यूपीआई शुल्क से अमरावती के पेट्रोल डीलर्स नाराज

5 रुपए शुल्क के प्रस्ताव का विरोध

* वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से 1 अक्तूबर को मुलाकात
* 2 हजार से अधिक के डिजिटल लेन-देन पर
अमरावती/दि.22– पेट्रोल पंपों पर यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की संभावित व्यवस्था को लेकर अमरावती के पेट्रोल डीलर्स में नाराजगी बढ रही है. 2 हजार रुपए से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर प्रति ट्रांजेक्शन 5 रुपए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) अथवा शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव का फेडरेशन ऑफ ऑल महाराष्ट्र पेट्रोल डीलर्स असोसिएशन (फैमपेडा) ने कडा विरोध किया है. संगठन ने डिजिटल भुगतान को पूरी तरह शुल्कमुक्त रखने की मांग की है.
अमरावती जिला पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजेश आसोरिया ने बताया कि, इस मुद्दे को लेकर फैमपेडा की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के निदेशकों को ज्ञापन भेजा गया है.
* निश्चित मार्जिन, कीमत बढाने का अधिकार नहीं
राजेश असोरिया ने कहा कि, पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम सरकार तथा तेल कंपनियों की नीतियों के अनुसार तय होते हैं. पेट्रोल पंप डीलर्स को प्रति लीटर निश्चित मार्जिन मिलता है. ऐसे में डिजिटल भुगतान का अतिरिक्त खर्च ग्राहकों पर डालने के लिए डीलर्स अपनी ओर से ईंधन के दाम नहीं बढा सकते. यदि प्रति लेन-देन शुल्क लगाया जाता है, तो इसका सीधा असर डीलर्स के सीमित मार्जिन पर पडेगा.
आसोरिया के अनुसार पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने वाले ग्राहकों के अधिकांश डिजिटल लेन-देन 2 हजार से अधिक के होते हैं. ऐसे में प्रत्येक लेन-देन पर 5 रुपए शुल्क लगने पर रोजाना होने वाले बडी संख्या में डिजिटल भुगतान से पेट्रोल पंप संचालकों का खर्च बढेगा. डीलर्स का कहना ैहै कि, पहले से नियंत्रित मार्जिन में कारोबार करने वाले पंपों के लिए यह अतिरिक्त बोझ आर्थिक गणित बिगाड सकता है.
* कैशलेस भुगतान को बढावा, अब शुल्क का बोझ क्यों?
राजेश आसोरिया ने कहा कि, पेट्रोल डीलर्स ने लंबे समय से क्यूआर कोड, पीओएस टर्मिनल, यूपीआई और ई-वॉलेट के माध्यम से कैशलेस भुगतान को प्रोत्साहित किया है. डिजिटल भुगतान को बढावा देना राष्ट्रीय स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा है. ऐसे में डिजिटल व्यवस्था को अपनाने वाले डीलर्स पर ही उसका अतिरिक्त खर्च डालना उचित नहीं है. फैमपेडा का कहना है कि, डिजिटल लेन-देन का खर्च तेल कंपनियों पर डालने के बावजूद फिनटेक कंपनियों और बैंकिंग सेवा प्रदाताओं की ओर से सेटलमेंट में देरी, अप्रत्यक्ष कटौती और डिजिटल उपकरणों के किराए जैसे खर्च अंतत: डीलर्स पर ही आते हैं. इस कारण डीलर्स में असंतोष है.
इस मुद्दे पर फैमपेडा पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर ज्ञापन दे चुका है. संगठन की मांग है कि, पेट्रोल पंपों पर डिजिटल लेन-देन को पूरी तरह शुल्क मुक्त रखा जाए. यदि शुल्क व्यवस्था लागू की जाती है, तो उसका भार सरकार या तेल कंपनियां उठाएं.
* साइबर फ्रॉड से खाते फ्रीज होने की चिंता
डिजिटल भुगतान से जुडे साइबर फ्रॉड को लेकर भी पेट्रोल डीलर्स चिंतित है. फैमपेडा के मुताबिक रोजाना हजारों डिजिटल लेन-देन के बीच यदि कोई भुगतान बाद में साइबर धोखाधडी से जुडा पाया जाता है, तो जांच एजेंसियों की कार्रवाई के चलते पेट्रोल पंप संचालकों के बैंक खातों में जमा राशि फ्रीज होने का जोखिम रहता है.
* 1 अक्तूबर को निर्मला सीतारमण से मुलाकात
राजेश आसोरिया ने बताया कि, फेडरेशन ऑफ ऑल महाराष्ट्र पेट्रोल डीलर्स असोसिएशन को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 अक्तूबर को मुलाकात का समय दिया है. इस दौरान डिजिटल भुगतान शुल्क, सीमित डीलर मार्जिन, साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक खाते फ्रीज होने और डिजिटल लेन-देन से जुडे अन्य खर्चों सहित पेट्रोल डीलर्स की समस्याएं सामने रखी जाएगी. अमरावती के पेट्रोल डीलर्स का कहना है कि, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के बाद अब उस पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डीलर्स पर डालना स्वीकार्य नहीं होगा. फैमपेडा ने मांग पूरी नहीं होने पर डीलर्स पर बढने वाले आर्थिक दबाव को लेकर भी चिंता जताई है.

 

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