एक आदर्श प्रशासनिक अधिकारी – तुकाराम मुंढे

1 अगस्त राजस्व दिवस के अवसर पर पूरे महाराष्ट्र में विविघ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है. इसी अवसर पर अमरावती में कस्तूरबा खादी महिला समिति, कुटीर तथा सनसाथी के संयुक्त तत्वाधान में प्रसिध्द आईएएस अधिकारी श्री तुकाराम मुंढे के प्रेरणादायी कार्यक्रम युवा संवाद का आयोजन किया गया है. यह कार्यक्रम शनिवार 1 अगस्त सायं 5 बजे, स्वामी विवेकानंद सभागार ,पोटे टाउनशिप ,कठोरा रोड, अमरावती में आयोजित होगा. मेरे विचार से राजस्व दिवस पर इससे बेहतर प्रेरणादायी उपहार और कोई नहीं हो सकता. बीड जिला मराठवाडा क्षेत्र का एक पिछडा इलाका रहा है. आज भले ही वहीं विकास की नई राहें खुल रहीं है. लेकिन जब तुकाराम मुंढे का बचपन था, तब खेती होने के बावजूद परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत साधारण थी. उनका पैतृक गांव तोडसोन्ना है. उनके पिता हरिभाउ मुंढे के व्यक्तित्व और संस्कारों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पडा. तुकाराम मुंढे बचपन से ही मेहनती और जुझारू थे. वे खेती के काम में भी पूरा हाथ बँटाते थे, क्योंकि वही परिवार की आय का मुख्य साधन था. खेती का काम करने के बावजूद उन्होंने पढाई से कभी समझौता नहीं किया. वे हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम व द्बितीय स्थान प्राप्त करते थे.उनके बडे भाई अशोकराव मुंढे दूरदर्शी विचारों वाले थे. उन्होंने तुकाराम को आगे की पढाई के लिए छत्रपती संभाजीनगर भेजने का निर्णय लिया. प्रारंभ में उनके पिता इसके पक्ष में नहीं थे. क्योंकि खेतों के काम में सहायता करने वाला कोई नहीं था. लेकिन अशोकराव जानते थे कि शिक्षा ही जीवन बदल सकती है. उन्होंने किसी तरह पिता को समझाया और तुकाराम को आगे की पढाई के लिए संभाजीनगर ले गए. यही से तुकाराम मुंढे की वास्तविक शैक्षणिक यात्रा प्रारंभ हुई. अशोकराव ने हर कदम पर उनका साथ दिया. उन्होंने उन्हें पुणे, मुंबई और दिल्ली तक उच्च शिक्षा के लिए भेजा. स्वयं नौकरी करते रहे, कठिन परिस्थितियों में दिन बिताए. लेकिन कभी तुकाराम से पढाई छोडकर नौकरी करने को नहीं कहा. तुकाराम मुंढे के जीवन का अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि वे केवल पढ-लिखकर आईएएस अधिकारी नहीं बने,बल्कि अपने सिध्दातों ईमानदारी और निडर स्वभाव के कारण वे एक आदर्श प्रशासनिक अधिकारी बनकर पूरे महाराष्ट्र ही नहीं ,बल्कि देश के सामने एक उदाहरण के रूप में खडे हुए. महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जब उन्हें नियुक्ति लेनी थी, तब एक अधिकारी ने उनके मूल प्रमाणपत्र देखकर वापस नहीं किए और उन्हें अपनी मेज की दराज में रख लिया. तुकाराम मुंढे ने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा कि आदेश के अनुसार मूल दस्तावेज केवल सत्यापन के लिए होते है और तुरंत वापस किए जाने चाहिए. उनकी दृढता देखकर उस अधिकारी को दस्तावेज लौटाने पडे. इससे स्पष्ट हो गया कि वे अन्याय के सामने कभी झूकने वाले नहीं है. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी पहली नियुक्ति सांगली जिले के मिरज में हुई. लेकिन कार्यभार संभालने से पहले ही वह आदेश स्थगित कर दिया गया. इसके बाद धारणी परियोजना अधिकारी के रूप में नियुक्ति मिली. वह भी बदल दी गई. अंतत: नांदेड जिले के देगलूर में सहायक जिलाधिकारी के रूप में उनकी पहली नियमित नियुक्ति हुई आईएएस प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कार्यभार संभालने से पहले ही तीन बार तबादला होना अपने आप में असाधारण घटना थी. इससे उनके व्यक्तित्व का प्रभाव और उनकी निर्भीक कार्यशैली का अंदाज लगाया जा सकता है. आज वे महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश में ईमानदारी, अनुशासित, कर्तव्यनिष्ठ और निर्भींक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में पहचाने जाते है.ऐसे प्रेरणादायी अधिकारी श्री तुकाराम मुढे शनिवार, 1 अगस्त को शाम 5 बजे अमरावती के स्वामी विवेकानंद सभागार, पोटे टाउनशिप में विद्यार्थियों , अभिभावकों और नागरिकों से संवाद करने आ रहे है. यह विदर्भ के लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है. इस कार्यक्रम में केवल विदर्भ ही नहीं , बल्कि पुणे, मुंबई, नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर, जळगांव, परळी, वैजनाथ और बीड सहित महाराष्ट्र के अनेक क्षेत्रों से लोग आने वाले है. अब तक लगभग 15,000 लोगों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है. और लगभग 10,000निमंत्रण -पत्र वितरित किए जा चुके है. अमरावती मराठी पत्रकार संघ इस कार्यक्रम का मीडिया पार्टनर है तथा सोशल मीडिया पर भी इस आयोजन को लगभग 2 लाख लोगों का व्यापक प्रतिसाद मिला है. निस्संदेह, अमरावती का यह कार्यक्रम एक ऐतिहासिक मील का पत्थर सिध्द होगा. आइए, हम सभी इस प्रेरणादायी क्षण के साक्षी बनें.
प्रा. डॉ. नरेशचंद्र काठोळे
संचालक ,मिशन आयएएस, अमरावती
मो. 9890967003





