डफरीन का फायर कंट्रोल रूम अब तक पडा था बंद, आज से हुआ शुरू

जिलाधीश येरेकर की विजिट के दौरान सामने आयी एक और बडी गडबडी

* अब तक ऑटोमैटिक थी अग्निशमन प्रणाली, आज से मैन्युअल की गई व्यवस्था
अमरावती/दि.25 – गतरोज भीषण अग्निकांड का शिकार हुए डफरीन अस्पताल की लचर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आज एक और सनसनीखेज जानकारी सामने आयी. जब जिलाधीश आशीष येरेकर दो दिन के दौरान दूसरी बार डफरीन अस्पताल का दौरा करने पहुंचे और पता चला कि, डफरीन अस्पताल का फायर कंट्रोल रूम विगत लंबे समय से बंद पडा है. यह जानकारी सामने आते ही जिलाधीश येरेकर ने उपविभागीय अधिकारी अनिल भटकर व तहसीलदार विजय लोखंडे के साथ डफरीन अस्पताल के फायर कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया तथा इस फायर कंट्रोल रूम को दोबारा शुरू कराया. साथ ही इसके लिए संबंधितों को जमकर आडे हाथ भी लिया.
इस संदर्भ में प्रशासनिक सुत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, डफरीन अस्पताल के फायर कंट्रोल स्टेशन की पूरी व्यवस्थाएं ऑटोमैटिक यानी स्वयंचलित थी और आग लगने जैसी स्थिती में अग्निशमन यंत्रणा को अपने आप ही सक्रिय कर देती थी. परंतु विगत कई दिनों से यह फायर कंट्रोल रूम बंद पडा हुआ था. जिसकी ओर किसी का कभी कोई ध्यान ही नहीं था. इस दौरान जरूरी देखभाल व देखरेख के अभाव में फायर कंट्रोल रूम की स्वयंचलित प्रणाली ठप्प हो गई. जिसकी जानकारी किसी को नहीं थी. संभवतः यहीं वजह है कि, गतरोज तडके जब अस्पताल के एनआयसीयू कक्ष में आग लगी, तो स्प्रिंकलर व एक्सटिंगविशर प्रणाली ने खुद सक्रिय होकर आग बुझाने का काम ही नहीं किया. जिसके चलते देखते ही देखते एनआयसीयू कक्ष में लगी आग ने विकरार रूप धारण कर लिया और उस अग्निकांड में तीन नवजात बच्चों की अकारण ही जान चली गई.
गतरोज घटित अग्निकांड की घटना के मद्देनजर आज एकबार फिर डफरीन अस्पताल का मुआयना करने पहुंचे जिलाधीश आशीष येरेकर का ध्यान सबसे पहले अस्पताल के फायर कंट्रोल रूम की ओर भी गया तो पता चला कि, उक्त कंट्रोल रूम के संचालन व रखरखाव का जिम्मा अमरावती के ही विधित आवारे नामक व्यक्ती के पास है. जिसे कलेक्टर येरेकर ने तुरंत अपने सामने तलब करते हुए इस बारे में पूछताछ की तथा फायर कंट्रोल रूम को खुलवाते हुए वहां का मुआयना किया. इस समय जिलाधीश येरेकर ने फायर कंट्रोल की सभी व्यवस्थाओं को ऑटोमैटिक मोड पर रखने की बजाए मैन्यूअल मोड पर रखने के निर्देश जारी किए तथा अस्पताल प्रबंधन को समय-समय पर फायर कंट्रोल रूम का जायजा लेते रहने के लिए कहा.

