लाखों खर्च के बावजूद स्वच्छता व्यवस्था बदहाल

स्वास्थ्य अधिकारी मिलिंद वानखड़े पर ठेकेदार को कथित संरक्षण देने के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

अंजनगांव सुर्जी/दि.13 – अंजनगांव सुर्जी नगर परिषद की ओर से शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई इलाकों में गंदगी और अस्वच्छता का आलम बना हुआ है. नगर परिषद के पास शासकीय स्तर पर करीब 65 कर्मचारी हैं, जबकि ठेकेदार के माध्यम से करीब 90 कर्मचारी कार्यरत बताए जाते हैं. इसके अलावा 13 घंटागाड़ी वाहन, दोपहर के समय 4 घंटागाड़ियां और 5 ट्रैक्टर उपलब्ध होने के बावजूद सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
स्वच्छता कार्यों की निगरानी के लिए सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं. उनकी जिम्मेदारी विभिन्न क्षेत्रों में नियमित सफाई हो रही है या नहीं, काम अधूरा तो नहीं है और इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना है. हालांकि, नागरिकों का आरोप है कि कई स्थानों पर सुपरवाइजर नियमित निरीक्षण नहीं करते, जिसके चलते सफाई कार्य अधूरे रह जाते हैं.

* फॉगिंग और नालियों की सफाई भी प्रभावित
शहर में नियमित फॉगिंग नहीं होने, नालियों की समय पर सफाई न किए जाने तथा उद्यानों में बढ़ी हुई घास की कटाई नहीं होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. अधिकारियों से पूछताछ करने पर अक्सर कर्मचारियों की कमी का हवाला दिया जाता है. ऐसे में नागरिकों का सवाल है कि जब नगर परिषद के पास पर्याप्त कर्मचारी और ठेकेदार के माध्यम से भी बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो फिर शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल क्यों है?

* ठेकेदार से कथित मिलीभगत का आरोप
स्थानीय नागरिकों की ओर से स्वास्थ्य अधिकारी मिलिंद वानखड़े पर संबंधित ठेकेदार को कथित रूप से संरक्षण देने और मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं. आरोप है कि सफाई कार्य संतोषजनक नहीं होने के बावजूद ठेकेदार को हर महीने 12 लाख रुपये से अधिक के बिलों का भुगतान किया जा रहा है. नागरिकों का दावा है कि यही काम कम खर्च में पूरा किया जा सकता है और रिकॉर्ड में काम पूरा दर्शाकर भुगतान किए जाने की भी जांच होनी चाहिए. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी और ठेकेदार का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी.

* निष्पक्ष जांच की मांग
शहर में जगह-जगह गंदगी का साम्राज्य होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है. नागरिकों ने स्वच्छता व्यवस्था की निष्पक्ष जांच, ठेकेदार को किए गए भुगतानों की समीक्षा और सफाई कार्यों के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है. साथ ही लापरवाही या अनियमितता साबित होने पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग भी की गई है.

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