महाराष्ट्र को सूखा ग्रस्त घोषित करें

विभागीय आयुक्तालय पर धमके सैकडों किसान

* रविकांत तुपकर का नेतृत्व
* पुलिस से हुई बाचाबाची
* बैरिकेटिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम
अमरावती/दि.8- महाराष्ट्र राज्य वस्त्र निगम के अध्यक्ष रविकांत तुपकर ने अमरावती संभाग सहित संपूर्ण प्रदेश को अवर्षणग्रस्त घोषित करने की मांग आज यहां विभागीय आयुक्त कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए की. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम तीन पेज का विस्तृत निवेदन प्रशासन को सौंपा. आंदोलन दौरान तुपकर की पुलिस से बाचाबाची होने के समाचार है. उसी प्रकार इन पंक्तियों के लिखे जाने तक आंदोलन शुरु था. सैकडों किसान उमडे थे. रविकांत तुपकर को राज्य मंत्री की श्रेणी उपलब्ध है. ऐसे में पुलिस और प्रशासन ने आंदोलन को सावधानी से हैंडल किया. सैकडों की संख्या में कृषक उमडे थे. उन्होंने हर हाल में सूखा घोषित कर विविध रियायतें किसानों के वास्ते मांगी.
रविकांत तुपकर के साथ अनेक किसान नेता मौजूद थे. उन्होंने हाथों में सोयाबीन, कपास, तुअर के सूख चुके पौधे लाकर प्रदर्शन किया. आयुक्त कार्यालय पर बैरिकेटिंग की गई थी. तुपकर ने अनेक मांगे रखते हुए बगैर किसी शर्त के सूखा घोषित करने, किसानों को प्रति हेक्टेयर एक-एक लाख रुपए देने और किसानों से धोखा करनेवाली बीज कंपनियों पर उम्रकैद की सजा का प्रावधान करने की मांग रखी. मोर्चे के बैरिकेट से अडाया गया था. ऐसे में आंदोलनकारियों ने पटाखे फोडकर प्रदर्शन किया.
* किसान मृत्यु के द्वार पर, भारी बंदोबस्त
राज्य मंत्री श्रेणी प्राप्त किसान नेता रविकांत तुपकर और उनके समर्थकों ने अपनी शर्ट उतार ली थी. उनका कहना रहा कि, बारिश के दगा दे देने से किसान मृत्यु के द्वार पर जा पहुंचे हैं. अनेक आत्महत्याएं हो चुकी है. किसान आत्महत्या रोकने के वास्ते सरकार को तत्काल सहायता घोषित करनी चाहिए. उन्होंने नियमित लोन अदा करनेवाले किसानों को दो लाख का विशेष अनुदान देने का मुद्दा उपस्थित किया. तुपकर ने मांगे पूर्ण न होने पर और भी तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी. तुपकर के तेवरों को देखते हुए भारी पुलिस बंदोबस्त, दंगारोधी पथक मुस्तैद किया गया था. सैकडों की संख्या में कृषक होने से विभागीय आयुक्त कार्यालय पर प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई थी.
* तुपकर की मांगे
– बुलढाणा जिले सहित बारिश के अभाव में गंभीर परिस्थिति बनी है. सभी जिलों में सूखा घोषित किया जाए.
– राजस्व और कृषि विभाग द्वारा तत्काल फसलों का पंचनामा कर किसानों को प्रति हेक्टेयर शासकीय मदद घोषित की जाए.
– किसानों के सभी खेती संबंधी कर्ज तत्काल स्थगित किए जाए.
– किसानों को बिजली में रियायत देकर खेती-बाडी के लिए नियमित बिजली सप्लाई दी जाए.
– फसल बीमा की क्षतिपूर्ति तुरंत मंजूर और वितरित की जाए.
– मवेशी के लिए चारा छावनी और पेयजल का प्रबंध किया जाए.
– फसलों को पानी उपलब्ध करने सिंचाई का नियोजन किया जाए.
– सूखा ग्रस्त किसानों को रोजगार देने मनरेगा के काम बडे प्रमाण में शुरु किए जाए.
– अगले सीजन के लिए निशुल्क अथवा अनुदानित बीज, खाद और यूरिया उपलब्ध कराया जाए.
– विशेष पैकेज घोषित किया जाए, ताकि किसान आत्महत्या रोकी जा सके.
* सोयाबीन, कपास सभी निकले हाथ से
सीएम के नाम दिए गए निवेदन में रविकांत तुपकर ने दावा किया कि, बारिश के घाटे की वजह से पश्चिम विदर्भ में बुलढाणा समेत सोयाबीन, कपास, उडद, मूंग, तुअर, मक्का सहित फसले सूख गई है. जिससे बडा संकट कृषकों के सामने हो गया है.

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