मेलघाट की स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर आईएएस बनने तक का सफर
सीईओ सत्यम गांधी ने सुनाई संघर्ष, सफलता और सेवा की प्रेरक कहानी

* ‘मीट द प्रेस’ में बोले अमरावती जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी
* युवाओं को दिया ‘गोल्डन टाइम’ का मंत्र, मेलघाट के विकास का रखा विजन
अमरावती/ दि. 14- मेलघाट की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना, आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना, महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और युवाओं को आत्मप्रेरणा के बल पर आगे बढ़ने के लिए तैयार करना, इन्हीं विषयों के इर्द-गिर्द अमरावती जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं युवा आईएएस अधिकारी सत्यम गांधी ने गुरुवार को आयोजित ’मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में खुलकर संवाद किया. इस दौरान उन्होंने न केवल जिले के विकास की अपनी कार्ययोजना साझा की, बल्कि अपने जीवन के संघर्ष, असफलताओं, पारिवारिक कठिनाइयों और यूपीएससी में सफलता की प्रेरक कहानी भी पत्रकारों के सामने रखी.
जिला मराठी पत्रकार संघ द्वारा वालकट कंपाउंड परिसर स्थित मराठी पत्रकार भवन में आयोजित कार्यक्रम में जिप सीईओ सत्यम गांधी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला मराठी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने की. इस अवसर पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रशासनिक, सामाजिक और विकासात्मक प्रश्नों का सीईओ गांधी ने विस्तार से उत्तर दिया.
* मेलघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष फोकस, बाल एवं मातृ मृत्यु दर में आई कमी
अमरावती जिले के आदिवासी बहुल और दुर्गम क्षेत्र मेलघाट की चर्चा करते हुए सीईओ सत्यम गांधी ने स्वीकार किया कि आज भी वहां कनेक्टिविटी की समस्या विकास में सबसे बड़ी बाधा है. हालांकि उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. उन्होंने बताया कि मेलघाट में बाल मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में बड़ी कमी आई है. संस्थागत प्रसवों की संख्या बढ़ी है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर काम किया जा रहा है. सीईओ गांधी ने कहा कि जिला परिषद का विशेष ध्यान अब स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर है. इसी दिशा में मेलघाट के चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को ‘स्मार्ट पीएचसी’ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है. इन केंद्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, बेहतर चिकित्सा उपकरण और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मेळघाट की स्थिति पहले की तुलना में काफी बदली है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. प्रशासन इस दिशा में दीर्घकालिक और परिणामकारी कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है.
* हर आंगनवाड़ी में पानी, बिजली और बेहतर भवन का लक्ष्य
सीईओ सत्यम गांधी ने बताया कि जिले की सभी आंगनवाड़ियों को मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है. प्रत्येक आंगनवाड़ी में स्वच्छ पेयजल, बिजली, सुरक्षित भवन और बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इसके साथ ही मेलघाट की दस आंगनवाड़ियों को ‘मॉडल आंगनवाड़ी’ के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि उन्हें पूरे जिले के लिए आदर्श केंद्र बनाया जा सके. महिला सशक्तिकरण को लेकर भी उन्होंने कई योजनाओं का उल्लेख किया. महिला बचत समूहों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना तथा आधुनिक तकनीक से जोड़ना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है. उन्होंने बताया कि जिले के प्रत्येक तहसील में कम से कम एक ‘ड्रोन दीदी’ तैयार करने का लक्ष्य है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीक और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा सके.
* सोशल मीडिया नहीं, आत्मप्रेरणा बनाती है सफल
आज की ‘जेन-जी’ पीढ़ी पर बोलते हुए सीईओ सत्यम गांधी ने कहा कि वर्तमान समय में युवा सोशल मीडिया के प्रभाव में तेजी से आ रहे हैं. यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर मिलने वाली प्रेरणा अस्थायी होती है, जबकि वास्तविक सफलता के लिए आत्मप्रेरणा सबसे महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने कहा, यदि किसी व्यक्ति के भीतर कुछ हासिल करने की तीव्र इच्छा और दृढ़ संकल्प है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता. बाहरी मोटिवेशन कुछ समय के लिए प्रभावी हो सकता है, लेकिन जीवन बदलने वाली ताकत भीतर से आती है.
* 18 से 25 वर्ष की आयु ‘गोल्डन टाइम’
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने विशेष रूप से कहा कि 18 से 25 वर्ष की आयु जीवन का ‘गोल्डन टाइम’ होती है. इस अवधि का सदुपयोग करना चाहिए. जितना संभव हो, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई, ज्ञानवर्धन और व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि युवाओं को रोज अखबार पढ़ना चाहिए, अच्छी किताबों का अध्ययन करना चाहिए और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए. सफलता मिलने के बाद सोशल मीडिया का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन सफलता से पहले उसका अत्यधिक उपयोग समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी है.
* पांचवीं कक्षा में शुरू हुई आईएएस बनने की तैयारी
अपने जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए सत्यम गांधी ने बताया कि उनके आईएएस बनने की नींव बचपन में ही पड़ गई थी. उन्होंने कहा कि उनके दादा की इच्छा थी कि परिवार से कोई एक व्यक्ति भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाए. इसी उद्देश्य से उन्होंने पांचवीं कक्षा से ही सत्यम को रोज सुबह अखबार पढ़ने की आदत डाली. एक गिलास दूध और एक अखबार उनके बचपन की नियमित दिनचर्या बन गई थी. यही आदत आगे चलकर सामान्य ज्ञान, विश्लेषण क्षमता और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में बेहद उपयोगी साबित हुई.
