्छुक उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे. बुधवार, 7 अक्तूबर को हुई छंटनी में 30 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए, जबकि वंचित बहुजन आघाड़ी के गाजी मोहम्मद जाहेरोश का नामांकन अवैध घोषित किया गया था. इसके बाद नाम वापसी के अंतिम दिन चार उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए. इस तरह अब 26 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा.
* महायुति के सामने अपनों की चुनौती
इस बार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में सबसे अधिक चर्चा महायुति के भीतर कायम बगावत की हो रही है. शिवसेना के अधिकृत प्रत्याशी किरण सरनाईक के सामने प्रा. श्रीकांत देशपांडे की दावेदारी बरकरार है. इसके अलावा शेखर भोयर, डॉ. संगीता शिंदे-बोंडे और सुमित पवार भी मैदान में डटे हुए हैं. इन दावेदारों की मौजूदगी से गठबंधन के अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनौती बढ़ गई है. अब महायुति के लिए अपने घटक दलों से जुड़े दावेदारों के बीच शिक्षक मतदाताओं का समर्थन एकजुट रखना आसान नहीं होगा. नाम वापसी के अंतिम दिन तक इन प्रमुख दावेदारों ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया. ऐसे में गठबंधन के भीतर की खींचतान चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है. अधिकृत प्रत्याशी के साथ अन्य दावेदार भी शिक्षक मतदाताओं से संपर्क साधकर अपना समर्थन मजबूत करने में जुटे हैं.
* महाविकास आघाड़ी में भी सीधी चुनौती
उधर दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में भी चुनावी तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रत्याशी प्रा. दत्तात्रय लहाने के सामने कांग्रेस की प्रा. अदिति पोहरे की चुनौती कायम है. दोनों उम्मीदवारों के मैदान में बने रहने से विपक्षी मतों के संभावित बंटवारे का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो सकता है. इस तरह चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों के साथ-साथ उम्मीदवारों का व्यक्तिगत प्रभाव और शिक्षक संगठनों का समर्थन भी अहम भूमिका निभा सकता है.
* नाम वापसी के बाद चार उम्मीदवार बाहर
नाम वापसी के अंतिम दिन राष्ट्रीय युवा स्वाभिमान पार्टी की प्रीति हर्षल रेवणे, प्रहार जनशक्ति पार्टी के नितीन आगे, पोहरा बंदी के महंत सुनील महाराज और साजिद खान खलिद खान ने अपने नामांकन वापस ले लिए. इन चार उम्मीदवारों के हटने के बाद चुनावी मैदान में 26 प्रत्याशी रह गए हैं.
* ये उम्मीदवार है चुनावी मैदान में
नामांकन वापसी के बाद चुनावी मैदान में शामिल उम्मीदवारों में शिवसेना के किरणराव रामराव सरनाईक, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के दत्तात्रय श्रीराम लहाने, कांग्रेस की अदिति ऋषिकेश पोहरे, बलिराजा पार्टी के प्रा. अनिल मधुकरराव काले, भारतीय जनसम्राट पार्टी के गजानन गोविंदराव ढोके और समाजवादी गणराज्य पार्टी के सुरेश बाबूराव देवकर शामिल हैं. इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों में अविनाश मधुकर बोर्डे, अशोक वामन हिवाले, आशीष मनोहर अंबुलकर, उपेंद्र बाबाराव पाटील, किरण अर्जुन चौधरी, किरण अर्जुन पवार, गजानन रामचंद्र उल्हे, दिलीप भीमराव कडू, डॉ. प्रशांत विश्वेश्वर विघे, चंद्रशेखर उर्फ शेखर मनोहरराव भोयर, मिलिंद तुकाराम ब्राह्मणे, राजेशकुमार शालिग्राम कड, रामदास संपतराव कटक, विनोद प्रल्हाद कडू, प्रा. डॉ. श्रीकांत गोविंद देशपांडे, श्रीकृष्ण सूर्यभान पहुरकर, सुनील दुर्गादास राठोड, डॉ. संगीता सचिंद्र शिंदे-बोंडे, सुमित सुरेशराव पवार, प्रा. डॉ. संतोष श्रीकृष्ण हुशे और हेमलता दिलीपसिंग मुणोत के नाम शामिल हैं.
* अब पांचों जिलों में प्रचार अभियान हुआ तेज
नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव प्रचार निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है. अमरावती संभाग के पांचों जिलों में प्रमुख प्रत्याशी शिक्षक मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं. व्यक्तिगत मुलाकातों, शिक्षक संगठनों के माध्यम से संवाद और अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने पर उम्मीदवारों का जोर रहेगा. शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वेतन, पुरानी पेंशन योजना, नई पेंशन व्यवस्था, अनुदानित विद्यालयों के शिक्षकों की समस्याएं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य मुद्दे प्रचार अभियान में प्रमुखता से उठ सकते हैं. प्रत्याशियों के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक समर्थन जुटाने के साथ शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी विश्वसनीयता स्थापित करने की चुनौती भी है. महायुति में बगावत और विपक्षी खेमे में अलग-अलग प्रत्याशियों की दावेदारी के बीच चुनावी मुकाबला रोचक होने के आसार हैं. अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि शिक्षक मतदाता राजनीतिक दलों के समीकरणों, संगठनात्मक समर्थन और उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव में से किसे अधिक महत्व देते हैं.

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