प्राथमिक और सेवानिवृत्त शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान देंगे शिक्षक विधायक?

गैर-शैक्षणिक और ऑनलाइन कार्यों के बोझ से प्राथमिक शिक्षक परेशान

* सेवानिवृत्ति लाभों में देरी से बुजुर्ग शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ीं
मोर्शी /दि.10– अमरावती विभागीय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव 23 अक्टूबर 2026 को होने जा रहा है. इस चुनाव के बीच प्राथमिक और सेवानिवृत्त शिक्षकों की समस्याओं का मुद्दा सामने आया है. प्राथमिक शिक्षकों को मतदान का अधिकार नहीं होने के कारण उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता. वहीं, सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी अपने हक के आर्थिक लाभ समय पर प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. यह चिंता साने गुरुजी सेवानिवृत्त शिक्षक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र देशमुख ने व्यक्त की है.
राजेंद्र देशमुख ने कहा कि प्राथमिक शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा बड़ी संख्या में गैर-शैक्षणिक कार्य सौंपे जाते हैं. इनमें ऑनलाइन कार्यों का बोझ सबसे अधिक है. शिक्षकों का काफी समय इन कार्यों को पूरा करने में ही बीत जाता है. कई बार स्कूल का समय समाप्त होने के बाद भी उन्हें ऑनलाइन काम पूरा करने के लिए बाहर जाकर पैसे खर्च करने पड़ते हैं. इस स्थिति से विशेष रूप से मुख्याध्यापक परेशान हैं. ऐसे में शिक्षकों को विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय कैसे मिलेगा, यह सवाल उठता है. कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी कम है. कहीं सात कक्षाओं के लिए केवल तीन शिक्षक हैं, तो कहीं चार कक्षाओं की जिम्मेदारी दो शिक्षकों पर है. इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की संख्या पर पड़ रहा है. इसके बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट और घटती छात्र संख्या के लिए शिक्षकों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है.
* समूह साधन केंद्रों पर ऑपरेटर नियुक्त करने की मांग
ऑनलाइन कार्यों का बोझ कम करने के लिए समूह साधन केंद्रों पर कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले ऑपरेटर नियुक्त करना आवश्यक है. इससे शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत मिलेगी और वे विद्यार्थियों को पढ़ाने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे.
* सेवानिवृत्ति के बाद भी लाभों के लिए इंतजार
देशमुख ने सेवानिवृत्त शिक्षकों की समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि शासन के नियमों के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षकों को मिलने वाले सभी आर्थिक लाभ समय पर दिए जाने चाहिए. सेवानिवृत्ति के बाद बच्चों की शिक्षा, विवाह और बीमारी जैसे खर्चों के कारण आर्थिक जरूरतें बढ़ जाती हैं. ऐसे समय में यदि कई महीनों तक पेंशन और अन्य देय लाभ नहीं मिलते, तो सेवानिवृत्त शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की उदासीनता के कारण सेवानिवृत्त शिक्षकों को अपने अधिकारों के लिए इस उम्र में भी संगठनों के माध्यम से आंदोलन करना पड़ता है. भविष्य में भी ऐसी स्थिति बनी रहना दुर्भाग्यपूर्ण होगा.
* नए शिक्षक विधायक से उम्मीदें
राजेंद्र देशमुख ने अपेक्षा जताई कि अमरावती विभागीय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित होने वाला विधायक प्राथमिक और सेवानिवृत्त शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देगा. उन्होंने कहा कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम करने, स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ समय पर उपलब्ध कराने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए.

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