‘कोणार्क’ पर 300 करोड़ रुपये जुर्माने का दावा भ्रामक!

मनपा रिकॉर्ड में अब तक केवल सवा दो करोड़ रुपये का दंड

* तथ्य सामने आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म
* मार्च 2026 तक 71.39 लाख तथा उसके बाद करीब 1.50 करोड़ रुपये का लगाया गया दंड
* ठेके की कुल लागत ही लगभग 300 करोड़ के आसपास, लागत से अधिक जुर्माने के दावे पर उठ रहे सवाल
अमरावती/दि.4 – अमरावती महानगरपालिका के सफाई ठेकेदार कोणार्क इंफ्रा को लेकर शहर में एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है. इस बार विवाद का केंद्र कंपनी पर लगाए गए दंड की राशि है. पिछले कुछ दिनों से विभिन्न माध्यमों से यह दावा किया जा रहा है कि मनपा ने कोणार्क कंपनी पर सैकड़ों करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. इतना ही नहीं, एक पूर्व पार्षद द्वारा सार्वजनिक रूप से कंपनी पर करीब 300 करोड़ रुपये का दंड लगाए जाने का दावा किए जाने से इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया है. हालांकि मनपा के उपलब्ध दस्तावेजों, प्रशासनिक रिकॉर्ड और अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह दावा वास्तविक आंकड़ों से काफी अलग दिखाई दे रहा है.
मनपा सूत्रों के अनुसार कोणार्क इंफ्रा पर अब तक कुल मिलाकर करीब 2.21 करोड़ रुपये (सवा दो करोड़ रुपये के आसपास) का दंड लगाया गया है. इनमें मार्च 2026 तक 71.39 लाख रुपये तथा उसके बाद विभिन्न कार्यों में पाई गई त्रुटियों, लापरवाही और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के मामलों में लगभग 1.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त दंड शामिल है. इस प्रकार कुल दंड राशि करीब 2.21 करोड़ रुपये तक पहुंचती है.
बता दे कि, कोणार्क इंफ्रा को अमरावती शहर की संपूर्ण सफाई व्यवस्था का ठेका लगभग 40 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की दर से सात वर्षों के लिए प्रदान किया गया है. इस हिसाब से पूरे ठेके का मूल्य लगभग 280 करोड़ रुपये बैठता है. ऐसे में ठेके की कुल लागत से भी अधिक यानी 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का दंड लगाए जाने का दावा प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से कई सवाल खड़े कर रहा है. मनपा प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी सेवा अनुबंध में दंड की व्यवस्था होती है, लेकिन दंड की गणना अनुबंध में निर्धारित शर्तों, कार्य की गुणवत्ता और भुगतान योग्य राशि के आधार पर की जाती है. ऐसे में ठेके की कुल अनुमानित लागत से अधिक दंड लगाए जाने की बात बिना किसी दस्तावेजी आधार के समझ से परे प्रतीत होती है.
* दिसंबर 2025 से लगातार विवादों में है कोणार्क
गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2025 से अमरावती शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभालने के बाद से ही कोणार्क इंफ्रा लगातार विवादों के घेरे में रही है. शहर के विभिन्न हिस्सों से कचरा संकलन, डोर-टू-डोर कलेक्शन, सड़क सफाई, नालियों की सफाई, कचरा परिवहन तथा अन्य स्वच्छता सेवाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं. कई बार शहर के प्रमुख मार्गों और बाजार क्षेत्रों में कचरे के ढेर, समय पर सफाई न होने, वाहनों की कमी तथा कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर नागरिकों ने नाराजगी जताई. इन शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने कंपनी को नोटिस जारी करने के साथ-साथ आर्थिक दंड भी लगाया.
* आमसभा में कई बार गूंजा कोणार्क का मुद्दा
कोणार्क कंपनी का कामकाज केवल प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी लगातार चर्चा का विषय बना रहा है. मनपा की आमसभा में कई बार कंपनी के खिलाफ जोरदार हंगामा हो चुका है. विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि कंपनी के खिलाफ आवाज उठाने वालों में केवल विपक्षी पार्षद ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे हैं. कई पार्षदों ने खुले तौर पर कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अनुबंध की समीक्षा करने, दंडात्मक कार्रवाई बढ़ाने तथा आवश्यक होने पर ठेका रद्द करने तक की मांग की थी. शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली.

