50 करोड की जमीन 960 रुपए में हडपने का प्रयास विफल

सोमेश्वर संस्थान का मामला

* महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने निभाई महती भूमिका
* उपविभागीय अधिकारी ने रद्द किया अवैध आदेश
* पत्रकार परिषद में श्रीकांत पिसोलकर और अन्य का दावा
अमरावती/दि.28 – शहर की प्रतिष्ठित भाजीबाजार स्थित श्री सोमेश्वर महादेव संस्थान की 50 करोड की 12 एकड खेती केवल 960 रुपए में कब्जाने का प्रयास महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की दखल और कानूनन भूमिका के कारण विफल हो जाने का दावा आज दोपहर आयोजित पत्रकार परिषद में महासंघ के विदर्भ संयोजक श्रीकांत पिसोलकर एवं कोर कमिटी पदाधिकारी अनूप जायसवाल ने किया. इस समय मंदिर महासंघ के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे. उन्होंने दावा किया कि, तत्कालीन तहसीलदार विजय लोखंडे द्वारा 26 सितंबर 2024 को दिया गया गैरकानूनी आदेश एसडीओ अमरावती ने पूर्ण रुप से खारिज कर दिया है. मौके की जमीन कुल कायदा अंतर्गत कब्जेदार सुमन रामरतन कोठार को मात्र 960 रुपए में खरीदी दिए जाने का आरोप भी किया गया.
मंदिर महासंघ ने आरोप लगाया कि, तत्कालीन तहसीलदार ने मूल सुनवाई दौरा किसी प्रकार के साक्ष-पुरावे दर्ज नहीं किए. क्रॉस एक्झामिनेशन नहीं किया, अपील के लिए समय रहने पर भी हडबडी में खरीदी प्रमाणपत्र जारी कर दिया. जबकि धर्मदाय आयुक्त की अनुमति इस मामले में नहीं ली गई थी. महासंघ के राज्य पदाधिकारी अनूप जायसवाल के ध्यान में आते ही उन्होंने विक्री आदेश का कडा विरोध दर्ज कराया. संस्थान की ओर से रवींद्र डहाके, अमोल इंगोले और अन्य ट्रस्टीयों ने उपविभागीय अधिकारी के पास अपील दायर की.
मंदिर महासंघ का दावा रहा कि, बेश कीमती खेती महापालिका हद में आने से उसकी मार्केट वैल्यू आज 50 करोड के करीब है. सुनवाई दौरान बिल्डर लॉबी अत्यंत सक्रिय देखी गई. किंतु महासंघ के राष्ट्रीय संगठक सुनील घनवट ने इस प्रकरण में लगातार फालोअप लेकर प्रशासन पर नैतिक दबाव निर्माण किया. जिससे बिल्डर लॉबी के मनसूबे धरे रह गए. इस मामले में संस्थान की ओर से एड. रमण जायसवाल और कब्जेदार सुमन कोठार की ओर से एड. ऋषि छाबडा ने पक्ष रखा. पत्रकार परिषद में अशोक सोनवाल, सचिन वैद्य, हरीभाऊ नानवटकर, सूरज वानखडे, मनोज वानखडे और अन्य मौजूद थे.
* नहीं जाएगी एक इंच भी जमीन
महासंघ के राष्ट्रीय संगठक सुनील घनवट ने दावा किया कि, देवस्थान और मंदिरों की जमीन कब्जाने का मनसूबा रखनेवाले बिल्डर लॉबी तथा गैरकानूनी काम करनेवाले अधिकारियों को यह कडा तमाचा है. मंदिरों की एक इंच भी जमीन हडपने नहीं दी जाएगी. उन्होंने एसडीओ के निर्णय से संपूर्ण परिसर में आनंद का वातावरण होने का दावा किया.

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