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कोणार्क कंपनी के कामकाज और मनपा के भुगतान पर विधायक खोडके दम्पति की दोटूक

* सफाई में लापरवाही, कर्मियों के ईपीएस-ईएसआईसी लाभ और सुप्रीम कोर्ट में पैरवी को लेकर आयुक्त से मांगा जवाब
अमरावती /दि.9- शहर में जगह-जगह जमा कचरे और गंदगी की समस्या तथा सफाई ठेकेदार कोणार्क कंपनी के कथित लचर कामकाज को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य संजय खोडके तथा अमरावती निर्वाचन क्षेत्र की विधायक सुलभा खोडके ने मनपा प्रशासन को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी. उन्होंने मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले से मुलाकात कर सफाई व्यवस्था की समीक्षा की और स्पष्ट कहा कि शहर में सफाई का काम नियमों के अनुसार और जिम्मेदारी से होना चाहिए. किसी भी दबाव में आए बिना जनहित में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने चेताया कि यदि कामकाज में गड़बड़ी होगी, तो उसे दुरुस्त करना भी उन्हें आता है.
बता दे कि, कोणार्क कंपनी को शहर की सफाई का ठेका दिए जाने के बाद से ही उसके कामकाज और ठेका प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं. मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां ठेके से संबंधित निर्णय के बाद नई निविदा प्रक्रिया का मुद्दा सामने आया. इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इस कानूनी विवाद के बीच मनपा की ओर से कंपनी के बिलों का भुगतान किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में खोडके दंपती के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से पूरे मामले की नियमों के अनुरूप समीक्षा करने की मांग की.
* छह महीने में ही उठने लगे सवाल
इस मुलाकात के दौरान विधायक संजय खोडके ने कहा कि शहर की साफ-सफाई का ठेका दिए जाने के महज छह महीने के भीतर ही व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. कोणार्क कंपनी के कामकाज को लेकर शिकायतें और विवाद सामने आ रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब शुरुआती अवधि में ही इतनी समस्याएं पैदा हो रही हैं, तो सात वर्ष के लंबे ठेके के दौरान जनप्रतिनिधियों को कितनी माथापच्ची और भागदौड़ करनी पड़ेगी. उन्होंने मनपा प्रशासन से सफाई कार्यों की नियमित समीक्षा करने और ठेकेदार एजेंसी से निर्धारित शर्तों के अनुसार काम कराने की अपेक्षा जताई. उनका कहना था कि शहरवासियों को स्वच्छता के लिए परेशान होना पड़े और जनप्रतिनिधियों को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़े, यह स्थिति उचित नहीं है.
* 50 प्रतिशत भुगतान रोकने की जानकारी पर उठाया सवाल
बैठक के दौरान सफाई कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआईसी से जुड़े लाभों का मुद्दा भी उठा. विधायक खोडके दम्पति ने सवाल किया कि यदि कंपनी निर्धारित नियमों और ठेके की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही है, तो उसके बिलों का भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है. मनपा प्रशासन की ओर से बताया गया कि कोणार्क कंपनी के देयकों में से 50 प्रतिशत राशि रोककर रखी गई है. इस पर विधायक संजय खोडके ने सवाल किया कि यदि कचरा संकलन करने वाले वाहन के साथ दुर्घटना होती है और उसमें किसी सफाई कर्मचारी के साथ अनहोनी हो जाती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके वैधानिक लाभों के भुगतान को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई. वहीं, विधायक सुलभा खोडके ने मांग की कि कंपनी के बिलों का भुगतान करने से पहले सभी कानूनी पहलुओं की गहन जांच की जाए. महानगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों, विधि अधिकारी अथवा विधि सलाहकार समिति की राय और श्रम कानूनों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जाए.
* सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले आमसभा की अनुमति का मुद्दा
सफाई ठेके से संबंधित न्यायालयीन प्रक्रिया पर भी बैठक में सवाल उठाए गए. विधायक संजय खोडके ने पूछा कि कोणार्क कंपनी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मनपा की ओर से पक्ष रखने से पहले आमसभा की अनुमति ली गई थी या नहीं. उन्होंने कहा कि ठेका जारी किए जाने के समय तत्कालीन आयुक्त प्रशासक के रूप में कार्यरत थे और उनके पास आमसभा के अधिकार भी थे. अब निर्वाचित आमसभा अस्तित्व में है, इसलिए उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में जाने से जुड़े विषय पर आमसभा में चर्चा और अनुमति की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए थी.
