एक महीने की बच्ची को बचाने दुनिया की पहली ‘दुर्लभ’ सर्जरी
मेडिकल’ के डॉक्टरों को मिली सफलता

* ‘डबल सेरेब्रल पीयल फिस्टुला’ का पहला मामला
नागपुर/दि.15- विज्ञान की मदद और डॉक्टरों की जिद के कारण कभी- कभी मौत के दरवाजे से भी जिदंगी वापस लौट आती है. इसका अनुभव नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मेडिकल) में देखने को मिला है. केवल 30 दिन की एक मासूम सी जान के मस्तिष्क में अत्यंत जटिल और दुर्लभ रक्तवाहिनीयों की विकृति पर सफल सर्जरी कर डॉक्टरों ने उसे नया जीवन दिया है. आश्चर्य की बात यह है कि ‘डबल सेरेब्रल पीयल फिस्टुला’ यह अत्यंत दुर्लभ बीमारी है और दुनिया में इसकी यह पहली दर्ज घटना बताई जा रही है.
इस बच्ची का संघर्ष उसके जन्म से पहले ही, यानी गर्भावस्था के 24 वें सप्ताह में शुरू हो गया था. सोनोग्राफी में बच्ची के मस्तिष्क की रक्तवाहिनीयों में दोष होने का पता चला. डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मेडिकल के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग की डॉ. मंजूश्री वायकर, डॉ. आशीष झरारिया और उनकी टीम ने 36 वें सप्ताह में सिजेरियन ऑपरेशन किया. बच्ची सुरक्षित जन्मी, लेकिन खतरा टला नहीं था. जन्म के कुछ ही दिनों बाद बच्ची की आंखों में गंभीर सूजन आ गई और उनमें से रक्तस्त्राव शुरू हो गया. सिटी स्कैन में मस्तिष्क में भी रक्तस्त्राव दिखाई दिया. अत्यंत जोखिम वाली न्यूरोवैस्कुलर प्रक्रियाएं सामान्य तौर पर बच्ची के 3-4 महीने का होने के बाद ही की जाती है. क्योंकि इतनी छोटी उम्र में जान बचाना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. लेकिन समय बहुत कम था. यदि इलाज में देरी होती तो बच्ची अपनी आंखों की रोशनी और जान दोनों खो सकती थी.
‘एंडवैस्कुलर एम्बोलाइजेशन’ जटिल तकनीक का इस्तेमाल : मेडिकल की ट्रामा केयर सेंटर की अत्याधुनिक वाय- प्ले उीसए लैब में ‘इंटवेंशनल रेडियोलॉजी’ विभाग के प्रमुख डॉ. जवाहर राठोड और उनके सहयोगियों ने ‘एंडवैस्कुलर एम्बोलाइजेशन’ इस जटिल तकनीक का उपयोग कर मस्तिष्क की उन खतरनाक रक्तवाहिनियों पर सफल सर्जरी की. इस जटिल उपचार का खर्च आयुष्यमान भारत योजना के तहत किया गया. जिससे गरीब परिवार को बडा सहारा मिला.
डॉक्टरों के प्रयास सफल
अधिष्ठाता डॉ. राज गजभिये के मार्गदर्शन में उप अधिष्ठाता डॉ. देवेन्द्र महोरे, वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे की पहल पर डॉ. जवाहर राठोड , डॉ. शिवप्रसाद जायभाय, डॉ. वैजयंती गटे, डॉ. आशीष लोथे, डॉ. प्रमोद गिरी, डॉ. संजोग गजभिए, डॉ. शुभम यादव, डॉ. अमन युसूफ खान, डॉ. अपूर्वी शाह, डॉ. अर्जुन अनिल, डॉ. विश्वास पी. डॉ. आकर्ष चव्हाण, डॉ. निखिल देशमुख, डॉ. प्रणय खेडकर, डॉ. नीलेश सिन्हा, डॉ. वैजयंती गद्रे, डॉ. सोमा चाम और डॉ. नीलेश गड्डेवार के सामूहिक प्रयासों कोे सफलता मिली है.
दुनिया में ऐसे केवल 150 केस
‘सेरेब्रल पीयल फिस्टुला’ दुनिया की अत्यंत दुर्लभ मस्तिष्क बीमारियों में से एक माना जाता है. अब तक दुनिया भर के मेडिकल जानकारी में ऐसे केवल 150 से कम मरीजों की ही जानकारी दर्ज है. संभवत: ‘डबल सेरेब्रल पीयल फिस्टुला’ ही यह पहली घटना हो सकती है.
– डॉ. जवाहर राठोड,
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग, मेडिकल





