संपत्ति कर वृद्धि से लेकर नगरोत्थान निधि के मुद्दे गूंजे

अमरावती मनपा आमसभा में हुआ जबरदस्त घमासान

* नई कर दरों का कांग्रेस सहित विपक्ष ने किया जोरदार विरोध
* प्रशासक राज के कार्यों की जांच की मांग, सत्तापक्ष से मांगा जवाब
* गैस पाइपलाइन खुदाई, दलित बस्ती निधि और मनपा की आर्थिक स्थिति भी बनी चर्चा का केंद्र
अमरावती/दि.20- अमरावती महानगरपालिका की गुरुवार को विश्वरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागृह में आयोजित आमसभा में संपत्ति कर वृद्धि, नगरोत्थान निधि से किए गए 250 करोड़ रुपये के विकास कार्य, प्रशासक राज में हुए कथित भ्रष्टाचार, गैस पाइपलाइन परियोजना, दलित बस्ती सुधार निधि और मनपा की आर्थिक स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस हुई. सुबह 10 बजे शुरू हुई सभा शाम तक चली और कई विषयों पर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए. समाचार लिखे जाने तक मनपा की आमसभा चल रही थी. जिसमें संपत्ति कर की नई दरों को लेकर सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच जबरदस्त घमासान जारी था.
सभा में प्रश्न क्रमांक-6 के तहत संपत्ति कर की नई दरों तथा संपत्ति कर वृद्धि का विषय प्रस्तुत किया गया. राज्य सरकार द्वारा दो दिन पूर्व संपत्ति कर वृद्धि पर लगी स्थगन हटाए जाने के बाद मनपा प्रशासन ने नई दरों के अनुसार कर वसूली का संकेत दिया. इस प्रस्ताव का कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्षदों ने कड़ा विरोध किया. नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले, कांग्रेस पार्षद बबलू शेखावत और मिलिंद चिमोटे ने कहा कि शहरवासियों पर करों का अतिरिक्त बोझ डालने से पहले यह देखा जाना चाहिए कि उन्हें महानगरपालिका की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. उनका कहना था कि शहर की सड़कों, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है, ऐसे में कर वृद्धि उचित नहीं कही जा सकती.
* गैस पाइपलाइन खुदाई को लेकर घेरा प्रशासन
संपत्ति कर वृद्धि पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने शहर में अदानी गैस कंपनी द्वारा घर-घर गैस आपूर्ति के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. पार्षदों ने कहा कि लगभग 10 से 12 किलोमीटर के दायरे में फैले अमरावती शहर में करीब 450 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने के लिए जगह-जगह पांच-पांच फीट गहरी खुदाई की जा रही है. विपक्ष का आरोप था कि शहर की अधिकांश सड़कें खोद दी गई हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और शहर का सौंदर्य बिगड़ रहा है. आगामी गणेशोत्सव और दुर्गोत्सव के दौरान नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. पार्षदों ने सवाल उठाया कि पाइपलाइन परियोजना कब पूरी होगी और खोदी गई सड़कों को कब तक पूर्ववत किया जाएगा, इस संबंध में न तो प्रशासन और न ही सत्तापक्ष ने कोई स्पष्ट जानकारी दी है. विपक्षी सदस्यों ने सुझाव दिया कि अदानी गैस कंपनी से शहर को ‘स्मार्ट सिटी’ के रूप में दत्तक लेने तथा सड़क मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए अग्रिम राशि वसूलने पर विचार किया जाना चाहिए.
कांग्रेस पार्षद मिलिंद चिमोटे ने कहा कि उन्होंने पिछली सभा में इस परियोजना का विस्तृत प्रारूप मांगा था और महापौर द्वारा इस संबंध में रूलिंग भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद परियोजना का खाका सभा के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया. इस पर सभागृह नेता चेतन गावंडे ने कहा कि विषय अत्यंत व्यापक है, इसलिए इसका विस्तृत प्रारूप अगली आमसभा में रखा जाएगा. वहीं महापौर श्रीचंद तेजवानी ने एक माह के भीतर इस विषय पर ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया.
* 250 करोड़ के नगरोत्थान कार्यों को मिली मंजूरी
आमसभा में नगरोत्थान निधि के तहत प्रशासक राज के दौरान किए गए लगभग 250 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई. बताया गया कि तत्कालीन आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर के कार्यकाल में यह निधि प्राप्त हुई थी और उससे शहर में अनेक विकास कार्य कराए गए थे, किंतु उन्हें प्रशासनिक स्वीकृति मिलना शेष था. सभा में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य सरकार से नगरोत्थान योजना के तहत अतिरिक्त 75 करोड़ रुपये की निधि मिलने की संभावना है. ऐसे में पूर्व में किए गए कार्यों को औपचारिक मंजूरी देना आवश्यक था. प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई, लेकिन इसके साथ ही प्रशासक काल के कार्यों की जांच की मांग भी जोरदार तरीके से उठी.
* प्रशासक राज के कार्यों की जांच की मांग
विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि प्रशासक राज के दौरान विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं. उनका दावा था कि शहर की कई सड़कों का निर्माण दो से चार बार तक दिखाया गया और करोड़ों रुपये खर्च किए गए. उन्होंने इन कार्यों का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराए जाने की मांग की. इस विषय पर हुई चर्चा में नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले, कांग्रेस पार्षद अनिल अग्रवाल, बबलू शेखावत, मिलिंद चिमोटे, एमआईएम पार्षद नजिब खान, युवा स्वाभिमान के गटनेता नाना आमले और पार्षद प्रशांत वानखड़े, शिवसेना के डॉ. राजेंद्र तायडे, राष्ट्रवादी कांग्रेस के मंगेश मनोहरे तथा भाजपा पार्षद प्रदीप हिवसे और मिलिंद बांबल ने भाग लिया.
* विधायकों के हस्तक्षेप और पार्षदों की उपेक्षा का आरोप
