गर्मी की मार से 10 में से 7 बच्चे स्कूल नहीं जा पाते

पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर

नई दिल्ली /दि.10 – देश में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी का असर अब बच्चों की शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है. बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन उठध की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मई-जून 2026 के दौरान 10 में से 7 बच्चों (68 फीसद) ने गर्मी के कारण स्कूल नहीं जा पाने की बात स्वीकार की है.
‘फिलिंग द हिट : चिल्ड्रन्स वाईसेस ऑन हिट, वेल-बीईंग एण्ड लर्निंग इन इंडिया’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 3,096 बच्चों की राय शामिल की गई. रिपोर्ट के मुताबिक 76 फीसद बच्चों ने कहा कि भीषण गर्मी के कारण उनकी पढ़ाई में एकाग्रता प्रभावित होती है, जबकि 89 फीसद बच्चों के लिए स्कूल का समय तनावपूर्ण बन गया है. वहीं 47 फीसद बच्चों ने दोपहर की स्कूल पाली को सबसे अधिक कठिन बताया. रिपोर्ट के अनुसार, 88 फीसद बच्चों ने महसूस किया कि इस वर्ष गर्मी पहले की तुलना में कहीं अधिक तीव्र रही. कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के कारण स्कूलों को समय बदलना पड़ा, आउटडोर गतिविधियां सीमित करनी पड़ीं और कुछ स्थानों पर कक्षाएं अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ीं.
* बिजली और पानी की समस्या भी बढ़ी
रिपोर्ट में बताया गया है कि 53 फीसद बच्चों ने घरों में बार-बार बिजली कटौती या अत्यधिक गर्मी की समस्या बताई, जबकि 30 फीसद बच्चों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा. इससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ दैनिक जीवन भी प्रभावित हुआ.
* गरीब परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, दिहाड़ी मजदूर या श्रम आधारित परिवारों के 71 फीसद बच्चों ने अत्यधिक गर्मी से तनाव महसूस करने की बात कही, जबकि अन्य परिवारों के 46 फीसद बच्चों ने ऐसा अनुभव साझा किया. इससे स्पष्ट होता है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अधिक सामना कर रहे हैं.
* परिवारों में भी बढ़ा तनाव
रिपोर्ट में सामने आया कि 59 फीसद बच्चों के अनुसार गर्मी ने उनके माता-पिता के काम को और कठिन बना दिया है. 58 फीसद बच्चों ने कहा कि गर्मी के कारण माता-पिता के व्यवहार में बदलाव आया, जबकि 43 फीसद बच्चों ने बताया कि घर का तनाव बढ़ गया है. उठध की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूजा मारवाड़ा ने कहा कि गर्मी का असर केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवार के जीवन पर पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से अपील की कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए बच्चों के हितों को केंद्र में रखकर नीतियां बनाई जाएं.

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