मनपा के प्रशासक रहे आष्टीकर के भ्रष्टाचार की होगी न्यायिक जांच

सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में होगा समिति का गठन

* सेवानिवृत्त अभियंता कामकाज का करेंगे मूल्यांकन
* जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
* मनपा के इतिहास में पहली बार इस तरह के निर्णय से हडकंप
अमरावती/ दि.20- प्रशासक राज के दौरान तत्कालीन आयुक्त प्रवीण आष्टीकर के कार्यकाल दौरान अमरावती मनपा में हुए करोडो रुपए के भ्रष्टाचार मामले की न्यायिक जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति का गठन करने का निर्णय आज मनपा की हुई आम सभा में सभी सदस्यों की सहमति से लिया गया. इस समिति में आयुक्त आष्टीकर के कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों का मूल्यांकन करने के लिए सेवानिवृत्त शासकीय अभियंता का भी समावेश करने का निर्णय लिया गया. जांच समिति द्बारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद आगे की कार्रवाई करने का निर्णय सभा में लिया गया हैं. अमरावती मनपा के इतिहास में पहली बार भ्रष्टाचार को लेकर इस तरह की जांच के निर्णय से हडकंप मच गया हैं.
मनपा की आमसभा में विपक्ष के नेता विलास इंगोले ने बताया कि प्रवीण आष्टीकर के प्रशासक राज में विकास योजना के तहत मनपा, जिला नियोजन निधि, शासन निधि अंतर्गत करोडो रुपए का भ्रष्टाचार हुआ हैं. जलसंपदा विभाग के जिओ टैग अध्यादेश को मनपा में लागू कर भारी भ्रष्टाचार किया गया. विपक्ष के नेता विलास इंगोले का कहना था कि उस समय प्रशासक राज में 200 से 300 करोड रुपए का भ्रष्टाचार हुए. इसके तहत मनपा में जो विकास काम नहीं हुए, उसके बिल निकाले गए. पसंदीदा 5 से 6 ठेकेदारो को ही यह कार्य सौंपे गए. आष्टीकर ने ऐसे अनेक विकास कार्यों के नाम पर जनता का पैसा हडपकर भारी भ्रष्टाचार किया. ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच होनी चाहिए, साथ ही उनकी पेन्शन रोककर कडी कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने सभागृह को यह भी बताया कि इस प्रस्ताव पर सभागृह में चर्चा न करने के लिए अनेकों द्बारा उनपर दबाव लाने का प्रयास किया गया. लेकिन शहर को लूटकर ले जानेवाले ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होने के लिए उन्होंने किसी की नहीं सुनी और यह प्रस्ताव सभागृह में प्रस्तुत किए.
इस प्रस्ताव का अनुमोदन करनेवाले पार्षद बबलू शेखावत ने बताया कि जीओ टैग अध्यादेश जलसंपदा विभाग ने निकाला. इस अध्यादेश के तहत जिन बहुल क्षेत्र में जाने में दुविधा होती हैं अथवा ठेकेदार कोई काम छोडकर चला जाता है तो इस जीओ टैक के तहत वह काम पूर्ण किए जाते हैं. प्रवीण आष्टीकरण ने अपने कार्यकाल में इसके तहत विकासकार्य दिखाकर करोडो का भ्रष्टाचार किया. उन्होंने आष्टीकर के इस करोडो रुपए के भ्रष्टाचार की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति कर जांच करवाने की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासक राज में नगरसेवक न रहते नगरसेवक निधि उन्होंने उपलब्ध की. सभागृह का निर्माण भी पैसे खाने के लिए किया गया.
