कैंसर दवाओं पर 30 फीसदी मार्जिन तो बाकी पर क्यों नहीं

मनमानी कीमतों पर कोर्ट में सुनवाई

पूछा – 5 हजार में रिटेलर को मिलने वाले हार्ट स्टेंट की एमआरपी 25 हजार क्यों?
दिल्ली/ दि. 13– सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूछा कि, कैंसर दवाओं की तरह बाकी दवाओं और मेडिकल उपकरणों के मुनाफे पर सीमा क्यों नहीं? जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने हार्ट स्टेंट की कीमत में 5 गुना अंतर पर सवाल उठाया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बोले-स्टेंट की कीमतें पहले से नियंत्रित हैं.
कोर्ट ने बताया कि एजिथ्रोमाइसिन की स्टॉकिस्ट कीमत 28.50 रूपए और एमआरपी 78.29 रूपए है. सलाइन ड्रिप लाइन की एमआरपी 11 रूपए होने के बावजूद 270 रूपए में बिक्री पर भी सवाल उठाया. पिछली सुनवाई में 2700 रू.में रिटेलर को मिलने वाली कैंसर दवा की 27 हजार एमआरपी को दिनदहाडे लूट कहा था. केंद्र ने 8 अक्तूबर को गैर-सूचीबध्द कैंसर दवाओं का टे्रड मार्जिन 30% तक सीमित करने की मंजूरी दी थी. इससे कीमतें 70% तक घटेंगी. मरीज सालाना 2500 करोड रूपए बचा सकेंगे. अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी.
* स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में दिखाना होगा रेट : केेंद्र
केंद्र ने सोमवार को राज्यों से अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज ,जांच व सुविधाआं के रेट प्रमुख जगह दिखाने को कहा. स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने मुख्य सचिवों को पत्र लिखा. क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट वाले राज्यों में स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में रेट दिखाना पहले से अनिवार्य है. मेडिकल और आयुष वीजा पर आने वाले विदेशी मरीजों के पैंकेज रेट भी दिखाने को कहा है. इससे खर्च जान सकेंगे और विवाद घटेंगे.

Back to top button