प्रत्येक पार्षद को दी जाएगी 50 लाख रुपए की विकास निधि

स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर का कथन

* प्रशासक राज के बाद अब स्वच्छ व सुंदर शहर के लिए ठोस नियोजन
* मनपा के आगामी बजट से तय होगी शहर के विकास की दिशा
* मनपा की आर्थिक स्थिति को सुधारने हेतु करेंगे सटीक नियोजन
अमरावती/दि.16 – विगत 4 वर्षों से अमरावती महानगर पालिका में जनप्रतिनिधियों का अस्तित्व नहीं रहने तथा प्रशासक राज लागू रहने के चलते शहर के सर्वांगिण विकास की गति काफी हद तक सुस्त हो गई थी. प्रशासक राज के दौरान निर्णय प्रक्रिया में जनता द्वारा निर्वाचित पार्षदों का कोई सहभाग नहीं रहने के चलते आम जनता की समस्याओं की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया. परंतु अब मनपा में नए जनप्रतिनिधियों के निर्वाचित होकर पहुंचने के चलते शहर की प्रगति को लेकर नागरिकों की उम्मीदें काफी अधिक बढ गई है. इन सभी बातों पर सकारात्मक विचार करते हुए इस बार महानगर पालिका का बजट शहर के विकास को नई चमक व नई दिशा देनेवाला रहेगा, ऐसा विश्वास मनपा की स्थायी समिति के सभापति अविनाश मार्डीकर द्वारा व्यक्त किया गया.
हाल ही में अमरावती महानगर पालिका की स्थायी समिति के सभापति के तौर पर जिम्मेदारी व पदभार स्वीकार करनेवाले नवनियुक्त स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के साथ विशेष तौर पर बातचीत करते हुए महानगर पालिका की मौजूदा स्थिति तथा भविष्य के नियोजन पर विस्तृत प्रकाश डाला. उनका कहना रहा कि, इस समय महानगर पालिका की आर्थिक स्थिति विशेष समाधानकारक नहीं है. परंतु इसमें से रास्ता निकालते हुए प्रत्येक प्रभाग के विकास कामों हेतु प्रत्येक पार्षद को कम से कम 50-50 लाख रुपयों की स्वतंत्र निधि उपलब्ध कराने का उनका मानस है. इस बातचीत के दौरान स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने शहर की स्वच्छता एवं विकास को लेकर अपनी सुस्पष्ट भूमिका रखते हुए कहा कि, महापौर शहर के प्रथम नागरिक व महानगर पालिका के संवैधानिक प्रमुख होते है. मनपा से संबंधित कोई भी नीतिगत निर्णय महापौर की अध्यक्षता वाली आमसभा में लिया जाता है. महानगर पालिका में प्रमुख तौर पर तीन प्राधिकरण कार्यरत रहते है. जिसमें पहला प्राधिकरण महासभा यानि महापौर, दूसरा प्राधिकरण संपूर्ण आर्थिक व्यवहार का जिम्मा संभालने वाली स्थायी समिति तथा तीसरा प्राधिकरण मनपा के प्रशासनिक कामकाज का जिम्मा संभालने वाले आयुक्त होते है. ऐसे में भले ही तिजोरी की चाबी स्थायी समिति के पास होती है, लेकिन उसका कहां प्रयोग करना है, इससे संबंधित सभी अधिकार आयुक्त के पास होते है. यह अपने-आप में सबसे महत्वपूर्ण व तकनीकी विषय आयुक्त ही एक तरह से स्थायी समिति व महापौर के बीच सबसे महत्वपूर्ण कडी होते है. महासभा के पास नीतिगत निर्णय लेने का सबसे बडा अधिकार है और महापौर ही अपने-आप में सबसे बडे प्राधिकरण रहने के चलते उनकी सहमति के बिना अंतिम निर्णय नहीं होता. एक बार निर्णय होने के उपरांत उसे अमल हेतु आयुक्त के पास भेजा जाता है. किसी भी निविदा को अंतिम मान्यता देने का अधिकार आयुक्त के पास रहता है. हालांकि वह विषय स्थायी समिति के पास चर्चा के लिए आता है, जिस पर स्थायी समिति द्वारा योग्य पडताल करने के बाद मान्यता दी जाती है.
पार्षद पद एवं स्थायी समिति के सभापति पद हेतु पार्टी द्वारा खुद पर दिखाए गए विश्वास को लेकर आभार व कृतज्ञता व्यक्त करते हुए स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि, अजीत पवार गुट वाली राकांपा के नेता व विधायक संजय खोडके तथा विधायक सुलभा खोडके ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक बार फिर एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. विधायक संजय खोडके उनके लिए केवल पार्टी के नेता ही नहीं है, बल्कि उनके लिए बडे भाई व मार्गदर्शक की तरह है. जिनके साथ वे हमेशा से एकनिष्ठ रहे और आगे भी एकनिष्ठ रहेंगे. इसके साथ ही स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने यह भी कहा कि, वे इससे पहले भी तीन बार स्थायी समिति के सभापति रह चुके है और उनके किसी भी कार्यकाल दौरान उन पर एक नए पैसे की गडबडी का भी कोई आरोप नहीं लगा. क्योंकि जनता के लिए काम करते समय उन्होंने हमेशा ही पारदर्शक व सतर्क तरीके से काम किया.