* एक ही काम के बिल मनपा और लोनिवि से निकले
– स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल ने उठाया मुद्दा
मनपा के स्वीकृत सदस्य अनिल अग्रवाल ने प्रवीण आष्टीकर के भ्रष्टाचार के मुद्दे विस्तृत रूप से प्रस्तुत करते हुए सभागृह को बताया कि एक आयुक्त स्तर के अधिकारी के भ्रष्टाचार को लेकर मनपा के सभी सदस्यों को कार्रवाई के लिए लडना पड रहा हैं. 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 तक प्रवीण आष्टीकर का प्रशासक के रूप में कार्यकाल रहा. उनके कार्यकाल में मनपा और लोकनिर्माण विभाग द्बारा उन्हेंं दी गई जानकारी के मुताबिक कुल 746 विकास कार्य हुए. इसके मुताबिक हर प्रभाग में एक वर्ष में प्रत्येकि 15 काम किए गए. इस तरह के विकास कार्य के तहत तो अमरावती नगरी को चमकना था. उन्होने बताया कि लोकनिर्माण के तहत तब कौनसे काम हुए यह जानकारी मांगी गई थी. वह जानकारी उन्हें आज मिली हैं. लेकिन इस में किसी भी ठेकेदार के नाम नहीं हैं. मनपा और लोकनिर्माण विभाग द्बारा एक ही काम के दो-दो बिल निकाले गए. जीओ टैग के तहत बिल मनपा से निकाले गए. उन्होंने अनेक आश्चर्य चकित करनेवाले मुद्दे सभागृह में प्रस्तुत किए. जो विकासकार्य ही नहीं हुए ऐसे काम दिखाकर बिल निकाले गए. शहर के नए लेआउट के विकास कार्य संबंधित बिल्डर द्बारा किए जाते है, वह कार्य मनपा द्बारा किए गए बताए गए हैं.
स्वीकृत पार्षद अनिल अग्र्रवाल ने जोर देकर सभागृह को बताया कि जीओ टैग के तहत जो काम हुए है उसमें भारी अनियमितता हुई हैं. जीन ठेकेदारों के नाम से जो काम हुए हैं, वह ठेकेदार वैध रूप से उस दायरे में आते है क्या उस बाबत भी जांच होनी चाहिए. आष्टीकर के कार्यकाल में हुए इस करोडो रुपए भ्रष्टाचार की पहले एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच करने की बात उन्होंने कहीं. इसके लिए उन्होंने मनपा की एक समिति गठित कर जांच करने और आंठ दिन में वह जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने की भी मांग की. इस पर स्विकृत सदस्य मिलींद चिमोटे ने भी आष्टीकर ने प्रशासक राज में अपने अधिकार का किस तरह इस्तेमाल किया यह बताया. उन्होंने इस अवसर पर अधिकारियों को भी आडे हाथो लिया और कहा कि सोची समझी साजिश और निविदा से खिलवाड कर आष्टिकर ने शहर को लुटा है. ऐसे अधिकारी के खिलाफ कडी कार्रवाई होनी ही चाहिए.                                                                                                         * प्रशासक राज में भ्रष्टाचार सोच के बाहर – प्रशांत देशपांडे
भाजपा के स्वीकृत पार्षद एड. प्रशांत देशपांडे ने आष्टीकर के भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा कि यह अनियमितता सोच के बाहर है और ऐसे भ्रष्टाचार को उजागर कर संबंधित पर कडी कार्रवाई होना यह हम सभी पार्षदों की जिम्मेदारी हैं. जीओ टैग के काम शहर में करना और बिल निकालना यह काफी आश्चर्यजनक हैं. ऐसे भ्रष्टाचारी अधिकारी की जांच करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश और अभियंता को जांच समिति में शामिल कर आवश्यक कदम उठाना ही चाहिए.
* हलाल करने का काम किया आष्टीकर ने – चेतन गावंडे
मनपा के पक्ष नेता चेतन गावंडे ने कहा कि प्रशासक राज में प्रवीण आष्टीकर ने हलाल करने का काम किया हैं. उन्होंने संतप्त होकर कहा कि लूटकर ले जाना और देखते रहना इतने गए गुजरे लोग यहां नहीं हैं. अब तक राजनीतिक क्षेत्र में जिन वरिष्ठ नेताओ ने काम किया होगा, उन्हें भी आश्चर्यचकित करनेवाला काम आष्टीकर ने किया हैं. इस कारण जिन विकास कार्यों के लिए जो निधि मनपा को मिली थी, उसकी जांच कर संबंधित कार्रवाई होनी ही चाहिए. पक्ष-विपक्ष की मांग को सुनने के बाद सभापति श्रीचंद तेजवानी ने बताया कि प्रवीण आष्टीकर के कार्यकाल में मनपा का प्रथमदर्शनी आर्थिक नुकसान काफी हुआ हैं. इस कारण इस अनियमितता के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के जरिए जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी. समिति में सेवानिवृत्त अभियंता का भी समावेश किया जाएगा और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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