अमरावती में एनालॉग पनीर की पडताल शुरू

एफडीए द्वारा सभी होटल व रेस्टॉरेंट को खंगाला जा रहा

* नागपुर से अमरावती में होती थी ऍनालॉग पनीर की आपूर्ति
* गलाकाट प्रतिस्पर्धा के चलते धडल्ले से किया जाता है ऍनालॉग पनीर का प्रयोग
* अब एफडीए ने पूरे राज्य में ऍनालॉग पनीर पर लगा दिया है प्रतिबंध, साथ ही कार्रवाई भी हो गई शुरू
अमरावती/दि.6 – महाराष्ट्र सरकार द्वारा एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर एक वर्ष के प्रतिबंध की घोषणा के बाद अमरावती में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है. शहर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग प्रतिष्ठान, क्लाउड किचन तथा अन्य खाद्य व्यवसायों की विशेष जांच की जा रही है. एफडीए की टीमें विभिन्न प्रतिष्ठानों के स्टॉक, खरीद रिकॉर्ड और उपयोग में लाई जा रही खाद्य सामग्री की पड़ताल कर रही हैं, जबकि संदिग्ध पाए जाने वाले उत्पादों के नमूने परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं.
बता दे कि, एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य में एनालॉग पनीर पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. यह आदेश राजपत्र में प्रकाशित हो चुका है और तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है. हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध बाजार में उपलब्ध सभी प्रकार के पनीर पर नहीं, बल्कि केवल उन उत्पादों पर लागू है जो पनीर जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन जिनमें दूध से प्राप्त वसा और दुग्ध ठोस पदार्थों के स्थान पर वनस्पति तेल, वनस्पति वसा अथवा अन्य गैर-दुग्धीय तत्वों का उपयोग किया जाता है.
* नागपुर से होती थी आपूर्ति, अमरावती में बढ़ी सतर्कता
खाद्य कारोबार से जुड़े सूत्रों के अनुसार अमरावती में लंबे समय से नागपुर से एनालॉग पनीर की आपूर्ति की जा रही थी. कम लागत और अधिक मुनाफे के कारण कुछ होटल, रेस्टोरेंट तथा कैटरिंग व्यवसायियों द्वारा इसका उपयोग किए जाने की चर्चा रही है. अब राज्यभर में प्रतिबंध लागू होने के बाद ऐसे प्रतिष्ठानों में हड़कंप मचा हुआ है. एफडीए अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि शहर में एनालॉग पनीर की आपूर्ति किन माध्यमों से की जा रही थी और किन-किन प्रतिष्ठानों में इसका उपयोग हुआ है. विदर्भ क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देशों के बाद अमरावती को भी संवेदनशील क्षेत्र मानते हुए विशेष अभियान चलाया जा रहा है.
* क्या है एनालॉग पनीर?
विशेषज्ञों के अनुसार एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर ऐसा उत्पाद है, जो देखने और उपयोग में सामान्य पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसके निर्माण में दूध से प्राप्त वसा की जगह वनस्पति तेल, वनस्पति वसा अथवा अन्य सस्ते विकल्पों का उपयोग किया जाता है. इससे उत्पादन लागत काफी कम हो जाती है. कई मामलों में ग्राहकों को इसकी वास्तविक प्रकृति बताए बिना इसे पनीर के रूप में परोसा या बेचा जाता है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं. एफडीए का कहना है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों के तहत पनीर एक मानकीकृत खाद्य पदार्थ है और उसमें दूध से प्राप्त वसा का होना अनिवार्य है. यदि दूध के घटकों को गैर-दुग्धीय तत्वों से प्रतिस्थापित किया जाता है, तो उसे कानूनी रूप से पनीर नहीं माना जा सकता.
* होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसायियों पर विशेष नजर
एफडीए के आदेश के बाद होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर्स, भोजनालय, क्लाउड किचन और अन्य खाद्य सेवा प्रतिष्ठान सीधे जांच के दायरे में आ गए हैं. अब किसी भी खाद्य पदार्थ में एनालॉग पनीर का उपयोग, भंडारण, बिक्री या ग्राहकों को परोसना प्रतिबंधित रहेगा. अधिकारियों के अनुसार शहर के प्रमुख प्रतिष्ठानों में निरीक्षण के दौरान खरीद बिल, स्टॉक रजिस्टर और खाद्य सामग्री के स्रोतों की जांच की जा रही है. यदि किसी प्रतिष्ठान में प्रतिबंधित एनालॉग पनीर का उपयोग या भंडारण पाया जाता है तो संबंधित संचालकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.
* लेबलिंग नियमों का भी पालन जरूरी
एफडीए ने सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों को निर्देश दिया है कि वे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लेबलिंग एंड डिस्प्ले) रेगुलेशन-2020 का पालन सुनिश्चित करें. पनीर अथवा उससे संबंधित उत्पादों के पैकेज पर सामग्री का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा. यदि किसी उत्पाद में दुग्ध वसा के स्थान पर अन्य घटकों का उपयोग किया गया है, तो इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से देना आवश्यक होगा. नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित उत्पाद जब्त किए जा सकते हैं, लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.
* उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील
एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी होटल, रेस्टोरेंट या खाद्य प्रतिष्ठान में संदिग्ध पनीर अथवा निम्न गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग होने की जानकारी मिले तो उसकी सूचना विभाग को दें. विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. राज्यभर में लागू इस प्रतिबंध के बाद अमरावती में जांच और निगरानी का दायरा तेजी से बढ़ा दिया गया है. खाद्य कारोबारियों में जहां कार्रवाई को लेकर चिंता का माहौल है, वहीं उपभोक्ताओं ने इसे खाद्य सुरक्षा और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. अब एफडीए की जांच में यह सामने आना बाकी है कि अमरावती में एनालॉग पनीर का नेटवर्क कितना व्यापक था और इसके उपयोग में कौन-कौन से प्रतिष्ठान शामिल थे.

Back to top button