कल से आपात सेवा भी बंद करेंगे डॉक्टर्स

डॉक्टर्स आजाद मैदान पर करेंगे प्रदर्शन

* सीसीएमपी में पंजीयन का तगडा प्रतिरोध
* आईएमए का बडा ऐलान
* 24 घंटे का बंद बढाया आगे, अनिश्चितकालीन हडताल की आशंका
* होमिओपैथी को अ‍ॅलोपैथी प्रैक्टिस अनुमति का विरोध
अमरावती/दि.5 – इंडियन मेडिकल असो. ने होमिओपैथी को फॉर्माकोलॉजी का कोर्स करने पश्चात दी गई अ‍ॅलोपैथी प्रैक्टिस अनुमति का राज्य शासन के निर्णय का कडा प्रतिरोध करते हुए अपने 24 घंटे के काम बंद आंदोलन को आज भी जारी रखा. इतना ही नहीं, तो कल 6 अगस्त से आपात सेवा भी बंद करने की घोषणा आईएमए ने आज कर दी. संगठन के अमरावती पीआरओ डॉ. चांदुरकर ने अमरावती मंडल से बातचीत में बताया कि, अभी दो दिनों में जिले में चिकित्सकों ने हार्टअटैक, लकवा, अपेंडिक्स सहित अनेक बीमारियों के इमर्जन्सी रुग्ण अटेंड और उपचार किए. मोटे तौर पर ऐसे आपात स्थिति के रुग्णों की जिले की संख्या दो से चार हजार होने का दावा आईएमए ने किया है. आईएमए के अमरावती अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे ने बताया कि, कल 6 अगस्त को सुबह 9.30 बजे मुंबई के आजाद मैदान पर राज्य ईकाई द्वारा प्रदर्शन प्रस्तावित है. जिसमें अमरावती से भी पदाधिकारी जा सकते है. अभी निर्णय होना शेष है. जनरल बॉडी मीटिंग में निर्णय हो सकता है.
* एक हजार चिकित्सक सहभागी
डॉ. चांदुरकर ने दावा किया कि, अमरावती में आईएमए की हडताल पूरी तरह सफल रही है. जिले के एक हजार से अधिका आईएमए सभासद हडताल में शामिल है. ओपीडी अर्थात बाह्य रुग्ण विभाग सभी अस्पतालों का बंद है. केवल आपात रुग्णों का उपचार किया जा रहा है. ऐसे रोगियों की संख्या भी हजार में रहने की जानकारी देते हुए आईएमए ने बताया कि, अचानक हृदयविकार, पैरेलिसिस सहित कई प्रकार के रुग्णों को उपचार उपलब्ध किया गया. साथ ही आईएमए ने राज्य संगठन से प्राप्त निर्देशों के अनुसार कल 6 अगस्त से इमर्जन्सी सेवा भी बंद रखने की घोषणा कर दी है. बाहरगांव से आनेवाले रुग्ण और उनके रिश्तेदारों को यह बात नोट कर लेने कहा गया है.
* शाम को मीटिंग, होंगे कडे फैसले
आईएमए अमरावती अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे ने आज शाम कैम्प रोड स्थित आईएमए सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आहूत की है. जिसके अनुसार राज्य से प्राप्त निर्देशों का पालन होगा. शाम को आईएमए के ताजा निर्देशों का ऐलान किया जाएगा. आंदोलन की आगे की रुपरेखा तय होगी.
* कल से मरीजों की जान खतरे में!
बता दें कि, दो दिनों से निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से सेवाभावी और सरकारी दोनों ही प्रकार के अस्पतालों में मरीजों की भीड बढ गई है. दुर्घटना के शिकार से लेकर सभी प्रकार के मरीज इन अस्पतालों की ओर दौड लगा रहे हैं. जबकि स्थिति कल 6 अगस्त से बिगड सकती है. जब आईएमए आपात सेवा बंद करेगा. जिले में आईएमए के 1100 से अधिक सभासद है. सभी हडताल में सहभागी होने का दावा किया गया है. मंगलवार को आईएमए की ओर से जिला प्रशासन को निवेदन दिया गया था. जिसमें आईएमए ने अपने अधिकारों और भविष्य हेतु एकजुट होकर आंदोलन की राह का ऐलान किया. साथ ही बीएचएमएस-सीसीएमपी पंजीयन पर सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने से यह आंदोलन किए जाने की बात कही गई.
बॉक्स/फोटो – डॉ. दिनेश वाघाडे
* मरीजों की जान खतरे में पडेगी
अमरावती आईएमए अध्यक्ष डॉ. दिनेश वाघाडे ने स्पष्ट कहा कि, होमिओपैथी के चिकित्सक को एमएमसी की सीसीएमपी में पंजीयन कैसे दिया जा सकता है. इसके कारण भविष्य में रुग्णों को ही खतरा हो सकता है. क्योंकि वे डॉक्टर का पंजीयन नंबर देखकर भरोसा करके उपचार के लिए जाएंगे. जबकि होमिओपैथी के चिकित्सक को अ‍ॅलोपैथिक की जानकारी नहीं होगी, वह ट्रीटमेंट कैसे करेगा? डॉ. वाघाडे ने बहुत स्पष्ट कहा कि, सरकार को अपना निर्णय बदलना ही होगा. दो दिनों में सरकार ने फैसला नहीं बदला, तो राज्यव्यापी बेमुदत अस्पताल बंद और प्रदर्शन भी होंगे. अमरावती में प्रदर्शन संबंधी निर्णय आज शाम तक होने की जानकारी देते हुए आईएमए अध्यक्ष ने कहा कि, प्रोटेस्ट जारी रहेगा.