मनपा प्रशासन ने इस पर बताया कि नागपुर स्थित उच्च न्यायालय के फैसले को कोणार्क कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. कंपनी की विशेष अनुमति याचिका पर मनपा ने अपना पक्ष रखते हुए स्थिति स्पष्ट की है. प्रशासन के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के कारण लागू आदर्श आचार संहिता के चलते आमसभा बुलाकर इस विषय पर चर्चा और अनुमति प्राप्त करना संभव नहीं था.
* ईपीएफ-ईएसआईसी चालान और वार्डों की सफाई रिपोर्ट की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि कोणार्क कंपनी द्वारा प्रस्तुत बिलों के साथ ईपीएफ और ईएसआईसी से संबंधित चालानों की भी पुष्टि की जाए. कर्मचारियों के लिए निर्धारित वैधानिक अंशदान और अन्य दायित्वों के पालन की जांच के बाद ही भुगतान किया जाना चाहिए. इसके अलावा शहर के विभिन्न वार्डों में सफाई कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सफाई निरीक्षकों से वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी रिपोर्ट मंगाने की मांग की गई. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कचरा संकलन, सफाई और अन्य निर्धारित कार्यों का ठेके की शर्तों के अनुसार होना सुनिश्चित किया जाए. यदि कोणार्क कंपनी के साथ किए गए करार और मूल निविदा की शर्तों में कोई विसंगति पाई जाती है, तो मनपा प्रशासन आवश्यक कानूनी कदम उठाए. जरूरत पड़ने पर न्यायालय में शपथपत्र प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक सुधारों के लिए पहल करने की मांग भी की गई. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी; कंपनी की जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे.
* बैठक में मनपा के वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित
बैठक में मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले, अतिरिक्त आयुक्त महेश देशमुख और शिल्पा नाईक, उपायुक्त नरेंद्र वानखड़े, योगेश पीठे और भाग्यश्री बोरेकर, विधि अधिकारी विशाल चव्हाण, लेखाधिकारी, सहायक आयुक्त तथा विभिन्न विभागों के प्रमुख उपस्थित थे. जनप्रतिनिधियों में मनपा स्थायी समिति के सभापति अविनाश मार्डीकर, भोजराज काले, नगरसेवक प्रशांत उर्फ गुड्डू धर्माले, चंदू खेडकर, मंगेश मनोहरे, रतन डेंडूले, मनीष बजाज, प्रमोद महल्ले, मीनल योगेश सवाई, अर्चना मनीष पाटील, पूर्व नगरसेवक प्रशांत डवरे, कर्नलसिंह राहल और ऋतुराज राऊत सहित अन्य शामिल हुए.
बैठक में उठाए गए मुद्दों के केंद्र में शहर की सफाई व्यवस्था, ठेकेदार कंपनी की जवाबदेही, कर्मचारियों के वैधानिक लाभ और न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़े सवाल रहे. अब मनपा प्रशासन इन मांगों पर क्या कार्रवाई करता है और सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए कौन-से ठोस कदम उठाता है, इस पर शहरवासियों की नजर रहेगी.
* दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने ही प्रमुखता से उठाया था मुद्दा
बता दे कि, अमरावती मनपा द्वारा कल 8 सितंबर को सुबह से लेकर दोपहर तक महज कुछ घंटों के भीतर कोणार्क कंपनी के करीब 4 करोड रूपयों के भुगतान को मंजुरी देने की प्रक्रिया पूरी की थी और फिर उतनी ही तत्परता के साथ 4 करोड रूपयों में से 2 करोड रूपयों के भुगतान का चेक भी जारी कर दिया था. जिससे संबंधित खबर गतरोज ही दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने पूरी प्रमुखता के साथ उठाते हुए मनपा के इस तत्परता को सवालों के घेरे में खडा किया था. साथ ही साफसफाई को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा रहने के बावजूद कोणार्क कंपनी को 4 करोड रूपयों का भुगतान दिए जाने को मंजूरी देने एवं 2 करोड रूपयों का भुगतान अदा कर दिए जाने पर सवालिया निशान भी उठाए थे. जिसके चलते अमरावती मनपा की सत्ता के गलियारों व स्थानीय राजनीति में अच्छा-खासा हडकंप मचा था. जिसके बाद विधायक खोडके दम्पति आज आनन-फानन में अमरावती मनपा के मुख्यालय पहुंचे तथा उन्होंने आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले से इस बारे में मुलाकात करते हुए चर्चा की.

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