स्वास्थ्यवर्धक जंगली सब्जियां पहुंची शहर के बाजारों में

काटवल, कर्टुले, वाघोटे, काटेमाट व तरोटा की विक्री शुरू

* मांग बढते ही शहर में जगह-जगह सजी ‘रानभाजी’ की दुकानें
अमरावती/दि.6- बारीश का मौसम शुरू होते ही विविध प्रकार की जंगली सब्जियां यानी ‘रानभाजी’ शहर के बाजारों में विक्री हेतु पहुंचनी शुरू हो जाती है. स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी तथा स्वाद के लिहाज से बेहद स्वादिष्ट रहनेवाली इन जंगली सब्जियों को लेकर खाद्य प्रेमियों में जबरदस्त क्रेज भी दिखाई देती है और बारीश का मौसम शुरू होते ही रानभाजी की अच्छी-खासी मांग भी दिखाई देने लगती है. यहीं वजह है कि बारीश का मौसम शुरू होते ही शहर में जगह-जगह पर जंगली सब्जियों के विक्री केंद्र शुरू हो गए है. जहां पर हडसन, काटवल, कर्टुले, वाघोटे, काटेमाट, फांजी, झुटेला के फुल व तरोटा जैसी जंगली प्रजाति वाली सब्जियों की विक्री हो रही है.
विशेष उल्लेखनिय है कि नियमित सागसब्जियों की तुलना में रानभाजी के दाम कुछ हद तक अधिक है. कुछ जंगली सब्जियां पहली ही बारीश के बाद जंगल में उगनी शुरू हो जाती है. जिन सब्जियों को कोमल रहते समय ही खाना होता है ऐसी सब्जियां बारीश के शुरूआती दौर के समय ही बाजार में विक्री हेतु पहुंचने लगती है. वहीं बांबू कंद, सुरन व काटवल जैसी जंगली सब्जियां थोडा विलंब से बाजार में पहुंचती है. इस बार बारीश का मौसम शुरू होने में थोडा विलंब हुआ. जिसके चलते जंगली सब्जियों की पहली खेप भी बाजार में थोडा विलंब से ही पहुंची. लेकिन अब जंगली सब्जियां के बाजार में पहुंचने का दौर शुरू हो चुका है.
इस समय शहर के चपराशीपुरा, शेगाव, रहाटगाव, इतवाराबाजार व नवसारी चौक जैसे स्थानों पर ग्रामीण क्षेत्र से आए महिला व पुरूष किसान तरह-तरह की जंगली सब्जियों की विक्री हेतु लिए बैठे दिखाई देते है. इन जंगली सब्जियों के दाम 20 से 50 रूपये प्रति पाव के आसपास है. विद्यमी सब्जियों के दाम कुछ हद तक अधिक महसूस होते है. परंतु उन सब्जियों को जंगल से निकालकर अमरावती तक लाने में लगनेवाले परिश्रम को ध्यान में रखते हुए ग्राहकों द्वारा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी रहनेवाली सब्जियों को खरिदा जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक बाजार में जंगली सब्जियोें के उपलब्ध रहने का दौर आगामी एक-दो माह तक चलता रहेगा और इस दौरान तरह-तरह की जंगली सब्जियों की उपलब्धता भी होती रहेगी. इसमें प्रमुख तौर पर कर्टुले, चिवल, आगाडा, हडसन, शेपु, पाथरी, अंबाडी, केना, करवंद, चमकुरा पत्ते, फांंदी की सब्जी, तरोटा, आंबटचुका, वाघाटे, गोबरूकंद, तांदुलजा, सुरणकंद, कुई, गुलवेल, शेवगा, कुंजीर व बांबुकंद जैसी अलग-अलग जंगली सब्जियों का समावेश रहेगा.

* मसालों की वजह से सब्जियों के औषधी गुण नष्ट होते है तथा सब्जियों को पकाते समय मसालों का अत्याधिक प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए. जंगली सब्जियां स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होती है. जो पूरे सालभर स्वास्थ्य को संभालने के लिए मदद करती है. अतः बारीश के दौरान इन सब्जियों का प्रयोग जरूर करना चाहिए.
– डॉ. अविनाश दिवे, आहार विशेषज्ञ

* जंगली सब्जियों के दाम
कर्टुले – 40 से 50 रूपये पाव
अंबाडी – 20 रूपये गड्डी
करवंद – 50 से 60 रूपये पाव
तरोटा – 20 से 25 रूपये गड्डी
सुरनकंद – 50 से 60 रूपये पाव
शेवगा – 40 से 50 रूपये पाव
अन्य सब्जियां – 50 से 60 रूपये पाव

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