बाल संस्कार शिविर में बच्चों ने सीखे संस्कार, योग और गीता का ज्ञान
गीता परिवार एवं रोटरी क्लब ऑफ मिडटाऊन अमरावती के संयुक्त उपक्रम का हुआ भव्य समापन

* 10 दिनों तक चला संस्कारों का महाकुंभ, बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीता सभी का दिल
अमरावती/दि.19-आधुनिक युग में जहां बच्चों का झुकाव तेजी से मोबाइल और डिजिटल दुनिया की ओर बढ़ रहा है, वहीं उन्हें भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक ज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित 10 दिवसीय बाल संस्कार शिविर का उत्साहपूर्ण वातावरण में सफल समापन हुआ. गीता परिवार एवं रोटरी क्लब ऑफ मिडटाऊन अमरावती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर ने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार संवर्धन और सांस्कृतिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 7 जून से 16 जून तक रोटरी हॉल (केमिस्ट भवन), जाफरजीन कंपाउंड, होटल आदर्श के समीप आयोजित इस शिविर में 4 से 13 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया.
* भारतीय संस्कृति से जोड़ने का दिया संदेश
शिविर का शुभारंभ पार्षद पूजा अग्रवाल, रोटरी मिडटाउन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष तरुण शर्मा, रोटरी क्लब ऑफ मिडटाऊन अमरावती के अध्यक्ष आशीष अरोरा, पार्षद ललिता रतावा एवं कौशिक अग्रवाल की उपस्थिति में हुआ. अतिथियों ने बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों से जुड़े रहने का संदेश देते हुए कहा कि संस्कारित पीढ़ी ही राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य तय करती है.
* योग, गीता, कराटे और रचनात्मक गतिविधियों का मिला प्रशिक्षण
प्रतिदिन सुबह 8 से 11 बजे तक आयोजित होने वाले शिविर में बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए विविध गतिविधियों का समावेश किया गया. बच्चों को योग एवं प्राणायाम का प्रशिक्षण देकर स्वस्थ जीवनशैली का महत्व बताया गया. इसके साथ ही बोधप्रद कहानियों, नैतिक शिक्षा, देशभक्ति गीतों, भजनों, मेमोरी गेम्स, नृत्य, कराटे, क्राफ्ट तथा विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया. शिविर की विशेष उपलब्धि यह रही कि बच्चों को श्रीमद्भगवद्गीता के 12वें अध्याय का शुद्ध संस्कृत उच्चारण के साथ अध्ययन कराया गया. वहीं सरिता केडिया ने बच्चों को सचित्र हनुमान चालीसा का ज्ञान देकर धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से परिचित कराया.
* विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन
शिविर के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने बच्चों का मार्गदर्शन किया. उन्होंने सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला. बच्चों को जीवन में लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन और नैतिक आचरण के महत्व की भी जानकारी दी गई. आयोजकों द्वारा प्रतिदिन बच्चों के लिए स्वादिष्ट मीठे एवं नमकीन नाश्ते की व्यवस्था की गई, जिससे बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया.
* ’पंढरीची वारी’ बनी आकर्षण का केंद्र
समापन समारोह में बच्चों ने शिविर के दौरान सीखी गई विभिन्न गतिविधियों का शानदार प्रदर्शन किया. बच्चों ने गीता के श्लोक, भजन, योग प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा प्रेरणादायी प्रस्तुतियों से उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत पंढरीची वारी विषय पर आधारित नृत्य प्रस्तुति रही. इस प्रस्तुति में महाराष्ट्र की संत परंपरा, वारकरी संस्कृति और भक्ति भावना की सुंदर झलक दिखाई दी. उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बच्चों का उत्साहवर्धन किया.
* अतिथियों ने की आयोजन की सराहना
समापन समारोह में महापौर श्रीचंद तेजवानी, नगरसेविका ललिता रतवा, रोटरी क्लब ऑफ मिडटाऊन अमरावती के अध्यक्ष आशीष अरोरा, सचिव डॉ. मनमोहन सोनी, रोटरी ट्रस्ट के अध्यक्ष मुकेश गगलानी तथा रोटरी मिडटाउन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष तरुण शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे. अतिथियों ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता और भारतीय संस्कृति का ज्ञान देना भी उतना ही आवश्यक है. ऐसे शिविर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं.
* बच्चों को दिए गए स्मृति-चिह्न
शिविर के समापन पर सभी बच्चों को स्मृति-चिह्न स्वरूप स्कार्फ, नोटबुक एवं स्टील का टिफिन प्रदान किया गया. साथ ही बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए आइसक्रीम वितरित की गई. उपहार प्राप्त कर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे.
* आयोजन को सफल बनाने में रहा अनेक कार्यकर्ताओं का योगदान
शिविर के सफल संचालन में उर्मिला कलंत्री, उमा व्यास, हंसा मुंधड़ा, सुनीता लड्दा एवं अर्चना देवड़िया का विशेष योगदान रहा. वहीं स्वयंसेवक खुशाल पंचाल, कार्तिकी गुप्ता, मनस्वी व्यास, दर्श पटेल एवं देविका साहू ने पूरे शिविर के दौरान बच्चों का मार्गदर्शन कर आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
* अभिभावकों ने जताया संतोष
शिविर में भाग लेने वाले बच्चों के अभिभावकों ने आयोजन की मुक्तकंठ से सराहना की. उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों से जोड़ने वाले ऐसे शिविर समय की आवश्यकता हैं. शिविर ने बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक चेतना तथा भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. बाल संस्कार शिविर ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा, संस्कार और प्रेरणा मिले तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी आदर्श नागरिक बन सकते हैं.





