साइबर ठगी के बाद पैसे कैसे वापस पाएं?
पहले घंटे में करें पुलिस में शिकायत, प्रशासन की अपील

अमरावती/दि.10- साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने नागरिकों को ठगी की रकम जल्द वापस दिलाने और फ्रीज बैंक खातों को दोबारा सक्रिय करने के लिए ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल शुरू किया है. इन डिजिटल व्यवस्थाओं से पीड़ितों को पुलिस, बैंक और अदालत के लंबे चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है.
* ठगी होते ही क्या करें?
जैसे ही साइबर ठगी का पता चले, पहले एक घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें. साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल लूलशीलीळाश.र्सेीं.ळप पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें.
* कैसे मिलेगा पैसा वापस?
शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस संदिग्ध बैंक खाते की पहचान कर उसे फ्रीज करने की कार्रवाई करती है. इसके बाद नए मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से रकम का डिजिटल और कानूनी सत्यापन किया जाता है. सत्यापन पूरा होने पर राशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में वापस भेजी जाती है.
* फ्रीज खाते भी होंगे चालू
जांच के दौरान कई बार संदेह के आधार पर निर्दोष लोगों के बैंक खाते भी फ्रीज हो जाते हैं. नए सिस्टम के जरिए ऐसे खातों का शीघ्र सत्यापन कर उन्हें दोबारा सक्रिय करने की प्रक्रिया भी तेज होगी.
* कोर्ट और बैंक के चक्कर से राहत
पहले फंसी हुई राशि वापस पाने के लिए अदालत से एनओसी और अन्य कानूनी आदेश लेने में महीनों लग जाते थे. अब डिजिटल प्रक्रिया के जरिए ऑनलाइन सत्यापन के बाद पैसा वापस मिलने की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी होगी.
* पांच महीने में 2.22 करोड़ की साइबर ठगी
इस वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में साइबर अपराधियों ने लोगों से 2.22 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. प्रशासन का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज कराने से रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
* बचाव के लिए सावधानियां
– वॉटसएप या टेलिग्राम पर अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें.
– ओटीपी, एटीएम पीन, सीवीवी या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें.
– ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी धमकियों से घबराएं नहीं और तुरंत 1930 या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.