चर्चा के दौरान विपक्षी पार्षदों ने कहा कि अमरावती महानगर क्षेत्र अमरावती और बडनेरा विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित है. दोनों क्षेत्रों के विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में निधियों और विकास कार्यों पर दावा करते हैं, जिसके कारण सीमावर्ती प्रभागों में विकास कार्य प्रभावित होते हैं. पार्षदों ने आरोप लगाया कि प्रशासन सत्तापक्ष और विधायकों के दबाव में काम करता है, जिससे निर्वाचित पार्षदों के अधिकार प्रभावित होते हैं. उनका कहना था कि मनपा चुनाव हुए लगभग आठ माह बीत चुके हैं, लेकिन विपक्षी पार्षदों को एक बार भी विश्वास में नहीं लिया गया और न ही उन्हें अपने प्रभागों में किसी विकास कार्य का भूमिपूजन करने का अवसर मिला.
* पार्षदों को निधि नहीं मिलने पर नाराजगी
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि नगरोत्थान निधि के तहत प्रत्येक पार्षद को 40 लाख रुपये तथा स्वेच्छा निधि के तहत 10 लाख रुपये आवंटित किए जाने चाहिए थे, लेकिन अब तक कोई राशि उपलब्ध नहीं कराई गई. इसके कारण अधिकांश प्रभागों में विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगरोत्थान निधि से संबंधित कोई निर्देश या पत्र अब तक झोन कार्यालयों को जारी नहीं किया गया है और किसी भी प्रभाग में ठोस काम प्रारंभ नहीं हुआ है.
* 30 प्रतिशत हिस्सेदारी और जीएसटी में कटौती पर चिंता
सभा में यह मुद्दा भी उठा कि नगरोत्थान योजना में महानगरपालिका को कुल लागत का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करना पड़ता है. विपक्ष का कहना था कि पहले से आर्थिक संकट से जूझ रही मनपा के लिए यह भार उठाना कठिन है. उन्होंने महापौर, आयुक्त, स्थायी समिति सभापति और सभागृह नेता से राज्य सरकार तथा जिला पालकमंत्री के माध्यम से इस हिस्सेदारी को माफ कराने के प्रयास करने की मांग की. इसके साथ ही जीएसटी हिस्सेदारी में आई कमी को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई. पार्षदों ने बताया कि पहले मनपा को जीएसटी के हिस्से के रूप में लगभग 48 करोड़ रुपये प्राप्त होते थे, जो अब घटकर 18 करोड़ रुपये रह गए हैं. उन्होंने कहा कि दो सांसद, दो विधायक और तीन विधान परिषद सदस्य होने के बावजूद शहर मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.
* दलित बस्ती सुधार निधि पर भी हुई विस्तृत चर्चा
आमसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस के पार्षद मंगेश मनोहरे ने दलित बस्ती सुधार निधि के वितरण का मुद्दा उठाया. कांग्रेस पार्षद अनिल अग्रवाल और मिलिंद चिमोटे ने उनका समर्थन किया. पार्षद मनोहरे ने कहा कि निधि का वितरण प्रत्येक प्रभाग में दलित बस्तियों की संख्या और आबादी के अनुपात के आधार पर होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि यह महानगरपालिका की निधि है, इसलिए इसके उपयोग के लिए राज्य सरकार की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए और इस पर पार्षदों का अधिकार होना चाहिए.
* पार्षद अनिल अग्रवाल के अध्ययन का हुआ उल्लेख
नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने चर्चा के दौरान पार्षद एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल अग्रवाल द्वारा प्रशासक राज के दौरान हुए कार्यों पर किए गए अध्ययन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि पार्षद अनिल अग्रवाल ने दस्तावेजों और आंकड़ों के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य संकलित किए हैं, जिन्हें सभी पार्षदों के समक्ष रखा जाना चाहिए, ताकि प्रशासक शासन के दौरान हुए कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके.
* सत्तापक्ष ने दिया जवाब
स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि नगरोत्थान योजना के तहत 250 करोड़ रुपये की निधि मिलना अमरावती के लिए सौभाग्य की बात है और भविष्य में सरकार से अतिरिक्त विशेष अनुदान प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा. वहीं सभागृह नेता चेतन गावंडे ने बताया कि प्रशासक राज में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए समिति गठित की जा चुकी है. समिति की जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमरावती के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में शहर को स्वच्छ, आधुनिक और विकसित बनाने के लिए बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए जाएंगे. साथ ही मनपा की आय बढ़ाने तथा जीएसटी हिस्सेदारी में आई कमी के विषय पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा की जाएगी.
* विकास, जवाबदेही और राजनीतिक टकराव के बीच रही आमसभा
करीब सात घंटे तक चली इस आमसभा में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, वित्तीय संकट और जनप्रतिनिधियों की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुखता से उभरे. एक ओर 250 करोड़ रुपये के नगरोत्थान कार्यों को मंजूरी देकर नई निधि का रास्ता साफ किया गया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने प्रशासक राज के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार, पार्षदों की उपेक्षा और मनपा की कमजोर आर्थिक स्थिति को लेकर प्रशासन और सत्तापक्ष को कठघरे में खड़ा किया. अब सभी की निगाहें उस जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो प्रशासक काल में हुए कार्यों और खर्चों की पड़ताल कर रही है. साथ ही संपत्ति कर वृद्धि, गैस पाइपलाइन खुदाई और विकास निधि के वितरण जैसे मुद्दे भी आने वाले दिनों में शहर की राजनीति और मनपा प्रशासन के केंद्र में बने रहने की संभावना है.

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