अमरावती में 20 हजार से अधिक मरीजों का नहीं हुआ उपचार

जिले की एक हजार से अधिक ओपीडी बंद

* आईएमए की 24 घंटे की अचानक हडताल
* दो से चार हजार आपात रुग्णों का किया गया उपचार
* होमिओपैथ चिकित्सक को अलाउ करने का कडा विरोध
अमरावती/दि.4 – इंडियन मेडिकल असो. (आईएमए) द्वारा अचानक शुरु की गई 24 घंटे की हडताल के कारण आज शहर और जिले के एक हजार से अधिक क्लिनीक व खासकर ओपीडी बंद रहने का दावा किया गया है. 20 हजार से अधिक रुग्णों को बगैर उपचार के लौटना पडा. हालांकि आईएमए ने 2 से 4 हजार के करीब रुग्णों की आपात सेवा, उपचार किए जाने का दावा दोपहर को अमरावती मंडल से चर्चा में किया था. तथापि आयोजित 24 घंटे ओपीडी बंद आंदोलन को पूरा समर्थन, प्रतिसाद मिलने का दावा भी उन्होंने किया. दोपहर बाद वे जिला प्रशासन को अपनी मांगों का निवेदन सौंपने जाएंगे.
अमरावती का आंदोलन अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे, सचिव डॉ. विक्रम वानखडे, कोषाध्यक्ष डॉ. रोहन बोबडे, पूर्व अध्यक्ष डॉ. अलका कुथे, अगले अध्यक्ष डॉ. संदीप दानखडे, उपाध्यक्ष डॉ. विक्रम देशमुख, डॉ. तृप्ति दानखडे, डॉ. भूपेश भोंड, सहसचिव डॉ. आशीष डगवार, डॉ. ऋतिका लोखंडे, डॉ. सौरभ लांडे, डॉ. मृण्मयी बोबडे, डॉ. विजय कुथे, डॉ. राधा सावदेकर, डॉ. संगीता सालुंके, डॉ. गौरव गोहाड, डॉ. जयंत पांढरीकर, डॉ. सोहेल बारी, डॉ. सोनाली शिरभाते, डॉ. सीमा आडवानी, डॉ. तृप्ति जावदे, डॉ. नितिन जायसवाल, डॉ. नीलेश पाचकवडे, डॉ. अंशू चांडक, डॉ. अमित डफले, डॉ. अपूर्वा मुंधडा, डॉ. प्रणिक काकडे, डॉ. हिमानी राठोड, डॉ. अक्षय चांदुरकर सहित सैकडों चिकित्सकों का समावेश रहा.
पीआरओ डॉ. चांदुरकर ने बताया कि, जिले की सभी तहसीलों से बढिया प्रतिसाद मिला है. अपने अधिकारों की लडाई में चिकित्सक एकजुट है. केवल आपात स्थिति सेवा शुरु रखी गई. जिसमें लगभग दो हजार गंभीर रुग्णों का उपचार तत्काल किया गया. चिकित्सकों ने अपनी मानवीय संवेदनाएं हडताल में भी पूरी तरह जागृत रखी. जिसकी बदौलत आईएमए की हडताल के कारण जिले में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक किसी गंभीर मरीज की जान नहीं गई.
उल्लेखनीय है कि, होमिओपैथी की डिग्री प्राप्त करनेवाले डॉक्टर्स को महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विद्यापीठ के फॉर्माकोलॉजी पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर प्रमाणपत्र दिए जाने का विरोध आईएमए ने किया है. पूरे राज्य में एक लाख से अधिक चिकित्सक की ओपीडी आज पूरे दिन बंद रहने का दावा संगठन ने किया. कल से आंदोलन में निवासी डॉक्टर अर्थात मार्ड भी कूदने की संभावना बताई जा रही है. जिसके बाद कई सरकारी, निमसरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा चरमरा सकती है.

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