सुरों की संध्या बनी संवेदना का उत्सव

युगल स्वरांजलि’ में कला और करुणा का अद्भुत संगम

अमरावती/दि.28- सा इंटरनेशनल म्यूजिक अकादमी, अमरावती के तत्वावधान में आयोजित युगल स्वरांजलि कार्यक्रम ने संगीतप्रेमियों के हृदय पर अमिट छाप छोड़ी. सिपना कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के भव्य सभागार में संपन्न इस विशेष आयोजन में पुराने हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम युग की मधुर स्मृतियाँ पुनः जीवंत हो उठीं. सुर, ताल और भावनाओं से सजी इस संध्या ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण भी सिद्ध हुआ. आर्थिक रूप से कमजोर, उपेक्षित तथा संघर्षरत कलाकारों को सम्मानपूर्वक मंच उपलब्ध कराना, उनकी प्रतिभा को नई पहचान दिलाना तथा आर्थिक सहयोग प्रदान करना इस उपक्रम का मूल उद्देश्य रहा. कला के माध्यम से सेवा का यह अभिनव प्रयास सभी के लिए प्रशंसनीय रहा.
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ संगीत साधिका कमलताई भोंडे के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ. तत्पश्चात प्रा. विद्या व्यास ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की संकल्पना और उद्देश्य पर प्रकाश डाला. संपूर्ण आयोजन का प्रभावशाली संचालन संदीप सावरकर ने अपने सधे हुए अंदाज़ में किया, जबकि समापन अवसर पर मंजिरी चेपे शास्त्री ने सभी अतिथियों, कलाकारों और श्रोताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की.
कार्यक्रम में शहर के प्रतिभाशाली गायक-गायिकाओं ने पुराने हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय युगल गीतों की मोहक प्रस्तुतियाँ देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया.
सविता पडोले ने जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा, डॉ. जयश्री नांदूरकर ने जाग दर्द-ए-इश्क़ जाग, प्रा. विद्या व्यास ने करवटें बदलते रहें सारी रात हम, मिलिंद जोशी ने बने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा तथा यम्मा यम्मा ये खूबसूरत समां, मंजिरी चेपे शास्त्री ने दिल की नज़र से नज़रों की दिल से, छाया अग्रवाल ने आहा रिमझिम के ये प्यारे प्यारे गीत लिए, वैदेही खेडकर ने दिल है कि मानता नहीं, आयुष तिवारी ने ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, स्मिता पाटील ने छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा, राधा बनकर ने छोड़ दो आँचल ज़माना क्या कहेगा, रजनी भवालकर ने दिल तड़प तड़प के कह रहा है, अमृता वाठोडकर ने मेघा रे मेघा रे मत परदेस जा रे,
जान्हवी बल्लाल ने इशारों इशारों में दिल लेने वाले, निकिता मोने ने कुहू कुहू बोले कोयलिया, प्रवरा राणे कुलकर्णी ने अभी ना जाओ छोड़कर तथा प्रतिभा कुलकर्णी ने आजा सनम मधुर चांदनी में हम प्रस्तुत कर भरपूर प्रशंसा अर्जित की. विशेष आकर्षण यह रहा कि प्राध्यापक डॉ. स्नेहाशीष दास ने प्रत्येक प्रस्तुति में स्वर-सहयोग देकर कार्यक्रम को विशिष्ट गरिमा प्रदान की. उनकी सधी हुई गायकी ने प्रत्येक गीत को और अधिक प्रभावपूर्ण बना दिया.
इस अवसर पर वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को भावपूर्ण आयाम दिया. बांसुरी वादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु जगन्नाथ मारोतराव जवणे एवं उदेभान उर्फ सुभाष विश्वनाथ मसराम का सत्कार किया गया. वहीं अकॉर्डियन वादन के लिए गजानन दत्तात्रय देऊलकर को सम्मानित किया गया. कोलकाता निवासी 83 वर्षीय वरिष्ठ संगीतकार कंकन दास गुप्ता को स्मृति चिन्ह एवं सम्मान राशि भेंट कर विशेष सम्मान प्रदान किया गया. वाद्यवृंद ने भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई. अभिजीत भावे (गिटार), शुभम फुसे (सिंथेसाइज़र), कृष्णा सावरकर (हार्मोनियम), अभिषेक लोखंडे (तबला), कुलदीप चावरे (ढोलक) तथा सतीश मंडले (ऑक्टोपैड) ने उत्कृष्ट संगत से संपूर्ण वातावरण को सुरमय बनाए रखा.कार्यक्रम की सफलता में सिपना कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डॉ. मलसणे सर एवं श्री घाटे सर का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ. साथ ही अकादमी की संचालिका सौ. सौम्या दास, दीपक चौधरी, सविता पडोळे, मानस दास तथा समस्त सदस्यों ने अथक परिश्रम कर आयोजन को सफल बनाया.

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