* शेलर कंपनी के तकनिशियनों से भी जिलाधीश ने की पूछताछ
– कल राज्यस्तरीय समिती के सामने होगी कंपनी के लोगों की पेशी
बता दे कि, डफरीन अस्पताल में वेंटिलेटर की आपूर्ति व देखभाल का जिम्मा शेलर नामक कंपनी पर सौंपा गया है और वेंटिलेटर में ही विस्फोट होने की वजह से अस्पताल के एनआयसीयू में आग लगने की जानकारी सामने आयी है. जिसके चलते आज दूसरी बार जिला स्त्री अस्पताल के दौरे पर पहुंचे जिलाधीश येरेकर ने शेलर कंपनी के तकनिशियनों से इस बारे में बातचित व पुछताछ की. साथ ही बताया कि, कल बुधवार 26 अगस्त को स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर गठीत स्वास्थ्य संचालक की अध्यक्षता वाली राज्यस्तरीय समिती अमरावती के दौरे पर आ रही है. उस समिती द्वारा भी शेलर कंपनी के तकनिशियनों व अधिकारियों से इस बारे में बातचित की जाएगी और पूरी जांच पडताल के बाद अगले 7 दिनों में समिती द्वारा अपनी रिपोर्ट पेश की जाएगी. जिसके आधार पर जिम्मेदार व दोषी रहनेवाले लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाएगी.

* पूजा बोरगे के परिजनों से मिले जिलाधीश येरेकर
– पति स्वप्निल बोरगे सहित परिजनों के सब्र का टूटा बांध
अपने इस दौरे के तहत जिलाधीश येरेकर ने गतरोज घटित भीषण अग्निकांड में अपना नवजात बच्चा खो चुकी पूजा बोरगे के पति स्वप्निल बोरगे सहित उनके परिजनों से भी भेंट की. इस समय जिलाधीश से बातचित के दौरान बोरगे परिवार के सब्र का बांध टूट गया. इस वक्त स्वप्निल बोरगे ने जिलाधीश को बताया कि, उसका परिवार मूलतः पूलगांव क्षेत्र से वास्ता रखता है और रविवार को ही उसकी पत्नी पूजा की आठवें माह में समयपूर्व ्रप्रसुती हुई थी एवं उन्हें पहली संतान के तौर पर बेटा हुआ था. जिसे अगले कुछ घंटों के दौरान ही अमरावती के डफरीन अस्पताल के एनआयसीयू में शिफ्ट कर दिया गया. जिसके चलते पूजा बोरगे अपने नवजात बच्चे का चेहरा तक नहीं देख पायी थी. बेटे की पैदाईश के चलते परिवार में जबरदस्त खुशी थी. परंतु उसी रात सबकुछ अचानक बदल गया. स्वप्निल बोरगे ने यह भी बताया कि, घटनावाली रात वह डफरीन अस्पताल में ही था, लेकिन तडके 3.30 बजे घटित अग्निकांड में उसके नवजात बच्चे की मौत हो जाने की खबर उसे सुबह 7 बजे दी गई. इसके साथ ही स्वप्निल बोरगे ने यह भी बताया कि, उसकी पत्नी पूजा बोरगे अब भी जिला स्त्री अस्पताल में भर्ती है. जिसे उसके नवजात बच्चे की अग्निकांड में मौत हो जाने की कोई जानकारी नहीं है. साथ ही उसका पूरा परिवार इस समय सदमे में है. जिसके चलते किसी को यह समझ नहीं आ रहा कि, आखिर पूजा बोरगे को इस घटना के बारे में कैसे जानकारी दी जाए.
इन तमाम बातों को सुनते हुए जिलाधीश आशीष येरेकर भी काफी हद तक भावुक व निशब्द हो गए. जिसके बाद उन्होंने खुद को संभालते हुए स्वप्निल बोरगे सहित उसके माता-पिता व भाई को ढांढस बंधाया. साथ ही सांत्वना देते हुए कहा कि, यद्यपि अग्निकांड के भेंट चढे बोरगे परिवार के नवजात बच्चे को अब किसी भी सूरत में वापिस नहीं लाया जा सकता है. परंतु जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार द्वारा बोरगे परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी.

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