खुद के लिए अवसर तैयार करने की जिम्मेदारी हमारी
नेत्रहीन भाविक भाटिया का सुझाव

* अमरावती मैनेजमेंट एसो. व शाश्वत टॉक्स का शून्य से विश्व का दृष्टिकोण मार्गदर्शन कार्यक्रम
अमरावती/दि.15– जीवन में हमें अवसर नहीं मिलते हमें उसे खुद तैयार करना पडता है. तभी हम इस अवसर का लाभ लेते हुए अपने जीवन में आगे बढ सकते है. अन्यथा हम जहां होते है. वहीं खडे रह जाते है. इसलिए हमें जीवन में ऐसे कई कार्य करना चाहिए. जिसके माध्यम से अवसर खुद अपने आप बढकर आपके कदम चुमे. ऐसा सुझाव सनराइज कैंडल के संस्थापक नेत्रहीन भावेश भाटिया ने दिया.
स्थानीय संत ज्ञानेश्वर सांस्कृतिक भवन में सोमवार 11 मई की शाम मैनेजमेंट एसोसिएशन, महाराष्ट्र केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, क्रेडाई, घरकुल मसाले, एमआयडीसी विदर्भ महारोगी सेवा मंडल, तपोवन , प्रयास सेवांकुर, समर्पण प्रतिष्ठान, संत गाडगे महाराज रक्तपेढी, मराठा उद्योजक कक्ष, सुशीलाबाई सूर्यवंशी कॉलेज ऑफ मेनेजमेंट एंड टैक्नॉलॉजी एडवांसमेट , वंदे मातरत रक्तदान समिति, चाणक्य फाउंडेशन, शाश्वत कॉन्सेप्ट स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में शून्य से विश्व का दृष्टिकोण विषय पर मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर विशेष मार्गदर्शन के रूप में बोल रहे थे.
भावेश भाटिया ने सर्वप्रथम उनके 350 करोड के कारोबार की शुरूआत किस प्रकार हुई. इसकी यात्रा का वर्णन किया. उन्होंने इस यात्रा के दौरान बताया कि वह नेत्रहीन है. इसलिए उन्हें ऐसा लगता था कि उनके जैसे नेत्रहीन लोग महाबलेश्वर में केवल पर्यटकों से भीख मांग कर अपना जीवन यापन न करें, बल्कि उनके हाथों को भी काम मिलता रहे. शुरूआती दिनों में नेा एक मसाज सेंटर चला रहा था. लेकिन मेरी मां के कहे हुए शब्द ने मुझ में परिवर्तन लाया और मैने मसाज सेंटर की बजाय कैंडल तैयार करने का व्यवसाय शुरू कर किया. शुरूआती दिनों में इसमें काफी उतार चढाव आए. लेकिन चार लोगों से आज हजारों की संख्या में नेत्रहीन सदस्यों को मेरे जीवन का हिस्सा बनाकर उनके जीवन में लक्ष्य निर्माण कर उन्हें भी खुद के बने हुए उत्पादन से कमाई का जरिया उपलब्ध करवाया. आज हर व्यक्ति 60 से 70 हजार रूपए प्रतिमाह कमा रहा है. यही मेरे जीवन की बडी उपलब्धि है. मैं हमेशा ही चाहता था कि हम केवल निर्माता न बने, बल्कि रोजगार देनेवाले ऐसे व्यक्ति बने जो भविष्य में इस चैन को तैयार कर सके. आज देश के अमीर परिवारों में गिने जानेवाले अंबानी परिवार के हर कार्यक्रम में हमें हमारे कैंडल ही उपलब्ध करवाने का मौका नहीं मिलता. बल्कि कार्यक्रम मेंं विशेष अतिथि के रूप में सहभागी होने का मौका भी मिल रहा है. आज रिलायंस परिवार के हर सदस्य के घर पर नए वर्ष निमित्त बनाए जानेवाले गिफ्ट भी हमारी ओर से बनाए जाते हैं. यानी मैंने केवल अवसर का इंतजार नहीं किया, बल्कि अवसर निर्माण करने की कोशिश की है. इसलिए हमेशा यह सोचना चाहिए कि चीजे बनाना तो अत्यंत आसान है, लेकिन चीजे बेचना अत्यंत कठिन है और वही हमें सीखना होगा.मुश्किल से भाग जाना आसान होता है. जो लडकर जीते है उन्हें जहान मिलता है. उन्होंने आगे कहा कि मुझे अब तक नेत्रहीन होने के बावजूद हजारों लोगों को काम देने के लिए राष्ट्रपति की ओर से करीब 4 बार पुरस्कृत किया गया है. मैंने हमेशा कडी मेहनत और लगन को महत्व दिया है. अपने जीवन में बस एक बार मेहनत कर मेरे दोस्तो… इस सीख के अपनाकर मैने कार्य किया और सफलता अर्जित की. इस सफलता में जितना मेरा और मेरे जैसे भाईयों का योगदान है. उसी प्रकार मेरी पत्नी जो एक अमीर परिवार की होने के बावजूद मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर जीवन संगिनी बनकर कार्य कर रही है. ऐसी धर्म पत्नी नीति भाटिया ने भी मेरे जीवन में जो योगदान दिया है वह सराहनीय है. उनके कारण ही में कुछ चीजों में आगे बढने में कामयाब हुआ और आज 350 करोड की कंपनी का मालिक हूं. छोटी सी दुकान से चला कैंडल का यह सफर आज एक व्यापार और उद्योग बन चुका है. जो केवल मेरे लिए नहीं बल्कि मेरे जैसे कई लोगों के लिए रोजगार का साधन बन चुका है. हम कैंडल नहीं बल्कि लोगों के जीवन में रोशनी प्रज्वलित करते हैं, जो उनके जीवन को नई दिशा देने का काम करते है. इसलिए जीवन में असफलता बर्दाश्त करने की क्षमता रखिए. अथक परिश्रम करिए तो आप कठिन से कठिन राह को आसानी से पार कर खुद के लिए अवसर निर्माण कर सकते है. कार्यक्रम की प्रस्तावना अतुल गायगोले ने रखी. कार्यक्रम के अंत में दिशा आई बैंक को एक एंबुलेंस भी भेंट दी गई. इसके अलावा उपस्थित नागरिकों द्बारा पुछे गये सवालों के जवाब भी उन्होंने दिए. इस कार्यक्रम में आयोजकों की ओर से विविध मान्यवरों ने भावेश भाटिया का स्वागत एवं सम्मान किया. इस अवसर पर बडी संख्या में शहरवासी और विद्यार्थी उपस्थित थे.





