कोर्ट ने बेटे की अंतरिम कस्टडी और भरण-पोषण का दिया आदेश
घरेलू हिंसा पीड़िता को बड़ी राहत

* सुरक्षा अधिकारी की तत्काल कार्रवाई से मिली न्यायिक राहत
* पुलिस की मौजूदगी में मां को सौंपा गया तीन वर्षीय बेटा
दर्यापुर/दि.5 – दर्यापुर तहसील में घरेलू हिंसा से पीड़ित एक महिला को अदालत से बड़ी राहत मिली है. सुरक्षा अधिकारी की तत्काल कार्रवाई के चलते न्यायालय ने पीड़िता को उसके तीन वर्षीय बेटे की अंतरिम कस्टडी तथा भरण-पोषण (मेंटेनेंस) के संबंध में अंतरिम आदेश जारी किया. बाद में पुलिस की मौजूदगी में बच्चे को उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया.
जानकारी के अनुसार, पीड़िता का विवाह कोरोना काल के दौरान हुआ था. विवाह के करीब डेढ़ माह बाद ही उसे दहेज और पैसों की मांग को लेकर मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा. इस बीच उसने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद भी उसके चरित्र पर संदेह कर उसे लगातार परेशान किया जाता रहा. दिवाली के दौरान हुए विवाद के बाद कथित रूप से मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया. पीड़िता अपनी मां के घर रह रही थी. आरोप है कि बाद में उसके तीन वर्षीय बेटे को जबरन उससे अलग कर लिया गया. शिकायत लेकर वह दर्यापुर पुलिस थाने पहुंची, जहां से उसे तालुका प्रोटेक्शन ऑफिसर प्रफुल पुरी के पास भेजा गया. सुरक्षा अधिकारी ने तत्काल घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में बच्चे की कस्टडी और भरण-पोषण के लिए अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया. साथ ही पीड़िता को निःशुल्क विधिक सहायता और अधिवक्ता भी उपलब्ध कराया गया.
न्यायालय के आदेश के पालन के लिए प्रोटेक्शन ऑफिसर ने अकोला ग्रामीण पुलिस की सहायता से संबंधित गांव पहुंचकर कार्रवाई की. शुरुआत में बच्चे को छिपाने का प्रयास किया गया तथा विरोध भी किया गया, लेकिन न्यायालय के आदेश की जानकारी देने के बाद अंततः तीन वर्षीय बच्चे की अंतरिम कस्टडी उसकी मां को सौंप दी गई. यह पूरी कार्रवाई 4 अगस्त को जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी संजय गाट के मार्गदर्शन में संपन्न हुई. पीड़िता की ओर से अधिवक्ता लीना एच. गहरवाल ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की. इस प्रकरण ने एक बार फिर साबित किया कि सुरक्षा अधिकारी, पुलिस प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण के समन्वित प्रयास से घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को समय पर न्याय और राहत दिलाई जा सकती है.