तरबूज खाने से विषबाधा नहीं
रसायन का अतिरिक्त इस्तेमाल

* बढती उष्णता के परिणाम की विशेषज्ञों की संभावना
मुंबई/दि.29– पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चार लोगों की संदिग्ध विषबाधा से मौत के मामले में तरबूज को जिम्मेदार ठहराने की चर्चा पर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ तरबूज खाने से ज़हर होना संभव नहीं है. मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, घटना के पीछे अन्य कारण हो सकते हैं, जिनकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी. प्रारंभिक अंदाज़ों में यह भी माना जा रहा है कि गर्मी के मौसम में खाना जल्दी खराब होने या किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की वजह से यह घटना हुई हो सकती है.
* डॉक्टरों की राय
जे.जे. अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय सुरासे ने बताया कि पीड़ित परिवार ने तरबूज खाने की बात कही थी, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि ज़हर उसी से हुआ. उन्होंने कहा कि असली कारण पोस्टमॉर्टम और लैब रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा. डॉक्टर मोहन जोशी के अनुसार, तरबूज खुद ज़हरीला नहीं होता, लेकिन यह संभव है कि परिवार ने पहले कोई अन्य खराब या दूषित भोजन किया हो, जिसका असर बाद में दिखा हो.
* केमिकल और मिलावट की आशंका
विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ मामलों में फलों को जल्दी पकाने या आकर्षक बनाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड, फॉर्मेलिन या ऑक्सीटोसिन जैसे रसायनों का अवैध उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इसके अलावा, कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल से भी फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है.
* तरबूज व्यापार पर असर
इधर, खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के कारण तरबूज का निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे नवी मुंबई के एपीएमसी फल बाजार में मांग घट गई है. व्यापारियों के अनुसार, पहले 25-30 रुपये प्रति किलो बिकने वाला तरबूज अब 10-15 रुपये प्रति किलो तक आ गया है. फिलहाल यह स्पष्ट है कि तरबूज को लेकर फैली अफवाह निराधार है. इस घटना की वास्तविक वजह मेडिकल जांच के बाद ही सामने आएगी.