चार माह में 8 रुपये महंगी हुई सीएनजी गैस
मदर स्टेशन जिले में, फिर भी सीएनजी 103.78 रुपये किलो

* पहली बार 100 रुपये के पार पहुंचा सीएनजी का दाम
* अमरावती के 3,200 वाहन चालकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
* बोरी में मदर स्टेशन शुरू होने के बाद कीमत घटने की थी उम्मीद
* लगातार बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं में नाराजगी
अमरावती/दि.14 – महंगाई की मार झेल रहे आम नागरिकों और वाहन चालकों को अब एक और झटका लगा है. पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों से राहत की उम्मीद में सीएनजी अपनाने वाले वाहन मालिकों के सामने भी अब बढ़ती लागत की चुनौती खड़ी हो गई है. अमरावती जिले में पिछले चार महीनों के दौरान सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है और अब सीएनजी का दर पहली बार 100 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार करते हुए 103.78 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.
विशेष बात यह है कि अमरावती जिले में ही सीएनजी का मदर स्टेशन शुरू होने के बावजूद उपभोक्ताओं को दरों में कोई राहत नहीं मिली है. उलटे कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से वाहन चालकों में असंतोष बढ़ रहा है. सीएनजी पर चलने वाले ऑटो, टैक्सी, निजी कार और व्यावसायिक वाहनों के मालिकों का कहना है कि जिस ईंधन को पेट्रोल और डीजल का सस्ता विकल्प माना जाता था, वह अब तेजी से महंगा होता जा रहा है.
* चार महीनों में 8 रुपये की बढ़ोतरी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जुलाई के बीच सीएनजी के दामों में चार बार वृद्धि की गई. बता दें कि सीएनजी के दाम 2 अप्रैल 2026 को 95.78 रुपये प्रति किलो, 16 मई 2026 को 97.78 रुपये प्रति किलो, 28 मई 2026 को 99.78 रुपये प्रति किलो तथा 31 जुलाई 2026 को 103.78 रुपये प्रति किलो किए गये. इस प्रकार मात्र चार महीनों में सीएनजी की कीमत में 8 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है. इससे उन वाहन चालकों का मासिक खर्च काफी बढ़ गया है, जिन्होंने ईंधन खर्च कम करने के उद्देश्य से सीएनजी वाहन खरीदे थे या अपनी गाड़ियों को सीएनजी में परिवर्तित कराया था.
* ढाई वर्षों में तेजी से बढ़ा सीएनजी का उपयोग
अमरावती जिले में लगभग ढाई वर्ष पहले सीएनजी की आपूर्ति शुरू हुई थी. शुरुआत में इसे पर्यावरण अनुकूल और किफायती ईंधन के रूप में प्रचारित किया गया था. पेट्रोल और डीजल की तुलना में कम खर्च होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने सीएनजी को अपनाया. वर्तमान में जिले में लगभग 3,200 वाहन सीएनजी पर चल रहे हैं. इनमें ऑटो रिक्शा, टैक्सी, निजी कारें तथा व्यावसायिक वाहन शामिल हैं. हर महीने सीएनजी उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन लगातार बढ़ते दामों ने इस विकल्प की आर्थिक उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
* मदर स्टेशन शुरू होने से राहत की थी उम्मीद
शुरुआती दौर में अमरावती जिले में उपयोग होने वाला सीएनजी लातूर जिले से टैंकरों के माध्यम से लाया जाता था. लंबी दूरी के परिवहन के कारण अतिरिक्त परिवहन लागत जुड़ती थी, जिसका असर कीमतों पर पड़ता था. इसी समस्या को दूर करने के लिए नांदगांव खंडेश्वर तहसील के बोरी क्षेत्र में सीएनजी का मदर स्टेशन स्थापित किया गया. लगभग सात महीने पहले शुरू हुए इस मदर स्टेशन से जिले को स्थानीय स्तर पर गैस आपूर्ति मिलने लगी. यह स्टेशन अमरावती शहर से लगभग 45 से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मदर स्टेशन शुरू होने के बाद उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि परिवहन खर्च कम होने से सीएनजी के दामों में कमी आएगी. अदानी टोटल गैस के अधिकारियों की ओर से भी संकेत दिए गए थे कि स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था से लागत कम होने की संभावना है. लेकिन उपभोक्ताओं की उम्मीदों के विपरीत कीमतें घटने के बजाय लगातार बढ़ती चली गईं. इससे वाहन चालकों में निराशा और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं.
* ऑटो और टैक्सी चालकों पर सबसे ज्यादा असर
सीएनजी दरों में वृद्धि का सबसे ज्यादा असर ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों पर पड़ रहा है. उनका कहना है कि किराया संरचना में कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ है, जबकि ईंधन खर्च लगातार बढ़ रहा है. एक ऑटो चालक के अनुसार, पहले जहां प्रतिदिन का ईंधन खर्च सीमित रहता था, वहीं अब हर महीने सैकड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं. यदि यही स्थिति बनी रही तो इसका असर यात्रियों पर भी पड़ सकता है और किराया बढ़ाने की मांग तेज हो सकती है. निजी वाहन मालिकों का भी कहना है कि सीएनजी को उन्होंने पेट्रोल के मुकाबले किफायती विकल्प मानकर चुना था, लेकिन अब यह अंतर लगातार कम होता जा रहा है.
* आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
अदानी टोटल गैस के विदर्भ प्रमुख योगेशकुमार पारधी के अनुसार, सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण केंद्र स्तर पर प्राकृतिक गैस की मूल कीमतों में हुई वृद्धि है. उन्होंने बताया कि देशभर में गैस की आधारभूत कीमतें बढ़ने का प्रभाव विभिन्न शहरों में सीएनजी दरों पर पड़ रहा है. अमरावती में हुई वृद्धि भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर कीमतें बढ़ाने का कोई अलग निर्णय नहीं लिया गया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लागत बढ़ने के कारण दरों में संशोधन किया गया है.
* क्या कम होगी कीमतें?
वाहन चालकों और उपभोक्ताओं की निगाहें अब आने वाले महीनों पर टिकी हैं. यदि प्राकृतिक गैस की मूल कीमतों में कमी आती है तो सीएनजी के दाम घटने की संभावना बन सकती है. हालांकि फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीएनजी की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो पेट्रोल और सीएनजी के बीच लागत का अंतर लगातार कम होता जाएगा. इससे नए उपभोक्ताओं का रुझान भी प्रभावित हो सकता है.
* राहत की उम्मीद, लेकिन फिलहाल बढ़ता ही जा रहा है बोझ
अमरावती जिले में सीएनजी को स्वच्छ, सस्ता और टिकाऊ ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया गया था. जिले में मदर स्टेशन शुरू होने के बाद उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है. चार महीनों में 8 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी और 103.78 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर यह संकेत देता है कि महंगाई की मार अब वैकल्पिक ईंधन तक भी पहुंच चुकी है. ऐसे में हजारों वाहन चालकों की नजर सरकार और गैस कंपनियों की आगामी मूल्य नीति पर टिकी हुई है.