एकही परिवार के पांच लोगों के जात प्रमाणपत्र रद्द
हाईकोर्ट के आदेश पश्चात कार्रवाई

* मनुरवार, मुनुरवार और मुनुरवाड ऐसे उल्लेख रहे दस्तावेजों पर
* जांच-पडताल के बाद एक्शन
अमरावती/दि.29 – बोगस कागजात के आधार पर अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत मान्यताप्राप्त जाति के नाम सदृष्य होने का गैरकानूनी फायदा लेनेवाले लोगों को जाति जांच समिति ने धक्का दिया है. अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जांच समिति किनवट ने नांदेड जिले के बिलोली तहसील अंतर्गत सगरोली में एक ही परिवार के पांच लोगों के कास्ट सर्टीफिकेट रद्द किए. 3 जुलाई को आदेश से रद्द किए गए प्रमाणपत्र में मन्नेरवारलु जनजाति प्रमाणपत्र का उल्लेख रहने की जानकारी मिली है.
इस एक्शन से बोगस काम करनेवालों में खलबली मची है. दरअसल यह कार्रवाई बंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के आदेश पश्चात की गई. केतकी भुमन्ना मुत्येपोड (प्राचार्य, सायन्स कॉलेज, नांदेड), भुमय्या गिरमाजी मृत्येपोड (गटशिक्षणाधिकारी, पंचायत समिति देगलूर, जि. नांदेड), सविता सायन्ना मृत्येपोड (गटशिक्षणाधिकारी, पंचायत समिति भोर, जि. पुणे), संगीता रमेश मृत्येपोड और गोदावरी गिरमाजी मृत्येपोड (प्राचार्य, डॉ. राजाभाऊ खोब्रागडे अध्यापक विद्यालय, ब्रह्मपुरी, जि. चंद्रपुर) का समावेश है.
* यह किया कारनामा
पांचों लोगों के जाति प्रमाणपत्रों को जांच समिति ने अवैध घोषित किया है. जाति के कॉलम में ‘न’ अक्षर के पास अलग स्याही से दूसरा ‘न’ लिखकर उस पर मात्रा दी गई थी. उसी प्रकार अलग स्याही से ‘रवलू’ यह अक्षर गहरा किया गया था. न और लू इन अक्षरों में जाति कॉलम में फेरलेखन कर बनाया गया. यह पाया गया, सुनियोजित रुप से संबंधित शाला के अधिकृत रिकॉर्ड में भी मूल जाति के पंजीयन में खोडतोड की गई. झूठे स्कूल प्रमाणपत्र तैयार किए गए. इसके पहले इसी परिवार के कुछ सदस्यों द्वारा मूल जाति के पंजीयन में अनियमित फेरबदल की वस्तुस्थिति छिपाकर समिति को गुमराह किया गया.
* इनके बने प्रमाणपत्र
इसी आधार पर परशुराम मृत्येपोड (22 नवंबर 2001), संजय मृत्येपोड (3 मई 2006), शंकर मृत्येपोड (19 जुलाई 2010) और हनमलु मृत्येपोड (8 जुलाई 2011) ने जाति वैधता प्रमाणपत्र प्राप्त किए थे, ऐसी जानकारी अब समिति के अंतिम आदेश से सामने आई है.
* क्या पाया गया जांच में
उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पुलिस दक्षता पथक ने सघन जांच की. जांच में दस्तावेजों के अतिरिक्त खून के रिश्ते के व्यक्तियों के मूल शालेय प्रवेश और लिविंग प्रमाणपत्रों में जाति के ‘मनुरवार, मुनुरवार और मुनुरवाड ऐसे उल्लेख’ पाए गए.





