कोणार्क कंपनी का काम बढिया, नाहक हो रही राजनीति
राकांपा पार्षद रतन पहलवान डेंडूले का दो टूक कथन

* पहले की तुलना में अब शहर की साफसफाई बेहतर रहने का किया दावा
* पिछले ठेकेदारों के काम व तत्कालीन जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठाए सवाल
अमरावती/दि.14 – पिछले 8-10 वर्षों से अमरावती शहर पूरी तरह कचरा घर बना हुआ था. उस समय भी मनपा द्वारा सफाई ठेके की पध्दती पर अंमल किया जा रहा था. लेकिन तत्कालिन सफाई ठेकेदारों द्वारा शहर की साफसफाई को लेकर कोई काम नहीं किया जाता था. इसके बावजूद उन सफाई ठेकेदारों के लाखों-करोडों रूपयों के बिल अदा हो जाया करते थे. उस समय की तुलना में आज अमरावती शहर में कोणार्क कंपनी द्वारा काफी बेहतर तरीके से साफसफाई के काम किए जा रहे है. लेकिन इसके बावजूद स्थानिय जनप्रतिनिधियों द्वारा कोणार्क कंपनी के काम को लेकर बिना वजह का होहल्ला मचाया जा रहा है. जिसका कोई औचित्य नहीं है. ऐसे में समझा जा सकता है कि, कुछ लोग कोणार्क कंपनी को दिए गए सफाई ठेके के मुद्दे पर अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए राजनीति कर रहे है. जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता. इस आशय का दो टूक प्रतिपादन राकांपा के मनपा पार्षद रतन पहलवान डेंडूले द्वारा किया गया.
शहर की साफसफाई तथा कोणार्क कंपनी को दिए गए सफाई ठेके के मुद्दे पर शहर में विगत कुछ दिनों से मचे जबरदस्त हंगामे के बारे दैनिक अमरावती मंडल के साथ बातचित करते हुए पार्षद रतन पहलवान डेंडूले ने कहा कि, अमरावती महानगरपालिका में इससे पहले कचरा व सफाई के ठेके को लेकर अमरावती मनपा में ‘वन मैन शो’ चला करता था और साफसफाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति करते हुए लाखों-करोडों रूपयों के बिल निकाले जाते थे. तब किसी सांसद, विधायक या नगरसेवक द्वारा इसका कोई विरोध नहीं किया गया. जबकि उस समय अधिकांश सफाई ठेकेदार खुद अमरावती शहर के ही रहनेवाले थे. जो अपने ही शहर को गंदा रख रहे थे. वहीं आज मुंबई से एक कंपनी अमरावती आकर बेहद शानदार ढंग से काम कर रही है तो ज्यादातर लोग उस कंपनी के खिलाफ खडे होकर होहल्ला मचा रहे है. जिसके चलते समझा जा सकता है कि, कोणार्क कंपनी और सफाई ठेके की आड लेते हुए अपने व्यक्तिगत हितों को साधने के लिए जमकर राजनीति हो रही है.
इस समय पार्षद रतन पहलवान डेंडूले ने साफ शब्दों में कहा कि, कुछ लोग सीधे-सीधे कोणार्क कंपनी को ब्लैकमेल करने का प्रयास कर रहे है. ताकि खुद का कुछ फायदा किया जा सके. पार्षद रतन डेंडूले ने यह कहते हुए कहा कि, कोणार्क कंपनी का पक्ष लेते हुए कहा कि, यदि कोणार्क कंपनी का अमरावती मनपा पर लगभग 18 करोड रूपयों का बिल हो चुका है और इसकी ऐवज में मनपा द्वारा कोणार्क कंपनी को केवल 1 करोड रूपये का भुगतान दिया गया है तो कंपनी अपने वाहनों की किश्त कहां से भरेगी और अपने कर्मचारियों का वेतन कहां से अदा करेगी. कुल मिलाकर कोणार्क कंपनी की आर्थिक मोर्चाबंदी करते हुए कंपनी को आर्थिक रूप से दिक्कत में डालने का काम किया जा रहा है.
इस बातचीत में पार्षद रतन डेंडूले ने यह भी कहा कि, इतने वर्षों से अमरावती शहर की सर्व्हिस गलियों में कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए थे, साथ ही सभी नालियां भी चोक हो गई थी. ऐसे में कोणार्क कंपनी ने खुद को ठेका मिलते ही सबसे पहले इस पुराने गलाटे को हटाने का काम किया और फिर शहर के सभी रिहायशी व व्यापारी क्षेत्र में दैनंदिन साफसफाई का काम करते हुए कचरा संकलन व कचरा ढुलाई का काम भी प्रभावी रूप से करना शुरू किया. जिसकी बदौलत धिरे-धिरे अमरावती शहर साफ सुथरा होता नजर आ रहा है. परंतु यह बात कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रही. क्योंकि कोणार्क कंपनी को कचरे का ठेका मिल जाने की वजह से उनकी दुकानदारी बंद हो गई है.
बातचीत के अंत में पार्षद रतन डेंडूले ने कहा कि, कल होनेवाली मनपा की आमसभा में एक बार फिर कचरे व गंदगी की समस्या तथा कोणार्क कंपनी को मिले सफाई ठेके को लेकर हंगामा मचना तय है. लेकिन वे मनपा की आमसभा में अपनी ओर से कोणार्क कंपनी का पक्ष रखेंगे और कोणार्क कंपनी के समर्थन में आवाज उठाएंगे.