जॉबकार्ड और वर्ककोड की त्रुटियों से चांदूर रेलवे में अटका घरकुल का पैसा

उपसरपंच शेख सोनू का बीडीओ को ज्ञापन

* 15 अगस्त तक समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और अनशन की चेतावनी
चांदूर रेलवे /दि.8 – चांदूर रेलवे तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में कई घरकुल लाभार्थियों को जॉबकार्ड पर गलत नंबर दर्ज होने और वर्ककोड जनरेट नहीं होने के कारण घरकुल की राशि तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मिलने वाली मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है. इसके चलते कई लाभार्थियों के मकान निर्माण का काम अधूरा पड़ा है.
इस समस्या को लेकर चांदूरवाड़ी के उपसरपंच अब्दुल शहजाद अब्दुल रज्जाक उर्फ शेख सोनू ने पंचायत समिति चांदूर रेलवे के गटविकास अधिकारी को लिखित ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने 15 अगस्त तक समस्या का समाधान नहीं होने पर पंचायत समिति कार्यालय के सामने जनआंदोलन और अनशन करने की चेतावनी दी है.
* दो साल से समस्या, फिर भी समाधान नहीं
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पूरे तहसील में अनेक घरकुल लाभार्थियों के जॉबकार्ड नंबर गलत दर्ज किए गए हैं. वहीं कई लाभार्थियों के वर्ककोड अब तक तैयार नहीं हुए हैं. इसके कारण घरकुल के लिए मंजूर राशि के साथ ही मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी भी लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा नहीं हो पा रही है. राशि नहीं मिलने के कारण कई परिवारों के घरों का निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया है. उपसरपंच शेख सोनू का कहना है कि इस समस्या को लेकर पिछले दो वर्षों से पंचायत समिति प्रशासन के पास लगातार फॉलोअप किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला.
उन्होंने मांग की है कि 15 अगस्त तक सभी लाभार्थियों के जॉबकार्ड एवं वर्ककोड से जुड़ी तकनीकी त्रुटियों को दूर कर लंबित घरकुल निधि और मनरेगा मजदूरी का भुगतान किया जाए. अन्यथा पंचायत समिति कार्यालय के सामने आंदोलन और अनशन किया जाएगा. आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी, ऐसी चेतावनी भी ज्ञापन में दी गई है. ज्ञापन की प्रतियां तहसीलदार तथा पुलिस थाना चांदूर रेलवे को भी सौंपी गई हैं.
* दो साल हो गए, आखिरी किस्त अब तक नहीं मिली
गणेश ढोले, घरकुल लाभार्थी, कलमजापुर ने बताया कि उनका घरकुल वर्ष 2024 में मंजूर हुआ था. शुरुआत में 15 हजार, इसके बाद 45 हजार और 40 हजार रुपये की राशि मिली, लेकिन दो साल बीतने के बावजूद आखिरी किस्त अब तक नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि मनरेगा का मस्टर जमा नहीं होने के कारण 28 हजार रुपये की मजदूरी भी लंबित है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब घरकुल मंजूर हो चुका है और निर्माण कार्य शुरू हो गया है, तो एक घर को पूरा करने के लिए लाभार्थियों को आखिर कितने साल तक इंतजार करना पड़ेगा?

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