* पैथी का विरोध नहीं, एमएमसी में पंजीयन गलत
आईएमए की सचिव रह चुकी डॉ. राधा सावदेकर ने कहा कि, राज्य संगठन के निर्णय और आदेशानुरुप अमरावती में डॉक्टर्स का आरपार आंदोलन चल रहा है. आगे की रणनीति आज शाम की मीटिंग में तय होगी. कल मुंबई में आजाद मैदान पर होनेवाले प्रदर्शन में भी अमरावती से अनेक चिकित्सक सहभागी होंगे. डॉ. सावदेकर ने बहुत स्पष्ट कहा कि, सरकार सीसीएमपी कोर्स को एमएमसी अंतर्गत कैसे स्वीकार कर सकती है. पंजीयन कर सकती है. किसी पैथी का विरोध नहीं है. मगर एमएमसी में पंजीयन सरासर गलत है. पैथी मिक्स होनी चाहिए. डॉ. सावदेकर ने अमरावती में आंदोलन पूर्णरुप से सफल बताया और दावा किया कि, डॉक्टर्स संपूर्ण मानवता को जिलाए रखते हुए आंदोलनरत है. कल से इमर्जन्सी सेवा भी बंद की जाएगी.

* 6 वर्ष की पढाई, 6 माह में कैसे संभव?
शहर के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. आशीष डगवार ने कहा कि, बीएचएमएस चिकित्सकों को सरकार ने 6 माह में 52 लेक्चर्स अटेंड कर सीसीएमपी कोर्स का प्रमाणपत्र देकर एमएमसी में पंजीकृत कर अ‍ॅलोपैथी प्रैक्टिस की छूट देनेे का निर्णय किया है. अ‍ॅलोपैथी चिकित्सक 6 वर्ष तक अथक परिश्रम कर डिग्री प्राप्त करते हैं. ऐसे में अ‍ॅलोपैथी प्रैक्टिस का अधिकार कैसे दिया जा सकता है, उसके साइड इफेक्ट और अन्य जानकारी न रहने से मरीज के साथ यह खिलवाड करने जैसा है. डॉ. आशीष डगवार ने सरकार की देहातों में एमबीबीएस चिकित्सक उपलब्ध न होने के बहाने को भी आडेहाथ लिया. उन्होंने कहा कि, सरकार एमबीबीएस चिकित्सकों को नौकरी नहीं दे पा रही. वहीं सरकार ने एक वर्ष का एमबीबीएस का अनुबंध भी रद्द कर दिया है. होमिओपैथी की पढाई करनेवाले को अ‍ॅलोपैथिक दवाई देने का अधिकार देना मरीजों की जान से सरासर खिलवाड होने का आरोप डॉ. डगवार ने किया. उन्होंने कहा कि, पैथी का विरोध नहीं है. मिक्स पैथी नहीं चल सकती. रुग्ण की जान खतरे में पडने की आशंका बढती है.

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