कामापुर-आड नदी पंप स्टोरेज परियोजना से बनेगी 1500 मेगावाट बिजली

आठ महीने से चल रहा मिट्टी परीक्षण, योजना से हजारों रोजगार सृजित होने का दावा

* सर्वेक्षण में कठोर चट्टानें मिलने से परियोजना की सफलता की उम्मीद बढ़ी
चिखलदरा/दि.9 – मेलघाट के आदिवासी क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से प्रस्तावित कामापुर-आड नदी पंप स्टोरेज परियोजना की तैयारियां जारी हैं. परियोजना के लिए पिछले आठ महीनों से मिट्टी परीक्षण का काम किया जा रहा है. परीक्षण के दौरान आवश्यक कठोर चट्टानें मिलने से परियोजना की सफलता की संभावना बढ़ने का दावा किया जा रहा है. प्रस्तावित परियोजना की क्षमता 1500 मेगावाट बताई गई है, जबकि इसकी अनुमानित लागत करीब 8,500 करोड़ रुपये है. इसका निर्माण अदाणी समूह की ओर से प्रस्तावित है.
* दो जलाशयों के बीच पानी का होगा पुनर्चक्रण
परियोजना की प्रस्तावित तकनीक के अनुसार, कामापुर में एक बांध या जलाशय बनाया जाएगा. वहां से पानी ऊंचाई पर स्थित आड नदी क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा. पानी को टरबाइन से प्रवाहित कर बिजली का उत्पादन किया जाएगा. इसके बाद आड नदी क्षेत्र में जमा पानी को दोबारा कामापुर के जलाशय तक पहुंचाकर पुनः उपयोग में लिया जाएगा. इस तरह पानी के बार-बार उपयोग से बिजली उत्पादन की एक चक्रीय व्यवस्था तैयार करने की योजना है.
* वन विभाग से अनुमति मिलने का दावा
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए प्रादेशिक वन विभाग सहित संबंधित विभागों से अनुमति मिलने की बात कही गई है. फिलहाल तीन मशीनों की मदद से करीब 20 कर्मचारी मिट्टी परीक्षण के कार्य में जुटे हैं. यह काम चंडीगढ़ की सूद एंड कंपनी द्वारा किया जा रहा है. मिट्टी परीक्षण पूरा होने के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू होने और उसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ने की संभावना है.
* रोजगार और पर्यटन को मिल सकती है गति
परियोजना के समर्थकों का मानना है कि इसके निर्माण से चिखलदरा और मेलघाट के आदिवासी अंचल में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. निर्माण और बाद की गतिविधियों से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके साथ ही बड़े जलाशयों और बिजली परियोजना से क्षेत्र के पर्यटन आकर्षण में भी वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. हालांकि, परियोजना की लागत, सभी आवश्यक अनुमतियों, निर्माण की समयसीमा, स्थानीय लोगों पर संभावित प्रभाव और रोजगार के वास्तविक अवसरों के संबंध में आधिकारिक पुष्टि तथा विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है. फिलहाल मिट्टी परीक्षण पूरा होने और आगे की निविदा प्रक्रिया पर परियोजना की अगली प्रगति निर्भर करेगी.

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