नागरिकों की प्यास ज्यादा महत्वपूर्ण, पीने के लिए पानी आरक्षित
बांधों में बाष्पीकरण के चलते जलसंग्रहण बेहद कम

* भीषण गर्मी व मान्सून में विलंब से पैदा हुई किल्लतवाली स्थिति
अमरावती /दि.30- इस बार अलनिनो के प्रभाव के वजह से बारीश का प्रमाण बडे पैमाने पर घटने की संभावना मौसम विभाग द्वारा व्यक्त की गई है. मौसम में होनेवाले इस बदलाव का सीधा परिणाम जिले के बांधों में उपलब्ध रहनेवाले जलसंग्रह पर होता दिखाई दे रहा है. इस बार भीषण गर्मी के मौसम दौरान तेजी के साथ हुए बाष्पीकरण तथा मान्सून में हुए विलंब के चलते अलग-अलग स्थानों पर स्थित बांधों में जलसंग्रहण तेजी के साथ घटा है. ऐसे में सरकार भी लोगों की प्यास को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हुए 31 अगस्त तक सभी बांधों में उपलब्ध जलसंग्रहण को केवल पिने के पानी हेतु आरक्षित रखने का आदेश जारी किया.
बता दे कि अलनिनो का परिणाम पूरे विश्व के मौसम पर होता है. विशेष रूप से इसका परिणाम सीधे मान्सून पर दिखाई देता है और भारत में मान्सून के अनियमित रहने की पूरी संभावना भी बन जाती है. इस बार भी अलनिनो के प्रभाव की वजह से मौसम विज्ञानियों ने औसत से बहुत कम बारीश होने का अनुमान जताया. ऐसे में यदि बारीश कम होती है तो बांधों में जलसंग्रहण भी काफी कम रहने की पूरी संभावना है.
* इन प्रकल्पों पर निर्भर किसान होंगे प्रभावित
अप्पर वर्धा, चंद्रभागा, पूर्णा व सापन जैसे प्रकल्पों पर संबंधित क्षेत्रों के किसान सिंचन हेतु पूरी तरह से निर्भर रहते है. इन प्रकल्पों के जरिए जलापूर्ति योजना भी चलाई जाती है. परंतु इन सभी प्रकल्पों में अब जलस्तर काफी निचे जा चुका है. ऐसे में इन प्रकल्पों का पानी सिंचाई हेतु छोडने की बजाए जलापूर्ति के लिए आरक्षित कर दिया गया है. वहीं यदि मान्सून में विलंब होता है तो इन प्रकल्पों से सिंचाई हेतु पानी छोडने में भी अच्छा खासा विलंब होगा. इसके चलते संबंधित क्षेत्र के किसानों को काफी हद तक तकलिफों का सामना करना पडेगा.
* केवल पेयजल हेतु आरक्षित रहेगा पानी के तौर पर प्रयुक्त करने हेतु आरक्षित रखा गया है तथा अब किसी भी स्थिति में सिंचाई के लिए पानी नहीं छोडा जाएगा. ताकि पानी के उपलब्ध संग्रहण को लोगों की प्यास बुझाने के लिहाज से बचाकर रखा जाए.
* जलसंग्रहण में काफी कमी
सरकारी आदेशानुसार सभी छोटे-बडे व मध्यम प्रकल्पों में उपलब्ध पानी को अब केवल पेयजल
जिले के बडे व मध्यम प्रकल्पों पर कार्यरत जलापूर्ति योजनाओं के जरीए अधिकांश तहसीलों में पिने हेतु पानी की आपूर्ति हो रही है. परंतु मार्च माह से तापमान में हुई वृध्दि और बाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज हो जाने के चलते जलसंग्रहण में तेजी के साथ कमी आयी है.
* अवैध दोहन को रोखा जाएगा
बांधों सहित भुगर्भ से पानी के अवैध दोहन को रोकने हेतु राजस्व, पुलिस व जलसंपदा विभाग के अधिकारियों के संयुक्त पथक के मार्फत नियमित जांच व गश्त करने के निर्देश सरकार की ओर से दिए गए है. जिसके चलते अनधिकृत दोहन को रोकने हेतु प्रशासन द्वारा कठोर भूमिका अपनाई जा रही है. जिसके तहत बांध परिसर एवं जलसंग्रहण क्षेत्र में अवैध मोटर व पाईपलाईन पाए जाने पर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी.
* हर सप्ताह रिपोर्ट देने का आदेश
बांधों में उपलब्ध जलसंग्रहण, पेयजल हेतु उपलब्ध पानी, सिंचाई कायर्र् स्थगित करने की कार्रवाई व पानी के गैरकानुनी दोहन को रोकने हेतु की गई कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट प्रति सप्ताह सरकार के सामने प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए है.
* बांधों में 50 फिसद से अधिक जलसंग्रहण
जिले में मुख्य प्रकल्प अप्पर वर्धा व मध्यम प्रकल्प चंद्रभागा, शहानुर, पुर्णा व सापन सहित 30 लघु प्रकल्प है. जिसमें से लघु प्रकल्प लगभग पूरी तरह से सूख गए है. वहीं शेष प्रकल्पों में औसत 50 फिसद के आसपास जलसंग्रहण है.
* बांधों में जलसंग्रहण की स्थिति
अप्पर वर्धा 43.81 फीसद
चंद्रभागा 75.54 फीसद
पूर्णा 59.88 फीसद
सापन 39.84 फीसद
शहानुर 34.10 फीसद





