अब एमएचटी-सीईटी में भी घोटाले का आरोप?

शिक्षक के वीडियो से मचा विवाद

* सीईटी सेल ने आरोपों को किया खारिज
मुंबई/दि.28 – देशभर में चर्चित नीट पेपर लीक विवाद और उसके बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अब महाराष्ट्र की एमएचटी-सीईटी 2026 परीक्षा भी विवादों में आ गई है. कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) और अन्य विपक्षी नेताओं ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है. वहीं राज्य के कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) सेल ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार बताया है.
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने सबसे पहले आरोप लगाया कि बारहवीं बोर्ड परीक्षा में केवल 35 से 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले कुछ विद्यार्थियों को एमएचटी-सीईटी में 90 से 100 पर्सेंटाइल तक कैसे मिले. उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.
इसके बाद विधायक रोहित पवार ने भी कहा कि यदि एमएचटी-सीईटी में भी पेपर लीक या किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने दावा किया कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं, इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है.
इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता महादेव बालगुडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ’एक्स’ पर एक शिक्षक के यूट्यूब वीडियो की लिंक साझा करते हुए दावा किया कि उसमें एमएचटी-सीईटी में कथित अनियमितताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि जब शिक्षक और अन्य गैर-राजनीतिक लोग तथ्यों के साथ सवाल उठाते हैं तो उनकी बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. वायरल वीडियो में कुछ छात्रों को कथित रूप से पैसों के बल पर अधिक अंक मिलने, मेरिट सूची में गड़बड़ी तथा परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं. हालांकि इन दावों की अब तक किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है.
* सीईटी सेल ने किया स्पष्ट खंडन
विवाद बढ़ने के बाद सीईटी सेल के आयुक्त दिलीप सरदेसाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे सभी आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कहा कि एमएचटी-सीईटी परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और निर्धारित नियमों के अनुसार आयोजित की गई है. सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे पेपर लीक और परिणामों में गड़बड़ी संबंधी आरोपों में कोई तथ्य नहीं है. उन्होंने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की कि वे अपूर्ण या भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा रखें.

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