रोहित पवार का आंदोलन विद्यार्थियों के भविष्य हेतु
विधायक बच्चू कडू का प्रतिपादन

* एमपीएससी अभ्यर्थियों के मुद्दों पर सरकार से तत्काल समाधान निकालने की अपील
* 1,200 एकड़ सरकारी जमीन कंपनियों को देने पर भी उठाए सवाल
चंद्रपुर / दि. 9- शिवसेना विधायक बच्चू कडू ने पुणे में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए विधायक रोहित पवार द्वारा किए जा रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से बिना अड़ियल रुख अपनाए तत्काल समाधान निकालने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन विद्यार्थियों के भविष्य और करियर से जुड़ा है तथा सरकार को उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए.
चंद्रपुर दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कडू ने विदर्भ में किसानों की आत्महत्या, कृषि नीतियों और अहिल्यानगर में 1,200 एकड़ सरकारी जमीन कंपनी को पट्टे पर दिए जाने के विवाद पर भी सवाल उठाए. इस समय पुणे में चल रहे एमपीएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन पर विधायक बच्च्ाू कडू ने कहा कि रोहित पवार ने विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवाज उठाई है और उनका उद्देश्य अच्छा है. उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकार और प्रशासन का विरोध सामने आ सकता है, लेकिन सरकार को इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बजाय विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए.
विदर्भ में किसानों की आत्महत्याओं पर चिंता जताते हुए कडू ने कहा कि इसके लिए केवल मौजूदा वर्ष के सूखे या बारिश में खंड को जिम्मेदार मानना उचित नहीं है. उनके अनुसार, पिछले कई दशकों से विभिन्न दलों की सरकारों की कृषि नीतियों और किसानों की आर्थिक स्थिति की अनदेखी के कारण संकट गहराया है. उन्होंने सरकार से किसानों को टुकड़ों में राहत देने के बजाय कृषि उपज का उचित और सुनिश्चित मूल्य दिलाने तथा उन्हें कर्ज के दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए दीर्घकालीन कार्यक्रम लागू करने की मांग की.
अहिल्यानगर में कृषि महामंडल की 1,200 एकड़ जमीन सुप्रिया सुले के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनी को पट्टे पर दिए जाने के मामले पर विधायक कडू ने जमीन की सीमा तय करने वाले कानून के समान अनुपालन पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि जब किसानों की जमीन पर सीमा लागू होती है, तो बड़े नेताओं और उद्योगपतियों से जुड़ी कंपनियों को इतनी बड़ी जमीन कैसे दी जाती है. विधायक कडू ने सवाल किया कि क्या जमीन की सीमा संबंधी कानून केवल छोटे और गरीब किसानों के लिए है. उन्होंने इस मामले को भूमि आवंटन में समानता और पारदर्शिता से जोड़ते हुए सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की.