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* स्वच्छता अभ्यास गट ने भी उठाए थे गंभीर प्रश्न
कोणार्क को दिया गया सफाई ठेका शुरू से ही विभिन्न कारणों से चर्चा में रहा है. मनपा की आमसभा दौरान गठित स्वच्छता अभ्यास गट ने भी ठेका प्रक्रिया और करार की शर्तों को लेकर कई गंभीर प्रश्न उठाए थे. अभ्यास गट का दावा था कि निविदा दस्तावेजों में उल्लेखित कुछ शर्तों और बाद में किए गए ठेका करार के कुछ प्रावधानों में अंतर दिखाई देता है. इस मुद्दे को लेकर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा गया था तथा करार की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए थे. उस समय यह विषय शहर के नागरिक संगठनों और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का केंद्र बना था. खासबात यह भी रही कि, अलग-अलग गलतियों व त्रृृटियों के लिए स्वच्छता अभ्यास गट ने कोणार्क कंपनी पर जुर्माना लगाने की सिफरिश मनपा प्रशासन से की थी. जिसके आधार पर सैकडों प्रावधानों के तहत मनपा प्रशासन द्वारा कोणार्क कंपनी के खिलाफ जुर्माना लगाया गया था तथा मार्च माह के बाद कोणार्क कंपनी पर लगाए गए जुर्माने की रकम करीब 1.50 करोड रूपये के आसपास थी. जबकि मार्च माह से पहले मनपा प्रशासन द्वारा कोणार्क कंपनी पर 71 लाख 39 हजार रूपये का जुर्माना लगाया गया था.

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* दंड लगने के साथ ही कोणार्क को भुगतान भी हो रहा
कोणार्क कंपनी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भुगतान और बकाया राशि का मुद्दा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार मार्च 2026 तक मनपा ने कंपनी को पार्ट-ए के कार्यों के लिए लगभग 1.80 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. वहीं कंपनी के विभिन्न कार्यों के एवज में अभी भी मनपा की ओर लगभग 18 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया बताया जा रहा है. इससे स्पष्ट होता है कि एक ओर कंपनी के कार्यों में कमियां पाए जाने पर दंड लगाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अनुबंध के तहत किए गए कार्यों का भुगतान भी प्रक्रिया अनुसार किया जा रहा है. ऐसे में दंड और भुगतान दोनों प्रक्रियाएं समानांतर रूप से चल रही हैं.

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* राजनीतिक बयानबाजी या तथ्यात्मक चर्चा?
मनपा प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि कोणार्क कंपनी के कामकाज पर सवाल उठाना पूरी तरह उचित हो सकता है, क्योंकि सफाई जैसी मूलभूत सेवा सीधे नागरिकों से जुड़ी हुई है. लेकिन किसी भी मुद्दे पर चर्चा तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होना आवश्यक है. उनका कहना है कि यदि वास्तविक दंड राशि करीब सवा दो करोड़ रुपये है, तो 300 करोड़ रुपये जुर्माने जैसे दावों से आम नागरिकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है. इससे वास्तविक मुद्दों पर होने वाली चर्चा भी प्रभावित होती है.
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े यही दर्शाते हैं कि कोणार्क इंफ्रा पर अब तक कुल करीब 2.21 करोड़ रुपये का दंड लगाया गया है. वहीं कंपनी पर 300 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने संबंधी दावों की पुष्टि किसी भी अधिकृत दस्तावेज या प्रशासनिक रिकॉर्ड से नहीं हो रही है. ऐसे में शहर के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सफाई ठेके को लेकर वास्तविक तथ्यों के बजाय भ्रामक आंकड़े सामने लाकर जनमत प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की जा रही.

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* शहर की सफाई व्यवस्था पर बनी हुई है नजर
इस पूरे प्रकरण के बीच मनपा प्रशासन की ओर से शहर की सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी जारी रहने की बात कही जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि अनुबंध में निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण, रिपोर्टिंग, नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया लगातार जारी है. जहां भी कार्य में कमी पाई जाती है, वहां संबंधित प्रावधानों के तहत आर्थिक दंड लगाया जाता है.

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