जिले में एचटीबीटी की बिक्री करनेवाला सिंडीकेट सक्रिय

गत वर्ष राज्य की सर्वाधिक कार्रवाईयां अमरावती जिले में ही

* इस बार भी रैकेट कर रहा काम, कृषि विभाग के सामने चुनौती
अमरावती/दि.16- केंद्र सरकार ने बीजी-3 (एचटीबीटी) बीजों को मान्यता नहीं दी है. जिसके चलते इन प्रतिबंधित बीजों की चोरीछिपे तरीके से तस्करी व बिक्री की जाती है. गत वर्ष एचटीबीटी बीजों को लेकर सर्वाधिक कार्रवाईयां अमरावती जिले में ही हुई थी. साथ ही बडे पैमाने पर पुलिस में शिकायते भी दर्ज हुई थी. लेकिन इसके बावजूद इस पूरे सिंडीकेट को पकडने का काम अब तक नहीं किया जा सका है. जिसके चलते इस बार भी प्रतिबंधित बीजों की तस्करी करनेवाला गिरोह अमरावती जिले में पूरी तरह से सक्रिय दिखाई दे रहा है और आगामी खरीफ सीजन से पहले प्रतिबंधित एचटीबीटी बीजों की तस्करी व व बिक्री को रोकने की चुनौती कृषि विभाग के सामने है.
केंद्र सरकार द्वारा अब तक मान्यता नहीं दिए गए तथा इंसानी स्वास्थ्य सहित जमीन के लिए घातक साबित रहनेवाले बीजी-3 नामक एचटीबीटी प्रजाति वाले कपास के बीजों का प्रयोग चोरीछिपे पद्धती से बढ रहा है. तेलंगना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश व गुजरात जैसे राज्यों से बडे पैमाने पर कपास के इन प्रतिबंधित बीजों को चोरीछिपे एवं अवैध तरीके से लाकर बेचा जा रहा है. जिनका कई किसानों द्वारा बुआई हेतु प्रयोग भी किया जाता है. खरीफ के आगामी सीजन को ध्यान में रखते हुए विगत दिसंबर से जनवरी माह के दौरान ही इन प्रतिबंधित बीजों के पैकेट अमरावती जिले में पहुंच गए, ऐसी चर्चा है.
कपास के बोगस व प्रतिबंधित बीजों के मामलों को लेकर कृषि विभाग द्वारा पुलिस थानों में भी शिकायते दर्ज कराई गई है. परंतु इस व्यापार के पीछे रहनेवाले मुख्य सिंडीकेट तथा अंतरराज्यीय बडी मछलियों तक पहुंचने में पुलिस के हाथ अब तक असफलता ही लगी है.
* क्या है एचटीबीटी?
एचटीबीटी यानि हर्बिसाइड टॉलरंट बीटी प्रजाती वाले कपास के बीज होते है. यह एक तरह से जनुकिय बदलाव यानि ‘जीएम’ किए गए बीज रहते है. कपास के खेतों में अतिरिक्त घासफूस को नष्ट करने हेतु ‘ग्लायफोसेट’ नामक तणनाशक का प्रयोग किया जाता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए एचटीबीटी बीजों को कुछ इस तरह से विकसित किया गया है कि, इस पर तणनाशक का परिणाम नहीं होता. बल्कि अन्य पौधे नष्ट हो जाते है.

* इस वजह से किसान करते हैं पसंद
एचटीबीटी बीजों के चलते खेतों से अतिरिक्त घासफूस निकालने हेतु मजदूरी पर होनेवाला खर्च बच जाता है. जिसके चलते किसानों का इन बीजों के प्रयोग की ओर अच्छा-खासा रुझान होता है, परंतु यद्यपि तत्कालीक तौर पर खर्च बचने का फायदा दिखाई देता है. लेकिन इसके दीर्घकालिन परिणाम बेहद गंभीर रहते है. इन बीजों को केंद्र सरकार की तकनीकी मान्यता नहीं रहने के चलते जालसाजी होने पर किसान कहीं पर भी कानूनी तौर पर शिकायत दर्ज भी नहीं करा सकते.

* कृषि विभाग ने हटाए अधिकार
इससे पहले कृषि विभाग के तहसील स्तर पर गुणनियंत्रक उडन दस्ते कार्यरत हुआ करते थे. परंतु कृषि विभाग ने इन सभी अधिकारियों के गुणनियंत्रण से संबंधित अधिकार हटा लिए तथा तहसील स्तर पर कृषि अधिकारी (गुणनियंत्रक) पद की निर्मिती करते हुए उसी अधिकारी को सभी अधिकार दिए. इस वर्ष पंचायत समिति के कृषि अधिकारी को भी गुणनियंत्रक की मान्यता दी गई. जिसके चलते कार्रवाई का सिलसिला भी कम हुआ है.

* एचटीबीटी प्रयोग के खतरे
– पर्यावरण का नुकसान – ‘ग्लायफोसेट’ नामक तणनाशक को कैंसर रोगजन्य माना जाता है. जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.
– जमीन की उपज क्षमता – एक्टीवीटी के अति प्रयोग से जमीन के लिए उपयोगी रहनेवाले सुक्ष्म जीव नष्ट होकर जमीन की उर्वरक क्षमता घटती है और जमीन बंजर हो सकती है.
– सुपर वीड्स – कालांतर मे खेतों में ऐसे तणों की निर्मिती होती है, जिन पर किसी भी रासायनिक द्रव्य का परिणाम नहीं होता.
– कानूनी खतरे – ये बीज प्रतिबंधित रहने के चलते इनकी खरीदी-बिक्री व उपयोग करना फौजदारी अपराध है.

* किसानों ने लाईसेंसधारक दुकानों से ही बीजों की खरीदी करनी चाहिए और पक्की रसीद भी लेनी चाहिए. किसी भी तरह के अनधिकृत बीजों की खरीदी न करें. क्योंकि ऐसा करने पर जालसाजी होने की संभावना है.
– राहुल सातपूते
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी.

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