इस बातचीत में स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि, मनपा का इस बार का बजट बेहद आश्वासक रहेगा. परंतु प्रशासक राज के दौरान मनुष्यबल की आवश्यक व्यवस्था नहीं की गई. जिसका सीधा असर शहर के साफ-सफाई व्यवस्था पर पडा. क्योंकि मनुष्यबल के बिना साफ-सफाई के काम ही नहीं हो सकते. वहीं दूसरी ओर विगत 4 वर्षों के दौरान अमरावती महानगर पालिका में जनता द्वारा निर्वाचित नगरसेवक भी नहीं थे. जिसकी वजह से सफाई व्यवस्था और भी अधिक गडबडा गई, यह अपने-आप में एक हकीकत है.
चौथी बार स्थायी समिति के सभापति बने अविनाश मार्डीकर ने इस बातचीत में यह भी कहा कि, नगरसेवकों को उनके प्रभागों की ‘ए टू झेड’ जानकारी रहती है. जिसकी तुलना में प्रशासनिक अधिकारियों के पास रहनेवाली जानकारी को कम कहा जा सकता है. यह भी प्रशासक राज के दौरान शहर में व्यवस्था बिगडने की एक सबसे प्रमुख वजह रही. नगरसेवकों को सर्वसामान्य जनता चुनकर देती है. जिसके चलते नगरसेवकों से जनता की कुछ अपेक्षाएं रहती है. आज नगरसेवकों को सुबह उठने से लेकर देर रात तक सैकडों फोन आते है. जिससे जनता की अपेक्षाएं व उम्मीदे स्पष्ट होती है. इस विश्वास को बनाए रखने हेतु इस बार के बजट में कुछ विशेष प्रावधान किए जाएंगे.
साफ-सफाई के कामों को लेकर अपनी बात रखते हुए स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि, अब सफाई ठेकेदार के देयक जारी करते समय संबंधित प्रभाग के नगरसेवक की ओर से उक्त ठेकेदार का काम समाधानकारक रहने का पत्र जोडना आवश्यक किया गया है, ताकि काम की गुणवत्ता को टिकाए रखा जा सके. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, मौजूदा आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक ने शहर के विकास की दृष्टि से काफी अच्छा काम किया है. लेकिन यह भी सही है कि, शहर में साफ-सफाई हेतु नियुक्त कोणार्क कंपनी को लेकर फैसले में जल्दबाजी हुई है. हालांकि अब भी ठेका करार में दुरुस्ती के पर्याय खुले हुए है. इस हेतु महापौर, उपमहापौर, सभागृह नेता, नेता प्रतिपक्ष एवं सभी गट नेताओं की एक समिति स्थापित की गई है और यह समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी.
इस बातचीत के अंत में स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि, शहर को स्वच्छ व सुंदर करने हेतु सभी का सहयोग मिलना बेहद जरुरी है. साथ ही प्रत्येक नगरसेवक को 50-50 लाख रुपए की निधि देकर सभी प्रभागों का कायाकल्प करने का उनका मानस है.
* वस्तुनिष्ठ व लोकाभिमुख बजट देने का पूरा प्रयास
स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि, इस वर्ष महानगर पालिका का पहला लोक नियुक्त बजट पेश होनेवाला है. सरकार की ओर से 217 करोड रुपए का एलबीटी रिटर्न मिलता है. वहीं 200 करोड रुपए मनपा की अपनी खुद की आय है. ऐसे करीब 437 करोड रुपए की मनपा को राजस्व आय होती है. जिसमें से होनेवाला खर्च करीब 400 करोड के आसपास है. ऐसे में इस मर्यादित निधि से शहर की बढती जरुरतों को पूरा करने हेतु एक वस्तुनिष्ठ व लोकाभिमुख बजट देने का पूरा प्रयास किया जाएगा.
* भविष्य की जरुरतों के हिसाब से नियोजन
स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने यह भी कहा कि, सन 2011 की जनगणना के बाद अमरावती शहर की जनसंख्या और क्षेत्रफल में काफी बडे पैमाने पर विस्तार हुआ है. जिसके चलते अब पुराने दायरे से बाहर निकलकर नियोजन करना होगा. क्यूआर कोड के जरिए आय के नए साधन निर्माण करने पर पूरा ध्यान दिया जाएगा. जिसके संदर्भ में नागरिकों के सुझाव भी लिए जाएंगे. साथ ही साथ शहर का चेहरा-मोहरा बदलने हेतु आधुनिक तंत्रज्ञान एवं जनप्रतिनिधियों के अनुभव का सहारा लेकर विकास की नई दिशा तय की जाएगी.

Back to top button