उबाठा सांसद की पत्नी का हालचाल जानने एकनाथ शिंदे सीधे अस्पताल पहुंचे

राजनीतिक चर्चाएं, ’ऑपरेशन टाइगर’ फिर चर्चा में

मुंबई/दि.5 – राज्य की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं को हवा देने वाली घटना सामने आई है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ठाकरे गुट के उत्तर-पूर्व मुंबई के सांसद संजय दीना पाटिल की पत्नी का अस्पताल जाकर हालचाल जाना. पल्लवी पाटिल का हाल ही में एक्सीडेंट हुआ है और उनका फिलहाल इलाज चल रहा है. यह जानकारी मिलते ही शिंदे मंगलवार को सीधे मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल पहुंचे और उनसे मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे की यह मुलाकात सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके स्वभाव की इंसानियत का अहसास कराने वाली है. राजनीति में भले ही वे कट्टर विरोधी हों, लेकिन मुसीबत के समय मदद के लिए दौड़ने की उनकी शैली पहले भी कई बार देखने को मिली है. संजय दीना पाटिल के परिवार से बातचीत करते हुए उन्होंने पल्लवी पाटिल की तबीयत की विस्तृत जानकारी ली.
इससे पहले भी एकनाथ शिंदे विपक्षी नेताओं के प्रति सहानुभूति दिखा चुके हैं. सांसद संजय राउत के बीमार होने पर उन्होंने विधायक सुनील राउत को फोन कर हालचाल जाना था. इसलिए, शिंदे एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं जो केवल अपनी पार्टी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सभी के साथ संवाद बनाए रखते हैं. इसी पृष्ठभूमि में संजय दीना पाटिल की पत्नी से की गई मुलाकात को भी उसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है.
हालाँकि, मौजूदा राजनीतिक स्थिति में इस मुलाकात को अलग नजरिए से देखा जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से ठाकरे गुट के कुछ सांसदों के बगावत के कगार पर होने की चर्चा जोरों पर है. ऐसे समय में शिंदे द्वारा समय निकालकर सांसद के परिवार से मुलाकात करने से ’ऑपरेशन टाइगर’ फिर से चर्चा में आ गया है. इस मुलाकात के पीछे केवल मानवता की सोच है या इसके पीछे कोई राजनीतिक गणित है, इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
इस बीच, कुछ दिन पहले ही ठाकरे गुट के कुछ सांसदों द्वारा गुप्त रूप से एकनाथ शिंदे से मिलने की चर्चा ने जोर पकड़ा था. बताया जा रहा था कि यह बैठक अप्रैल के महीने में आधी रात को ठाणे के वोल्टास इलाके में हुई थी. इस बैठक में अरविंद सावंत, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और राजाभाऊ वाजे उपस्थित थे, जबकि कुछ सांसदों के वीडियो कॉल के जरिए शामिल होने की जानकारी सामने आई थी.
* क्या नया समीकरण बनेगा
हालाँकि, ठाकरे गुट के सभी सांसदों ने इस बैठक की चर्चाओं को खारिज कर दिया था. फिर भी, इस मुलाकात के बाद उन चर्चाओं को एक बार फिर हवा मिल गई है. एकनाथ शिंदे के इस कदम से आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में नया समीकरण बनेगा या नहीं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं. फिलहाल भले ही इस मुलाकात को मानवीय दृष्टिकोण से देखा जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक परिणाम क्या होंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.

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