पूर्व विधायक बाजोरिया की दावेदारी अधर में
कांग्रेस का निर्दलीय के तौर पर समर्थन देने से इंकार

* पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडने का ऑफर
* शिंदे सेना से वास्ता रखनेवाले बाजोरिया पाला बदलने के मुड में नही
* महायुति के तहत अमरावती सीट से टिकट मिलने का कोई चांस भी नहीं
अमरावती/दि.26- इससे पहले तीन बार अकोला-वाशिम-बुलढाणा निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य रह चुके पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया इस बार अमरावती निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लडने के काफी हद तक इच्छूक थे और महायुति के तहत शिंदे गुटवाली शिवसेना से खुद को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने के लिए काफी हद तक प्रयासरत भी थे. लेकिन अमरावती सीट पर भाजपा ने शुरू से अपना दावा करते हुए अपना प्रत्याशी भी लगभग तय कर लिया है. जिसके चलते शिंदे सेना से प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर पूर्व विधायक बाजोरिया के पक्ष में मामला नहीं जम पाया. ऐसे में पूर्व विधायक बाजोरिया ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडने और अपनी दावेदारी के लिए कांग्रेस पार्टी का समर्थन हासील करने की कोशिशे करनी भी शुरू की. लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देने की बजाय अपना खुद का प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारने की बात स्पष्ट रूप से कही. साथ ही साथ पूर्व विधायक बाजोरिया को कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर विधान परिषद का चुनाव लडने के संदर्भ में ऑफर भी दिया गया. परंतु शिंदे सेना से वास्ता रखनेवाले पूर्व विधायक बाजोरिया इस समय पाला बदलने के मुड में नहीं हैं. जिसके चलते फिलहाल उनकी दावेदारी का मामला अधर में ही लटका हुआ हैं.
बता दें कि तत्कालीन भाजपा सेना युति के प्रत्याशी के तौर पर पूर्व विधायक बाजोरिया लगातार तीन बार अकोला, वाशिम, बुलढाणा निकाय क्षेत्र की सीट से विधान परिषद के लिए निर्वाचित होते रहे साथ ही उनके बेटे विप्लव बाजोरिया भी हिंगोली-परभनी निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के सदस्य रहे. साथ ही साथ इस समय बाजोरिया पिता-पुत्र शिंदेगुटवाली शिवसेना में शामिल है. खास बात यह है कि शिंदेगुटवाली शिवसेना ने विप्लव बाजोरिया को एक बार फिर हिंगोली-परभनी सीट से अपना प्रत्याशी बनाए जाने का निर्णय लिया है. वहीं अकोला-वाशिम-बुलढाणा सीट पर पिछला चुनाव गोपीकिसन बाजोरिया हार गए थे जहां पर इस वक्त चुनाव नहीं हो रहा . ऐसे में गोपीकिसन बाजोरिया ने एक बार फिर विधान परिषद में पहुंचने के लिए अमरावती निकाय क्षेत्र की सीट पर अपनी नजरे गडाई हैं. लेकिन यहां पर उनके पक्ष में बात बनती दिखाई नहीं दे रही. क्योेंकि अमरावती सीट महायुति के तहत भाजपा के कोटे में छूटी हैं. जिसके चलते शिंदे गुट वाली शिवसेना द्बारा इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं दिया जा सकता. ऐसे में पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडा एवं विपक्षी दलो का समर्थन हासिल करने के बारे भी संभावनाओं को टटोला. जिसके तहत उन्होंने जिले की कद्दावर कांग्रेस नेत्री व पूर्व मंत्री एड. यशोमति ठाकुर तथा पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख सहित कांग्रेस के शहर व जिला अध्यक्षों से भी मुलाकात करके देख ली. लेकिन जिले में कांग्रेस की सर्वोच्च नेता रहनेवाली पूर्व मंत्री एड. यशोमति ठाकुर ने बाजोरिया को साफ तौर पर बताया कि कांग्रेस पार्टी द्बारा विधान परिषद के चुनाव में किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी का समर्थन नहीं किया जाएगा. बल्कि कांग्रेस खुद अपना प्रत्याशी खडा करनेवाली है. ऐसे में यदि बाजोरिया चाहे तो उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने के बारे में भी सोचा जा सकता है. परंतु शिंदे सेना से वास्ता रखनेवाले पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया किसके समर्थन में दिखाई नहीं दिए. जिसके चलते उनकी दावेदारी का मामला अब भी अधर में लटका हुआ है. और इस बात को लेकर अच्छी खासी उत्सुकता देखी जा रही है कि बाजोरिया चुनाव लडते ही है या नहीं और अगर वे चुनाव लडते है तो जिस पार्टी की टिकट पर लडते है या फिर अपने दम पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लडते है.
* रिश्तेदारों के जरिए मतदाताओं के घर आम की पेटियां
यहा यह विशेष उल्लेखनीय है कि अमरावती निकाय क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लडने के इच्छूक पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया एक-दो बार अमरावती का दौरा करते हुए कांग्रेस नेताओं से मुलाकात कर चुके है. लेकिन उन्होंने निकाय क्षेत्रो के जनप्रतिनिधियों यानी मतदाता सदस्यों के साथ सीधे तौर पर कोई संपर्क नहीं किया. बल्कि अमरावती में रहनेवाले अपने रिश्तेदारों ेके जरिए मतदाताओं तक हापुस आम की पेटियां उपहार के तौर पर भिजवाई हैं.
* बाजोरिया ने मीडिया से बनाई दूरी
खास बात यह भी है कि अमरावती निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लडने के इच्छूक पूर्व विधायक गोपीकिसन बाजोरिया की संभावीत दावेदारी को लेकर स्थानीय मीडिया में लगातार खबरे प्रकाशित हो रही है. लेकिन पूर्व विधायक बाजोरिया ने एक बार भी स्थानीय मीडिया के साथ संपर्क करते हुए अपनी स्थिति को स्पष्ट नहीं किया. साथ ही मीडिया द्बारा जानकारी व प्रतिक्रिया हेतु संपर्क किए जाने पर भी पूर्व विधायक बाजोरिया की ओर से जवाब में कभी कोई प्रतिसाद नहीं मिला. ऐसे में अब बाजोरिया की आगे की रणनीति क्या रहेगी इसका आकलन करना कुछ हद तक मुश्किल कहा जा सकता है.





