पशुधन बीमा योजना फिर शुरू होगी

विधायक बच्चू कडू के संघर्ष को बड़ी सफलता

* भेड़-बकरी पालकों को राहत, वन चराई पर दो दिन में जीआर जारी करने का सरकार का आश्वासन                                              मुंबई/दि.6- राज्य के भेड़पालक एवं धनगर समाज के लंबे समय से लंबित मुद्दों पर विधायक बच्चू कडू के आक्रामक और लगातार किए गए आंदोलन तथा विधायी स्तर पर उठाए गए प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है. राज्य सरकार ने भेड़, बकरियों सहित पशुधन बीमा योजना को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है, वहीं वन क्षेत्र में चराई के प्रश्न पर भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए अगले दो दिनों में शासन निर्णय (जीआर) जारी करने का आश्वासन दिया है. इस फैसले से राज्य के लाखों पशुपालक परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
बच्चू कडू ने वर्षों से मेंढपाल (भेड़पालक) समाज के सवालों को लेकर सड़क से लेकर विधान परिषद तक लगातार आवाज उठाई है. ‘वाडा आंदोलन’, ‘सातबारा कोरा आंदोलन’, ‘कोरा यात्रा’, अन्नत्याग आंदोलन तथा विभिन्न जनआंदोलनों के माध्यम से उन्होंने वन चराई, पारंपरिक चराई अधिकार, पशुधन बीमा और वन विभाग की कार्रवाई जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. विधानसभा और विधान परिषद में भी उन्होंने सरकार को कई बार घेरते हुए इन मांगों पर ठोस निर्णय की मांग की थी.
इसी पृष्ठभूमि में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक, विधायक गोपीचंद पडलकर, वन एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे. बच्चू कडू ने भी दूरभाष के माध्यम से बैठक में भाग लेते हुए मेंढपाळ समाज के मुद्दों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की मांग रखी.
बैठक में मेंढपाल समाज के विभिन्न लंबित मुद्दों पर चर्चा की गई. विशेष रूप से वन चराई, पारंपरिक चराई अधिकार और वन विभाग की कार्रवाई के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श हुआ. इसके बाद सरकार ने पांच वर्ष से अधिक आयु के वृक्षों वाले वन क्षेत्रों में भेड़ों को चराई की अनुमति देने संबंधी शासन निर्णय दो दिनों के भीतर जारी करने का आश्वासन दिया.
इस बीच, पशुसंवर्धन विभाग द्वारा भेड़, बकरी एवं अन्य पशुधन के लिए बीमा योजना पुनः शुरू करने की घोषणा को भी मेंढपाल समाज की बड़ी जीत माना जा रहा है. यह मांग बच्चू कडू लगातार विधिमंडल और आंदोलनों के माध्यम से उठाते रहे थे.
बैठक में मेंढपाल समाज की ओर से डॉ. अर्जुन नामदेवराव महानर, दादाराव माने, अवधूत कोरडकर, सखाराम कुडाल, बंडू महानोर, संजय ठोंबरे, रोशन शिंगाडे, बालू शिंदे, पंजाब महानोर, ज्योतीराम बिचकुले, सोमाजी पिसाल, मंगेश घुले सहित राज्यभर के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित थे.
बैठक के बाद समाज के प्रतिनिधियों ने बच्चू कडू के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेंढपाल समाज के प्रश्नों को लगातार उठाने और सरकार पर दबाव बनाने के कारण ही यह सकारात्मक निर्णय संभव हो सका है. वहीं अन्नत्याग आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. अर्जुन महानर ने कहा कि जब तक शासन के आश्वासनों का जीआर जारी होकर जमीनी स्तर पर अमल नहीं होता, तब तक समाज का संघर्ष जारी रहेगा. राज्य के पशुपालक और मेंढपाल समाज के लिए इस निर्णय को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. अब समाज की नजर सरकार द्वारा किए गए वादों के शीघ्र क्रियान्वयन पर टिकी हुई है.

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