अमरावती कारागृह में क्षमता से 312 कैदी ज्यादा
975 की जगह 1,287 बंदी, 40 प्रतिशत पद रिक्त

* ओवरक्राउडिंग से सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन पर बढ़ा दबाव
अमरावती /दि.14– बढ़ते अपराध, गिरफ्तारियों और न्यायालयों में लंबित मामलों के चलते अमरावती मध्यवर्ती कारागृह में कैदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. जेल की निर्धारित क्षमता 975 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में यहां 1,287 कैदी रखे गए हैं. यानी जेल में क्षमता से 312 कैदी अधिक हैं. बढ़ती भीड़ के कारण जेल प्रशासन के सामने आवास, सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. पिछले करीब दस वर्षों में अपराध और गिरफ्तारियों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके अनुपात में जेल के भौतिक ढांचे और कर्मचारियों की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई. क्षमता से अधिक कैदियों के कारण उपलब्ध सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
अमरावती मध्यवर्ती कारागृह में स्वीकृत पदों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं. अधिकारियों, जेल कर्मचारियों, कांस्टेबलों और सुरक्षा कर्मियों की कमी के कारण जेल प्रशासन को दैनिक व्यवस्था संभालने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. कैदियों की संख्या अधिक होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता है. लेकिन मैनपावर की कमी के चलते मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है. लंबे समय तक अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालने से कर्मचारियों पर कार्यभार भी बढ़ रहा है.
* स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी दबाव
जेल में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण रहने की व्यवस्था के साथ-साथ पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. बड़ी संख्या में कैदियों को सीमित संसाधनों के माध्यम से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जेल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है. जेल में गंभीर अपराधों के आरोपियों की संख्या भी काफी है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो गया है.
* अंडरट्रायल कैदियों की संख्या सबसे अधिक
जेल में सबसे बड़ी संख्या उन कैदियों की है, जिनके खिलाफ न्यायालय में मामले लंबित हैं और जिनका अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. ऐसे कैदियों को विचाराधीन बंदी कहा जाता है. कई मामलों में आरोपियों को जमानत नहीं मिलने के कारण उन्हें मुकदमे का फैसला आने तक जेल में रहना पड़ता है.
* मुकदमों की देरी से बढ़ रही भीड़
न्यायालयों में लंबित मामलों और सुनवाई में होने वाली देरी का असर जेलों पर भी पड़ रहा है. लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों के कारण विचाराधीन कैदियों की संख्या कम नहीं हो पा रही है. इसके अलावा गंभीर अपराधों के आरोपियों को समय पर जमानत नहीं मिलने से भी जेल में बंदियों की संख्या बढ़ रही है. अपराधों में वृद्धि, बढ़ती गिरफ्तारियां और न्यायिक प्रक्रिया में लंबित मामलों के चलते अमरावती सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. जेल प्रशासन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अतिरिक्त स्टाफ, बेहतर बुनियादी सुविधाओं और क्षमता विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही है.