* असफलताओं ने नहीं तोड़ा हौसला
सीईओ सत्यम गांधी ने बताया कि उनका सफर कभी भी आसान नहीं रहा. नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में वे असफल हो गए थे. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा पास की, लेकिन 11 दिनों तक चली मेडिकल जांच में उन्हें ‘कलर ब्लाइंडनेस’ होने का पता चला और उनका चयन नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि उस समय यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. बल्कि हर असफलता के बाद यही सोचा कि शायद भगवान ने मेरे लिए कोई और बड़ा अवसर तय किया है. यही सोच उन्हें यूपीएससी की तैयारी की ओर ले गई.
* कोविड, आर्थिक संकट और कर्ज के बीच हासिल किया ऑल इंडिया 10वां रैंक
यूपीएससी की तैयारी के दौरान भी चुनौतियों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उन्हें तीन बार कोविड-19 हुआ. इंटरव्यू से ठीक पहले भी वे कोरोना संक्रमित हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इंटरव्यू दिया. अंततः वर्ष 2020 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 10 वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया. उन्होंने कहा कि उनकी रणनीति हमेशा स्पष्ट रही-टेस्ट मैच नहीं, टी-20 खेलना है. यानी सीमित समय में अधिकतम और प्रभावी प्रयास करना.
* मां के इलाज के लिए परिवार पर चढ़ा था 12 से 15 लाख का कर्ज
जिप सीईओ सत्यम गांधी ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर का उल्लेख करते हुए बताया कि जब वे दसवीं कक्षा में थे, तब उनकी मां गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थीं. इलाज के लिए परिवार को 12 से 15 लाख रुपये तक का कर्ज लेना पड़ा. परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी. बावजूद इसके उनके माता-पिता ने कभी उनकी पढ़ाई रुकने नहीं दी और दिल्ली भेजकर यूपीएससी की तैयारी का अवसर दिया. उन्होंने कहा कि आईएएस बनने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपने परिवार पर चढ़ा पूरा कर्ज चुकाया. उनके लिए यह केवल आर्थिक जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि माता-पिता के त्याग का सम्मान था.
* दादा का सपना पूरा हुआ, लेकिन अंतिम दर्शन नहीं कर सके
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब सीईओ सत्यम गांधी ने अपने दादा के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि उनके दादा का सपना था कि उनका पोता एक दिन आईएएस अधिकारी बने और सरकारी गाड़ी में पुलिस सुरक्षा के साथ गांव पहुंचे. जब वे आईएएस बने, तो दादा का यह सपना पूरा हुआ. लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था. वर्ष 2024 में दादा के निधन के समय वे चुनाव ड्यूटी में व्यस्त थे. सरकारी जिम्मेदारियों के कारण वे अंतिम समय में उनके पास नहीं पहुंच सके और अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए. यह प्रसंग सुनाते समय सीईओ सत्यम गांधी भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि यह दर्द उन्हें जीवनभर रहेगा, लेकिन कर्तव्य पालन को उन्होंने हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है.
* प्रशासन में जवाबदेही जरूरी, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
अपने प्रशासनिक दृष्टिकोण पर बोलते हुए सीईओ गांधी ने स्पष्ट कहा कि वे काम में किसी भी प्रकार की लापरवाही या टालमटोल स्वीकार नहीं करते. उन्होंने कहा कि जब किसी अधिकारी या कर्मचारी को कोई जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो उसे समय पर और पूरी ईमानदारी से पूरा किया जाना चाहिए. जवाबदेही तय होगी तभी व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन आएगा. जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के संबंधों पर उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता की समस्याएं लेकर आते हैं, यह उनका दायित्व है. प्रशासन की जिम्मेदारी उन कार्यों को नियमों के अनुसार पूरा करना है. किसी भी प्रकार का दबाव हो, लेकिन काम केवल नियमों के अनुसार ही किया जाएगा, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा.
* डहाणू से अमरावती तक का प्रशासनिक सफर
महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी सत्यम गांधी ने मसूरी स्थित लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके बाद उनकी पहली नियुक्ति पालघर जिले के डहाणू में परियोजना अधिकारी एवं सहायक कलेक्टर के रूप में हुई. बाद में वे सांगली-मिरज-कुपवाड़ महानगरपालिका के आयुक्त बने और वर्तमान में अमरावती जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. दिलचस्प बात यह है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच भी वे निरंतर अध्ययन कर रहे हैं और एरोनॉटिक्स विषय में उच्च शिक्षा के लिए प्रतिदिन लगभग तीन घंटे पढ़ाई करते हैं.
* विवाह के सवाल पर दिया मुस्कुराता जवाब
कार्यक्रम के अंत में जब एक पत्रकार ने उनसे विवाह को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, शादी अमरावती में ही होगी, इसके लिए प्रयास जरूर करूंगा. बस जीवनसाथी विचारों से मेल खाने वाली होनी चाहिए. उनके इस जवाब पर सभागार में ठहाके गूंज उठे.
* युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बने सत्यम गांधी
जिला मराठी पत्रकार संघ द्बारा आयोजित ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक संवाद नहीं था, बल्कि संघर्ष, अनुशासन, पारिवारिक मूल्यों, आत्मप्रेरणा और कर्तव्यनिष्ठा की एक जीवंत कहानी था. आर्थिक अभाव, बार-बार की असफलताएं, पारिवारिक संकट, कोविड जैसी चुनौतियों को पार कर देश की सबसे कठिन परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले सीईओ सत्यम गांधी ने यह साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती. मेलघाट के विकास का उनका विजन, युवाओं को दिया गया समय प्रबंधन का संदेश और प्रशासनिक जवाबदेही पर उनका स्पष्ट रुख उन्हें केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक बनाता है.





